Utility

24,712 Views
X
Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

US में H-1B वीजा होल्डर्स के स्पाउस को नहीं मिलेगी जॉब, इंडियंस को झटका देने की तैयारी हर तीसरे ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले को मि‍ल रहा है नकली सामान, सर्वे में खुलासा क्रूड की कीमतें 3 साल में पहली बार 75 डॉलर के पार, पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर Jio और Airtel भारत में लॉन्‍च करेंगे एप्‍पल वॉच सीरीज-3, 4 मई से शुरू होगी प्री बुकि‍ंग रेमि‍टेंस हासि‍ल करने में टॉप पर भारत, दूसरे नंबर पर रहा चीन इस बैंक ने 18 माह में 1 लाख को बनाया 1.80 लाख, आगे भी कमाई का मौका तीन फॉर्मूलों से गन्‍ना कि‍सानों को राहत देगी सरकार, जीओएम में हुई चर्चा मंगलवार के लिए इंट्राडे टिप्स, इन शेयरों में मिल सकता है अच्छा रिटर्न खास खबरः जो काम अंबानी और बिड़ला नहीं कर पाए, वो TCS ने ऐसे कर दिखाया सेंसेक्स में 149 अंकों की तेजी, निफ्टी 10600 के पार, हिंडाल्को 8.50 फीसदी टूटा चीन की ये कंपनी लाई सस्‍ते टीवी का ऑफर, 13999 रुपए में मि‍लेगा Smart TV ​रुपए में थमी गिरावट , 5 पैसे मजबूत होकर 66.42 के भाव पर खुला यूपी और बिहार की वजह से भारत पि‍छड़ा, नीति‍ आयोग के सीईओ कांत का बयान खोलना चाहते हैं रिलायंस और एस्‍सार का पेट्रोल पंप, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन मोदी देना चाहते हैं 'जहां झुग्‍गी-वहीं मकान', पर गुजरात को छोड़कर दूसरे राज्‍यों ने बनाई दूरी
बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Bankingखास खबर: सख्ती तोड़ पाएगी बैंकर-कॉरपोरेट का नेक्सस या खड़ी होगी नई परेशानी

खास खबर: सख्ती तोड़ पाएगी बैंकर-कॉरपोरेट का नेक्सस या खड़ी होगी नई परेशानी

नई दिल्ली. पीएनबी में LOU के जरिए हुए 13000 करोड़ के फ्रॉड के बाद अब सरकार और आरबीआई ताबड़-तोड़ कदम उठा रहे हैं। उनकी इस कवायद की दो मुख्य वजहें हैं, पहली यह कि सरकार और आरबीआई, फ्रॉड के बाद बैंकिंग सेक्टर पर लोगों का भरोसा फिर से बहाल करना चाहते हैं। दूसरी वजह यह है कि आगे नीरव मोदी और विजय माल्या  जैसे लोग बैंकर्स के साथ नेक्सस बनाकर अरबों का हेर-फेर न कर सकें। इसके लिए जो कदम उठाए गए हैं, उससे बैंकर और इंडस्ट्री में  बिजनेस सेंटीमेंट न बिगड़ने का डर पैदा हो गया है। खास खबर की आज की कड़ी में आज हम इस पर एनॉलिसिस कर रहे हैं कि नए कदमों से बैंकर-कॉरपोरेट नेक्सस कितना टूट पाएगा। 

 

 

माल्या से लेकर नीरव फ्रॉड में दिखा कॉरपोरेट-बैंकर्स का नेक्सस
देश के सबसे चर्चित कॉरपोरेट डिफॉल्ट केस विजय माल्या का है। जिन पर बैंकों का 6400 करोड़ रुपए लोन जानबूझ कर नहीं चुकाने का आरोप है। इस मामले में आईडीबीआई बैंक के पूर्व सीएमडी और उनके साथ 4 बैंकर गिरफ्तार हो चुके हैं। इसी तरह एक महीने पहले जब 13000 करोड़ रु का पीएनबी फ्रॉड सामने आया, तो उसमें बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर और क्लर्क का नाम मुख्य आरोपी में सामने आया है। इसके अलावा कैनरा बैंक, ओबीसी, यूबीआई जैसे बैंकों में फ्रॉड के मामले सामने आए हैं। 

 

एक पब्लिक सेक्टर बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बैंक कर्मचारियों पर कई तरह के प्रेशर पड़ते हैं। उनमें राजनेताओं से लेकर ब्यूरोक्रेट्स भी शामिल होते है। इस वजह से इस तरह के मामले होते हैं। साथ ही कई मामलों में कॉरपोरेट्स जिस तरह से पैसों का लालच देते हैं, उस झांसे में भी कई अधिकारी आ जाते हैं। अधिकारी ने बताया कि उसने एक मामला पकड़ा था, जिसमें बैंक के दो कर्मचारियों ने 50 लाख रुपए का गबन किया था। उन्होंने जमा रकम को करंसी चेस्ट नहीं पहुंचाया था। अधिकारी के अनुसार लेकिन सीबीएस होने की वजह से उन्हें पकड़ा जा सके। 

