Home » Economy » BankingBulk of NPAs arose out of bank loans before April 2014, Jaitley says

सरकार ने किसी भी कॉरपोरेट का लोन माफ नहीं किया, रिकवरी की प्रक्रिया जारी: जेटली

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने फिर साफ किया है कि सरकार ने किसी भी कॉरपोरेट का लोन माफ नहीं किया है।

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नई दिल्ली। फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने फिर साफ किया है कि सरकार ने किसी भी कॉरपोरेट का लोन माफ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि रिकवरी की जो भी प्रक्रिया है, चाहे वह दीवालिया घोषित करना हो या बैंक अकाउंट पर एक्शन करना, वह जारी है। जेटली ने यह भी कहा कि बिना जांचे-परखे अग्रेसिव ढंग से लोन बांटने की वजह से एनपीए बढ़कर 7.3 लाख करोड़ हो चुका है। 

 

 

बिना रिस्क असेसमेंट के बांटे गए लोन
अरुण जेटली ने कहा कि अधिकतर एनपीए अप्रैल 2014 के पहले बिना जांचे-परखे अग्रेसिव तरीके से बांटे गए लोन की वजह से है। बैंकों ने तब लोन बांटते हुए प्रॉपर रिस्क असेसमेंट नहीं किया। ऐसे लोन बैड लोन में बदलते चले गए। यही वजह है कि बैंकों का एनपीए जो 31 मार्च 2014 को 216 लाख करोड़ था, सितंबर 2017 तक बढ़कर 7.33 लाख करोड़ रुपए हो गया। जेटली ने राज्यसभा में य जानकारी दी है। 

 

किसी भी कॉरपोरेट का लोन माफ नहीं 
जेटली ने कहा कि सरकार ने किसी भी कॉरपोरेट का कर्ज माफ नहीं किया है। रिकवरी के लिए सभी जरूरी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि न तो सरकार और न कोई बैंक कॉरपोरेट का कर्ज माफ करती है । 4 साल के बाद, जब कर्ज नहीं चुकाने की स्थिति होती है और उसकी वसूली की संभावना कम रहती है तो उसकी श्रेणी को बदल दिया जाता है। लेकिन रिकवरी की जवाबदेही बनी रहती है। 

 

विलफुल डिफॉल्टर्स के नाम जारी होते हैं 
जेटली ने कहा कि विलफुल डिफॉल्टर्स यानी जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों के नाम बैंकों की ओर से जारी किए जाते हैं । जहां तक जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों का सवाल है तो उनकी एक अलग श्रेणी है और उस बारे में कोई गोपनीयता नहीं बरती जाती । 

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