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कोचर पद छोड़ती हैं तो कौन बनेगा नया एमडी-सीईओ, ICICI चेयरमैन ने फंड हाउसेस से की चर्चा

कोचर पर वीडियोकॉन लोन घोटाले के आरोप लगे हैं, जिससे फंड हाउसेस घबराए हुए हैं।

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मुंबई. आईसीआईसीआई बैंक में भारी हिस्‍सेदारी रखने वाले फंड हाउसेस के प्रमुखों ने बैंक के गैर-कार्यकारी चेयरमैन एमके शर्मा से मुलाकात कर चंदा कोचर के खिलाफ लगे आरोपों समेत तमाम मुद्दों पर बात की। सूत्रों के अनुसार, कोचर पर वीडियोकॉन लोन घोटाले के आरोप लगे हैं, जिससे फंड हाउसेस घबराए हुए हैं। इसमें अहम चर्चा चंदा कोचर के उत्‍तराधिकारी को लेकर भी हुई। 

 

 

बैंक के एक सूत्र ने बताया कि म्‍यूचुअल फंड हाउसेस की चिंताओं को लेकर बैंक के चेयरमैन एमके शर्मा के साथ उनके प्रमुखों की मीटिंग हुई। इसमें चंदा कोचर के बाद बैंक की कार्यकारी कमान किसके हाथ में होगी, इसपर भी चर्चा की गई। यानी, चंदा कोचर यदि आईसीआईसीआई बैंक के एमडी एंड सीईओ का पद छोड़ती हैं तो उनके बाद इस पर कौन होगा। 

 

बैंक में फंड हाउसेस का 30 हजार करोड़ से ज्‍यादा लगा है 
बाजार के आंकड़ों के अनुसार, फंड हाउसेस का आईसीआईसीआई बैंक में 30 हजार करोड़ रुपए ज्‍यादा लगा है। आईसीआईसीआई देश का सबसे बड़ा निजी बैंक है। घरेलू, ग्‍लोबल इंस्‍टीट्यूशंस और फंड हाउसेस की बैंक में हिस्‍सेदारी 72 फीसदी से ज्‍यादा है। इस माह की शुरुआत में हुई कई बैठकों के बाद यह माना जा रहा है कि शर्मा ने लीडरशिप को लेकर स्‍टेकहोल्‍डर्स की चिंताओं को दूर किया है। बैंक के पास कोचर के बाद दूसरी पं‍क्ति के लीडर्स का मजबूत पूल है। ध्‍यान देने वाली बातय है कि कोचर पर लगे आरोपों का बैंक ने खारिज किया है। 

 

क्‍या हैं आरोप?  
आरोप है कि चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के चलते ही वीडियोकॉन का आईसीआईसीआई बैंक ने करीब 3200 करोड़ का लोन दिया और बाद में वीडियोकॉन इससे में से करीब 2800 करोड़ की रकम बैंक को लौटाने में नाकाम रहा।
आईसीआईसीआई बैंक और वीडियोकॉन ग्रुप में निवेशक अरविंद गुप्‍ता का आरोप है कि आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन ग्रुप को 3250 करोड़ रुपए का लोन गलत तरीके से दिया। इसमें बैंक के अधिकारियों और वीडियोकॉन ग्रुप के बीच मिलीभगत थी। ग्रुप बाद में यह लोन चुका नहीं पाया और पूरा लोन एनपीए हो गया। उनका आरोप है कि वीडियोकॉन ग्रुप ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को आर्थिक फायदा पहुंचाया। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है कि क्‍या लोन किसी को फायदा पहुंचाने के लिए दिया गया। 

 

बैंक ने किया था बचाव 

चंदा कोचर पर लगे आरोपों का आईसीआईसीआई बैंक ने बचाव किया था। 28 मार्च को बैंक ने कहा था कि वीडियोकॉन ग्रुप को लोन देने का फैसला क्रेडिट पैनल ने लिया था। चंदा कोचर उस पैनल की हिस्सा थीं, न कि हेड। बैंक मैनेजमेंट का कहना है कि चंदा कोचर ने जो कुछ भी किया, नियमों में रहकर ही किया है। वीडियोकॉन को फेवर करने के मामले में बैंक का कहना है कि आरोप बेबुनियाद हैं, जिसका उद्देश्‍य बैंक को बदनाम करना है। 

 

क्रेडिट पैनल की हेड नहीं थीं कोचर 
आईसीआईसीआई बैंक के चेयरमैन एमके शर्मा ने कहा था कि बोर्ड लोन के इंटरनल प्रॉसेस का रिव्यू कर चुकी है। लोन सीधे वीडियोकॉन ग्रुप को डिस्बर्स नहीं किया गया था, बल्कि यह एक एस्क्रो पूल अकाउंट में भेजा गया था। वीडियोकॉन ग्रुप को सैंक्शन होने वाले शेयर 10 फीसदी से भी कम हैं। उनका कहना है कि चंदा कोचर वीडियोकॉन को कर्ज दिए जाने के मामले में सिर्फ इवैल्युएटिंग के लिए क्रेडिट पैनल में थीं। वह क्रेडिट पैनल की हेड नहीं थीं। 

 

 

आगे पढ़ें... कैसे मिला था वीडियोकॉन ग्रुप को लोन

 

 

20 बैंकों के कंसोर्टियम ने दिया लोन 
आईसीआईसीआई बैंक के अनुसार 2012 में 20 बैंकों के कंसोर्टियम ने नियमों के मुताबिक विडियोकॉन ग्रुप को 40 हजार करोड़ रुपए का लोन देने का फैसला किया था। जिसमें से ICICI बैंक ने भी 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया। बैंक ने यह लोन उसी तरह की नियम और शर्तों पर दिया है जिस तरह के नियम शर्तों पर समूह के दूसरे बैंकों ने दिया है, ऐसे में वीडियोकॉन ग्रुप को विशेष लाभ दिए जाने की संभावना ही नहीं उठती।

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