 

 

नेक्सस तोड़ने के लिए उठाए क्या कदम

  • बैंक अब एलओयू और एलओसी नहीं कर पाएंगे इश्यू
  • स्विफ्ट सिस्टम सीबीएस से डायरेक्ट होगा लिंक

इन कदमों का ये होगा असर

 

अभी तक फंड ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल हो रहे स्विफ्ट सिस्टम को कोर बैंकिंग सॉल्युशन से जोड़ा नहीं गया था। जिसका फायदा नीरव मोदी ने बैंक अधिकारियों से मिलकर LOU जारी करने में उठाया। अब सभी बैंकों को निर्देश दिए गए है कि वह अप्रैल 2018 यानी अगले महीने तक स्विफ्ट सिस्टम को कोर बैंकिंग सॉल्युशन से लिंक करा लें, जिससे फंड ट्रांसफर की रियल टाइम ट्रैकिंग हो सके। साथ ही स्विफ्ट ऑपरेशन केवल सुबह 8 बजे से लेकर रात 9 बजे तक हो सकेगा।

 

 

कॉरपोरेट लोन में बैंक करेंगे ज्यादा जांच पड़ताल

कॉरपोरेट्स जिन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज ले रखा है, उन्हें मल्टीपल बैंकिंग अरेंजमेंट की सुविधा आसानी से नहीं मिलेगी। नए सिस्टम के बाद कर्ज में डूबे कॉरपोरेट्स के लिए लोन न चुकाने की स्थिति में बैंक उन पर कई तरह की सख्ती कर सकेंगे। जिससे कि वह बैंक की दूसरी सुविधाओं को न ले सके। लोन देते समय कॉरपोरेट की कंपनी में क्या इक्विटी और किसी डिफॉल्ट के समय उसकी क्या वैल्यु होगी, उसका भी रिव्यू किया जाएगा। यानी विजय माल्या जैसी स्थिति नहीं सामने आए, इसके लिए भी सिस्टम तैयार होगा। विजय माल्या के मामले में डिफॉल्ट के बाद उनके द्वारा दी गई गारंटी की वैल्यु काफी कम हो गई। जिससे बैंक प्रॉपर्टी आदि को बेचकर भी पैसा नहीं वसूल पा रहे हैं।


कहीं कुछ की गलती की सजा सबको नहीं
नीरव मोदी के फ्रॉड में सबसे बड़ी वजह एलओयू का मिसयूज करना था। अब सरकार ने इसे देखते हुए एलओयू और एलओसी सिस्टम को ही बंद कर दिया है। पंजाब नेशनल बैंक के ही एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी का कहना है  कि एलओयू सिस्टम में कोई कमी नहीं थी। प्रॉब्लम उन दो अधिकारियों की थी। एलओयू सिस्टम में कमी नहीं थी। इसके जरिए बैंकों को भी अच्छा बिजनेस मिलता था। फाइनेंस मिनिस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार देश में अभी 5000 ब्रांचेज जैसे हैं जो एलओयू जारी करती थी। जिसमें से एक में केवल फ्रॉड का का मामला सामने आया है। अधिकारी के अनुसार ऐसे में साफ है कि एलओयू की प्रॉब्लम नहीं थी। इसे देखते हुए एलओयू और एलओसी बंद करने की जरुरत नहीं थी। सीबीएस लिंकिंग के बाद सभी तरह के लूपहोल खत्म हो जाएंगे। एसबीआई के अनुसार एलओयू बंद करने का इम्पैक्ट बैंकों पर सीधे पड़ेगा। अब उन्हें दूसरे ज्यादा समय लगने वाले तरीकों जैसे एल.सी. , बैंक गारंटी आदि को अपना पड़ेगा। बैंक की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार करीब 20 हजार-40 हजार करोड़ रुपए तक के एलओयू जारी किए गए हैं। इसके साथ ही विदेश में भारतीय बैंकों का बिजनेस गिरने की भी आशंका है। साथ ही फंड जुटाने भी मंहगा होगा।

 

इंडस्ट्री परेशान, बैंकों की चिंता बढ़ी

एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) के चेयरमैन ओमप्रकाश प्रह्लाद ने moneybhaskar.com कहा कि बैंक के एलओयू और एलओसी जारी करने पर रोक लगाने का सीधा असर 70 फीसदी एक्सपोर्टर्स पर पड़ेगा। इसका इस्तेमाल ज्यादातर छोटे एक्सपोर्टर्स करते हैं क्योंकि वह कैश में पेमेंट नहीं कर पाते। एलओयू और एलओसी पर3 से 4 फीसदी कमीशन देना होता है जबकि दूसरे सोर्स से फंड्स महंगे पड़ते हैं। ऐसे में छोटे एक्सपोर्टर्स जिसे जीएसटी में बीते 9 महीने से रिफंड नहीं मिला है और वह LOU के जरिए पेमेंट कर रहे थे उनके लिए एक्सपोर्ट करना अब मुश्किल हो जाएगा। 

 

 

Trending

NEXT STORY

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.