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एक लेटर ने उड़ा दी मोदी सरकार की नींद, नाक के नीचे ऐसे चलता था रैकेट

लोकसभा चुनाव से एक साल पहले करीब 11,400 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले ने मोदी सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।

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नई दिल्‍ली. लोकसभा चुनाव से एक साल पहले करीब 11,400 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले ने मोदी सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। चार साल के मोदी सरकार के कार्यकाल में इस घोटाले ने पूरे बैंकिंग सिस्‍टम और उसकी निगरानी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस स्‍कैम में दिलचस्‍प बात यह है कि इसे एक लेटर के जरिए अंजाम दिया गया।

 

आखिर यह कैसा लेटर है और इसकी पावर इतनी कैसे है कि उससे लाखों-करोड़ों रुपए का ट्रांजैक्‍शन देश से विदेश में हो गया और बैंक के पूरे सिस्‍टम को इसकी कानोंकान खबर नहीं लगी। दरअसल, बैंकिंग की भाषा में इस पावरफुल लेटर को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) कहते हैं। सरल शब्‍दों में समझें तो एलओयू एक बैंक से दूसरे बैंक को दिया जाने वाला एक तरह का वर्चुअल डिमांड ड्रॉफ्ट (डीडी) होता है। आइए समझते हैं एलओयू का पूरा खेल... 


क्‍या है LoU?

लेटर ऑफ अंडरटेकिंग यानी एलओयू एक तरह की गारंटी होती है, जिसे एक बैंक दूसरे बैंक को जारी करता है। जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्‍डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। फाइनेंस की भाषा में कहें तो एलओयू सेक्‍योर मैसेजिंग प्‍लेटफार्म स्विफ्ट के जरिए एक मैसेज के रूप में भेजा जाता है। स्विफ्ट के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के संदेश की वैल्‍यू बैंक द्वारा दूसरे पक्ष को जारी एक डिमांड ड्रॉफ्ट के बराबर होता है।

 

स्पिफ्ट यानी Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunications, एक तरह का मैसेज भेजने और प्राप्‍त करने वाला नेटवर्क है जि‍सका इस्‍तेमाल दुनि‍याभर के बैंक और फाइनेंशि‍यल सेवाएं देने वाली अन्‍य संस्‍थाएं करती हैं। कुल मिलाकर यह समझें कि यदि अकांउट होल्‍डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाया पेमेंट करे। 

 

 

आगे पढ़ें... कैसे हुआ PNB फ्रॉड 

 

पीएनबी का फ्रॉड कैसे हुआ? 

पीएनबी के इम्‍प्‍लॉई आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की ग्रुप कंपनियों के पक्ष में स्विफ्ट के जरिए एलओयू मैसेज भेजते थे। विदेशी ब्रांच के लिए स्विफ्ट पर मिला एलओयू मैसेज एक पर्याप्‍त गारंटी होता है, जिसके आधार पर वह विदेश में मैसेज में दर्ज बेनेफिशियरी को पेमेंट कर देता है। इस मामले में यह पेमेंट मोदी और चौकसी की कंपनियों को विदेश में हुआ। 

 

पीएनबी के सामने क्‍या है खतरा? 


इस मामले में यदि पंजाब नेशनल बैंक मुंबई स्थित अपनी ब्रॉन्‍च से जारी एलओयू की गारंटी नहीं लेता है तो लोन देने वाले बैंक को पीएनबी को एक डिफॉल्टर घोषित करना होगा। इसके बाद लोन को बैंक का नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) घोषित कर दिया जाएगा और बैंक के मुनाफे में से इसकी प्रोविजनिंग करनी होगी। 


इसके बाद विदेश में लोन देने वाला बैंक पीएनबी से लोन वसूलने के लिए कानूनी रास्ता अपनाएगा। इसके बाद एक इस बात की संभावना है कि विदेश में लोन देने वाले बैंक पीएनबी का एलओयू लेने से इनकार कर दें। 


वहीं, इस घोटाले में ज्‍यादातर फंड विदेश में उपलब्ध करवाए गए हैं, इसलिए लेंडर ने जिस देश में एलओयू के जरिए फंड जारी किए हैं, वहां पीएनबी की लोकल ब्रांच में क्लेम कर सकता है। विदेश में पीएनबी के लोकल ब्रांच द्वारा क्लेम सेटल नहीं करने पर स्थानीय रेग्युलेटर इस मामले में पीएनबी की लोकल ब्रांच पर दबाव बना सकते हैं।

 

आगे पढ़ें... चुनाव से पहले इस घोटाले का क्‍या होगा असर 

 

 

चुनाव से पहले उड़ी मोदी सरकार की नींद 


मोदी सरकार के लिए दिक्‍कत की बात है कि यह फ्रॉड एक सरकारी बैंक के जरिए अंजाम दिया गया और उसके आरोपी मामला सामने आने के ठीक कुछ दिन पहले ही सुरक्षित देश छोड़कर चले गए। जाहिर तौर यह हालात सरकार की जवाबदेही और सिस्‍टम पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस इस मामले पर पूरी तरह हमलावर है। इस घोटाले को कांग्रेस जहां मोदी सरकार की देन बता रही है। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पीएनबी स्‍कैम किसी संजीवनी से कम नहीं दिखाई पड़ रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी ने इसे कांग्रेस के समय का स्‍कैम बताया है। बीजेपी का कहना है कि उसके सिस्‍टम की सतर्कता से यूपीए के समय का यह घोटाला सामने आया है। 

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