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पीएनबी फ्रॉड: नीरव मोदी से वसूली के लिए अब ये कदम उठाएगा PNB

पीएनबी घोटाले में आरोपी नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार डायमंड की दिवालिया प्रक्रिया में PNB भी हिस्सा लेना चाहता है।

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नई दिल्ली. करीब 13 हजार करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले में आरोपी नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार डायमंड की दिवालिया (बैंकरप्‍सी) प्रक्रिया में पंजाब नेशनल बैंक भी हिस्सा लेना चाहता है। सूत्रों ने बताया कि बैंक रिकवरी के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है और इसमें फायरस्टार की बैंकरप्‍सी प्रक्रिया में हिस्सा लेना भी शामिल है।

 

 

लीगल एक्‍सपर्ट की करेगा हायरिंग 
सूत्रों के मुताबिक, पीएनबी इस मुद्दे को आगे उठाने के लिए लीगल एक्सपर्ट्स को हायर करने की प्रक्रिया में है। जल्द ही लीगल फर्म को हायर कर लिया जाएगा। इसके कई फायदे और नुकसान पर चर्चा की जा रही है। हालांकि, पीएनबी ने इस मुद्दे पर अभी कॉमेंट करने से इनकार किया है। पिछले महीने फायरस्टार डायमंड ने न्यूयॉर्क कोर्ट में दिवालिया अर्जी दायर की है। 

 

नीरव और मेहुल ने एलओयू से की धोखाधड़ी 
हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी ने भारत के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक में धोखाधड़ी वाले लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए 12,968 करोड़ रुपए का घोटाला किया। पीएनबी के मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस ब्रान्च के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर इसे अंजाम दिया। पीएनबी की इस ब्रांच से मार्च 2011 से नीरव की कंपनियों को गलत तरीके से एलओयू जारी किए ग्‍ए थे। सीबीआई और ईडी सहित कई एजेंसियां देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले की जांच में जुटी हैं। 

 

1,590 एलओयू जारी हुए थे
पीएनबी से नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और उनके एसोसिएट्स को 1,590 एलओयू जारी हुए थे। नीरम मोदी की कंपनियों, उनके संबंधिमयों और नीरव मोदी ग्रुप को 1213 एलओयू जारी किए। वहीं, मेहुल चौकसी, उसके संबंधियों और गीतांजलि ग्रुप को 377 एलओयू जारी किए थे। वित्‍त मंत्रालय ने संसद को बताया कि प्रत्‍येक एलओयू की एवज में कंपनियों की ओर से रिपेमेंट अभी तक निश्चित नहीं कहा जा सकता है क्‍योंकि इस मामले की जांच जारी है। बता दें, इस घोटाले के बाद रिजर्व बैंक ने बैंकों को एलओयू और लेटर ऑफ कम्‍फर्ट जारी करने से रोक दिया है। 

 

 

आगे पढ़ें... कैसे सामने आया पीएनबी घोटाला और कौन है मास्‍टरमाइंड? 
 
 

कैसे सामने आया PNB फ्रॉड?
- पंजाब नेशनल बैंक ने स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।
- इस घोटाले की शुरुआत 2011 से हुई। 7 साल में हजारों करोड़ की रकम फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoUs) के जरिए विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई।
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। 
- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।

 

घोटाले में कौन-कौन हैं आरोपी?
- हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप्स के मालिक मेहुल चौकसी इस घोटाले के मुख्‍य आरोपी हैं। इन दोनों ने गोकुलनाथ शेट्टी के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।
- 280 करोड़ के फ्रॉड केस में ED ने नीरव मोदी की पत्नी आमी, भाई निशाल, मेहुल चीनूभाई चौकसी, डायमंड कंपनी के सभी पार्टनर्स, सोलर एक्सपर्ट्स, स्टेलर डायमंड और बैंक के दो अफसरों गोकुलनाथ शेट्टी (अब रिटायर्ड) और मनोज खरात के खिलाफ केस दर्ज किया है। 

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