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PNB स्‍कैम: नीरव मोदी, मेहुल चौकसी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

नई दिल्‍ली. पीएनबी घोटाले में मुंबई की CBI स्‍पेशल कोर्ट ने हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ नॉन बेलेबल वॉरंट (गैरजमानती वारंट) जारी कर दिया है। करीब 13 हजार करोड़ रुपए के इस घोटाले में मोदी और चौकसी मुख्‍य आरोपी हैं। दोनों ही देश से भाग निकले हैं। 

ऑफिशियल्‍स के अनुसार, स्‍पेशल कोर्ट ने मोदी और चौकसी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के अप्‍लीकेशन को मंजूरी दे दी है। घोटाले में दोनों आरोपियों ने जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया है। पीएनबी घोटाले को देश के बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा स्‍कैम माना जाता है। सीबीआई ने मोदी और चौकसी को उनकी ऑफिशियल ई-मेल आईडी पर जांच में शामिल होने के लिए कहा था लेकिन दोनों ने कारोबारी व्‍यस्‍तता और स्‍वास्‍थ्‍य का हवाला देते हुए इनकार कर दिया है। 

 

रेड कॉर्नर नोटिस का रास्‍ता साफ 
सीबीआई स्‍पेशल कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद अब इंटरपोल से दोनों आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने का रास्‍ता साफ हो गया है। सरकार ने नीरव मोदी के हांगकांग में होने का दावा करते हुए वहां की अथॉरिटी से मोदी के प्रोविजनल गिरफ्तारी का अनुरोध किया है। 

 

भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं के अफसरों से पूछताछ 
इस बीच, जांच एजेंसी सीबीआई ने भारतीय बैंकों, जिन्‍होंने नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कंपनियों को क्रेडिट फैसेलिटी बढ़ाई थी, की विदेशी शाखाओं के अफसरों से पूछताछ कर रही है। पीएनबी की मुंबई स्थित हाउस ब्रांड से जारी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के आधार पर बैंकों ने क्रेडिट फैसेलिटी बढ़ाई थी। जांच एजेंसी ने इलाहाबाद बैंक की हांगकांग ब्रांच में फॉरेन एक्‍सचेंज ट्रांजैक्‍शन की जिम्‍मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को भी समन जारी किया है। सीबीआई का कहना है कि बैंक के अधिकारी जल्‍द जांच में शामिल हो सकते हैं। 

 

इस तरह हुआ घोटाला 
हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी ने भारत के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक में धोखाधड़ी वाले लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए 12,968 करोड़ रुपए का घोटाला किया। पीएनबी के मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस ब्रान्च के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर इसे अंजाम दिया। पीएनबी की इस ब्रांच से मार्च 2011 से नीरव की कंपनियों को गलत तरीके से एलओयू जारी किए ग्‍ए थे। सीबीआई और ईडी सहित कई एजेंसियां देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले की जांच में जुटी हैं। 

 
जारी हुए थे 1590 LoU  
पीएनबी से नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और उनके एसोसिएट्स को 1,590 एलओयू जारी हुए थे। नीरव  मोदी की कंपनियों, उनके संबंधिमयों और नीरव मोदी ग्रुप को 1213 एलओयू जारी किए। वहीं, मेहुल चौकसी, उसके संबंधियों और गीतांजलि ग्रुप को 377 एलओयू जारी किए थे। वित्‍त मंत्रालय ने संसद को बताया था कि प्रत्‍येक एलओयू की एवज में कंपनियों की ओर से रिपेमेंट अभी तक निश्चित नहीं कहा जा सकता है क्‍योंकि इस मामले की जांच जारी है। 

 

कैसे सामने आया PNB फ्रॉड?
- पंजाब नेशनल बैंक ने स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।
- इस घोटाले की शुरुआत 2011 से हुई। 7 साल में हजारों करोड़ की रकम फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoUs) के जरिए विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई।
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। 
- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।

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