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PNB फ्रॉड:घोटाले में क्‍लर्क से ऑडिटर तक शामिल, रिस्‍क कंट्रोल एवं मॉनिटरिंग सिस्‍टम में बड़ी खामियां

रॉयटर्स के अनुसार, पीएनबी घोटाले की इंटरनल जांच जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों ने 162 पेज की रिपोर्ट सौंपी है।

A 162 page internal report produced by PNB officials

नई दिल्‍ली. करीब 13,000 करोड़ रुपए की पीएनबी घोटाले की इंटरनल जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं। न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, जांच में पता चला है कि बैंक के रिस्‍क कंट्रोल एवं मॉनिटरिंग सिस्‍टम में बड़ी खामियों की वजह घोटाले में बैंक इम्‍प्‍लॉइज की मिलीभगत नहीं पकड़ी जा सकी। देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पीएनबी  ने पहले कहा था कि मुंबई की एक ब्रांच में कुछ स्‍टॉफ ने दो ज्‍वैलरी ग्रुप को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी बैंक गारंटी जारी कर दी। घोटाले के मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी हैं, जिन्‍होंने बैंक‍कर्मियों से मिलकर अरबों डॉलर की फॉरेन क्रेडिट लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए हासिल कर ली। 

 

 

बैंक के सीईओ सुनील मेहता ने अप्रैल में न्‍यूज एजेंसी को बताया था कि उन्‍होंने 21 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और फर्जीवाड़े में शामिल दूसरे लोगों को भी नहीं छोड़ा जाएगा। लेकिन उन्‍हेांने फ्रॉड को एक 'मामूली उठापटक' भी बताया था। 

 

162 पेज की रिपोर्ट: कई ब्रांच से जुड़े हैं फर्जीवाड़े के तार  
पीएनबी घोटाले की इंटरनल जांच जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों ने 162 पेज की रिपोर्ट सौंपी है। इसमें कहा गया है कि फर्जीवाड़े के तार पीएनबी की कुछ नहीं बल्कि कई शाखाओं से जुड़े हैं। रॉयटर्स ने जांच रिपोर्ट की कॉपी देखी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस फ्रॉड में क्लर्क, फॉरेन एक्‍सचेंज मैनेजर और ऑडिटर से लेकर रीजनल ऑफिस के प्रमुख तक, पीएनबी के कुल 54 कर्मचारी-अधिकारी शामिल थे। इनमें से आठ लोगों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया है। इस रिपोर्ट में शामिल दर्जनों पेज के बैंक रिकॉर्ड और इंटरनल ई-मेल जिसे सीबीआई ने सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया है, इसका हिस्‍सा हैं। जांच रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। 

 

अथॉरिटी ने नहीं की कार्रवाई 
पीएनबी घोटाला जनवरी में सामने आया था। इससे न सिर्फ पीएनबी मैनेजमेंट की घोर लापरवाही सामने आई बल्कि इससे एक बड़े सरकारी बैंक पर लोगों का भरोसा भी कमजोर हुआ। रिपोर्ट में फर्जीवाड़े के बाद अथॉरिटीज के खिलाफ नियम के तहत कार्रवाई नहीं करने का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि पीएनबी पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया और सीनियर मैनेजमेंट में किसी को भी नहीं हटाया गया। 

 

वहीं, पीएनबी के प्रवक्‍ता का कहना है कि यह मामला कानूनी जांच के दायरे में है इसलिए इसकी डिटेल साझा नहीं कर सकते। हालांकि उन्‍होंने कहा कि घोटाले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी स्‍तर के इम्‍प्‍लॉई को छोड़ा नहीं जाएगा। हालांकि, रिपोर्ट इस सवाल पर मौन है कि क्या निगरानी की जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे अधिकारी फर्जीवाड़े से अवगत थे। पीएनबी ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि रिपोर्ट में जिन अधिकारियों के नाम हैं उनके खिलाफ क्‍या कार्रवाई हुई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और बैंकिंग सेक्रेटरी राजीव कुमार ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया। 

 

