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PNB घोटाला: अमेरिका में बैंक के फेवर में सरकार, हांगकांग कोर्ट में पीएनबी ने दाखिल की याचिका

मोदी सरकार ने अमेरिका में नीरव मोदी की कंपनी की बैंकरप्‍सी प्रक्रिया में दखल दिया है।

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नई दिल्‍ली. मोदी सरकार ने अमेरिका में नीरव मोदी की कंपनी की बैंकरप्‍सी प्रक्रिया में दखल दिया है। सरकार ने पीएनबी के हितों का सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने यह जानकारी दी। करीब 13 हजार करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी आरोपी हैं और दोनों देश से भाग चुके हैं। दोनों ने फर्जी एलओयू के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया। इस  बीच, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को नीरव मोदी से पैसा वसलूने के लिए बैंक ने हांगकांग की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। 

 

 

चौधरी का कहना है कि नीरव मोदी की कुछ कंपनियों ने अमेरिका में बैंकरप्‍सी के लिए फाइल किया, जोकि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के हितों के लिए घातक है। नीरव की कंपनियों का यह कदम भारत में चल रही कई एजेंसियों की जांच के खिलाफ है। इन कंपनियों की ओर से भारतीय कानून का उल्‍लंघन और धोखाधड़ी की गई। इन्‍हें भारत में आरोपी बनाया जाना जरूरी है। 

 

चौधरी ने एक इंटरव्‍यू में बताया कि चूंकि नीरव मोदी की कंपनियों यानी फायरस्‍टार डायमंड एंड अन्‍य के खिलाफ पीएनबी फ्राड मामले में जांच चल रही है, इसलिए इन कंपनियों की ओर से अमेरिका में बैंकरप्‍सी फाइल करना भारतीय बैंक के हितों को नुकसान पहुंचाएगा। कानून एवं राज्‍य मंत्री चौधरी ने कहा कि हमने हमारे हितों को बचाने के लिए अमेरिका में बैंकरप्‍सी प्रक्रिया में हस्‍तक्षेप किया है।

 

27 फरवरी को नीरव मोदी की कंपनी फायरस्‍टार डायमंड इंक ने अमेरिका में बैंकरप्‍सी फाइल किया था। पिछले महीने सीनियर सरकारी अफसरों ने कहा था कि बैंकरप्‍सी प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की जाएंगी, जिससे कि कंपनी की संपत्त्यिां पीएनबी घोटाले की जांच पूरी होने से पहले ही न बेची जा सके। 
 
NCLT ने संपत्ति बेचने पर लगा रखी है रोक 
23 फरवरी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) ने 60 कंपनियों की संपत्तियों को बेचने पर रोक लगा दी थी। इसमें नीरव मोदी, मेहुल चौकसी की कंपनियां भी शामिल है। वहीं, सीरियस फ्रॉड इन्‍वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) इस घोटाले के संबंध में 107 कंपनियों और नीरव मोदी व मेहुल चौकसी ग्रुप से जुड़ी सात लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप की जांच कर रहा है। चौधरी ने बताया कि एसएफआईओ छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा। इसके अलावा, अन्‍य दूसरी कंपनियां सीबीआई और ईडी भी पीएनबी घोटाले की जांच कर रही हैं। 

 

हांगकांग कोर्ट पहुंचा पीएनबी 
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को नीरव मोदी से पैसा वसलूने के लिए बैंक ने हांगकांग की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। साथ ही पीएनबी ने उन सभी देशों में अदालती कार्यवाही शुरू करने का फैसला किया है, जहां नीरव मोदी और उसके कारोबारी मामा मेहुल चौकसी की संपत्तियां और कारोबार हैं। आधिकारिक जानकारी अनुसार, हांगकांग अथॉरिटी से संपर्क कर नीरव मोदी की कंपनियों के खिलाफ रिकवरी रिट दाखिल की गई है। 

 

हांगकांग में है नीरव मोदी?
बता दें कि पिछले दिनों भारत ने हांगकांग की सरकार से अनुरोध किया था कि वह नीरव मोदी को गिरफ्तार करे। 12 अप्रैल को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा था, "हमने हांगकांग में अधिकारियों से नीरव मोदी को भारत को सौंपने का आग्रह किया है।" संसद सत्र में विदेश राज्य मंत्री ने अपने एक लिखित जवाब में संसद को बताया था कि नीरव मोदी हांगकांग में है। 

 

भगोड़ों की संपत्ति जब्‍त करने के लिए अध्‍यादेश 
इस बीच, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक अध्यादेश पर शनिवार को अपनी मुहर लगा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश-2018 लाने का फैसला किया गया। अध्यादेश के तहत भारत या विदेशों में अपराध से अर्जित संपत्तियों की कुर्की शीघ्र करने के लिए एक विशेष प्‍लेटफॉर्म बनाया जाएगा। यह भगोड़े अपराधियों की भारत वापसी के लिए दबाव बनाएगा, जिससे अपराध के मामलों में भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र में उनके खिलाफ मुकदमा चलाना आसान होगा। 


विदेशी भाग निकले नीरव, मेहुल 
सीबीआई को पूरे घोटाले की सूचना मिलने के बाद नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और उसका परिवार विदेश फरार हो गया था। सरकार ने घोटाले के दोनों मास्टरमाइंट के पासपोर्ट रद्द कर दिए हैं। साथ ही वित्तिय लेन-देन पर नजर रखने वाली एजेंसी दोनों हीरा कारोबारी के ठिकानों पर छापेमारी की है। ईडी का दावा है कि नीरव मोदी की संपत्तियों को जब्त किया गया है। 

 

 आगे पढ़ें... कैसे सामने आया पीएनबी घोटाला?

 

 

कैसे सामने आया PNB फ्रॉड?
- पंजाब नेशनल बैंक ने स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।
- इस घोटाले की शुरुआत 2011 से हुई। 7 साल में हजारों करोड़ की रकम फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoUs) के जरिए विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई।
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। 
- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।

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