हेडर्क्‍वाटर में भी भारी गड़बड़ी 

इंटरनल जांच रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया कि पीएनबी जांचकर्ता क्‍या यह मानते हैं कि मॉनिटरिंग में फेल रहने वाले कर्मचारियों को घोटाले की जानकारी थी। जांच अधिकारियों का मानना है कि वर्षों से चल रहा फर्जीवाड़ा इसलिए पकड़ में नहीं आया क्योंकि नई दिल्ली स्थित पीएनबी हेडर्क्‍वाटर में क्रेडिट रिव्यू और इंटरनेशनल बैंकिंग यूनिट्स जैसे बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारी गड़बड़ी थी। चार सीनियर पीएनबी जांचकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि असफलता के पर्याप्त साक्ष्य हैं। इससे स्पष्ट है कि नियमों का उल्लंघन, अनैतिक व्यवहार, गैरजिम्मेदारी की मानसिकता ने बैंक को इस संकट में डाला है। 

 

इंटिग्रेशन वर्क में देरी
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक के इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम और आईटी डिविजन ने इंटिग्रेशन के काम में देरी की। उन्होंने 2016 में आरबीआई की ओर से आए निर्देशों का भी पालन नहीं किया जिसमें स्विफ्ट सिस्टम की ऑडिटिंग का सुझाव था। जांचकर्ताओं ने कहा कि मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस ब्रांच में नियम के तहत बेसिक डेली स्विफ्ट रीकंसिलिएशन का काम हुआ करता तो फर्जीवाड़ा पकड़ा जा सकता था। रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ इसी काम से पूरा फर्जीवाड़ा पकड़ में आ जाता। हालांकि, इस तरह की लापरवाही सिर्फ ब्रैडी हाउस ब्रांच में नहीं बल्कि अन्य कई शाखाओं में भी हुई। प्रोटोकॉल के मुताबिक, डेली रीकंसिलिएशन रिपोर्ट्स पीएनबी के नई दिल्ली स्थित हेडर्क्‍वाटर में जाना चाहिए था। इस रिपोर्ट पर ब्रैडी हाउस ब्रांच हेड का साइन होता और हर महीने इसे मुंबई सिटी के रीजनल ऑफिस में भेजा जाता। यहां से उन्हें ऑल-क्लियर सर्टिफिकेट मिलते। 
 
10 बार जांच के बाद भी नहीं मिली खामी 
पिछले साल ब्रैडी हाउस ब्रांच से 12 महीने में सिर्फ दो महीने की रिपोर्ट मिलने के बावजूद रीजनल ऑफिस ने झूठे कंप्लायंस सर्टिफिकेट पर दस्तखत कर दिया। रिपोर्ट कहती है कि इससे ब्रैडी हाउस ब्रांच में सबकुछ ठीकठाक होने का प्रमाण मिलता रहा। इतना ही नहीं, पेपर ट्रेल में बड़ी गड़बड़ी के बावजूद 2010 से 2017 के बीच 10 बार जांच के लिए आए सीनियर इंस्पेक्शन ऑफिसरों में एक भी ने किसी तरह की खामी रिपोर्ट नहीं की। 

 

शेट्टी ब्रैडी हाउस ब्रांच में सात वर्ष तक कैसे रहा  
रिपोर्ट के अनुसार, गोकुल नाथ शेट्टी ने अप्रैल 2010 में पीएनबी के फॉरेक्स डिपार्टमेंट ज्‍वाइन किया था। ब्रैडी हाउस ब्रांच ने इंटरनल बैंकिंग सिस्टम की अनदेखी करते हुए स्विफ्ट मेसेजेज के जरिए नीरव मोदी को पहली बार मार्च 2011 में 100 करोड़ रुपए की फर्जी क्रेडिट गारंटी दी थी। अगले कुछ वर्षों में शेट्टी ने 1200 से ज्यादा फर्जी क्रेडिट गारंटीज जारी कर दी थी। पीएनबी पॉलिसी के तहत कोई भी अधिकारी एक ही ब्रांच में तीन साल से ज्यादा वक्त तक नहीं रह सकता है, लेकिन शेट्टी ब्रैडी हाउस ब्रांच में सात वर्ष तक रहकर रिटायर किया। उसके कार्यकाल के दौरान तीन ट्रांसफर ऑर्डर्स जारी हुए थे, लेकिन उसे कभी हटाया नहीं गया। ब्रांच के स्टाफ को फर्जीवाड़े का पता नहीं चला होगा, यह समझ से परे है। 
 

 

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