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माल्‍या के खिलाफ ED फाइल करेगा नई चार्जशीट, मनी लॉन्ड्रिंग और बैंकों से धोखाधड़ी का मामला

ईडी माल्‍या के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी बैंकों से 6,027 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में यह चार्जशीट फाइल करेगा

Mallya faces fresh money laundering charge sheet and fugitive tag
 
नई दिल्‍ली. शराब कारोबारी और भारतीय बैंकों के डिफॉल्‍टर विजय माल्‍या की मुसीबत आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) माल्‍या और उसकी कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी बैंकों से 6,027 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी के मामले में जल्‍द ही नई चार्जशीट फाइल करने वाला है। 

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस चार्जशीट के साथ केंद्रीय जांच एजेंसी हाल में पारित हुए भगोड़े आर्थिक अपराधी अध्यादेश के तहत माल्‍या और उसकी कंपनियों की 9000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की संपत्तियों को तत्‍काल जब्‍त करने का आदेश कोर्ट से मांगेगी। पिछले साल ईडी ने माल्‍या के खिलाफ अपनी पहली चार्जशीट करीब 900 करोड़ रुपए के आईडीबीआई बैंक-किंगफिशर एयरलाइंस के बैंक लोन फ्राड मामले में दाखिल की थी। जांच एजेंसी इस मामले में अभी तक 9890 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर चुकी है। 
 
 
SBI की शिकायत पर अगली चार्जशीट 
सूत्रों के अनुसार, ईडी की तरफ से दाखिल होने वाली अगली चार्जशीट एसबीआई की ओर से मिली शिकायत के इर्दगिर्द होगी। एसबीआई ने बैंकों के कंसोर्टियम की तरफ से शिकायत में कहा था कि माल्‍या की कंपनियों ने उनका 6,027 करोड़ रुपए का लोन नहीं चुकाया। यह लोन 2005-10 के दौरान दिए गए थे। ईडी ने इस मामले में सीबीआई की तरफ से दर्ज एफआईआर को ध्‍यान में रखते हुए अपनी जांच की है। जांच एजेंसी अपनी चार्जशीटी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट (पीएमएलए) के तहत मुंबई की एक स्‍पेशल कोर्ट में फाइल करेगी। 
 
 
किंगफिशर नहीं कर पाई लोन रिपेमेंट 
दरअसल, एसबीआई और उसके कंसोर्टियम बैंकों ने 2005 और 2010 के बीच किंगफिशर एयरलाइंस को एडवांस क्रेडिट सुविधा उपलब्‍ध कराई। सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, 2009-10 के दौरान कंपनी लोन रिपेमेंट करने में विफल रही और एयरलाइंस कंसोर्टियम बैंकों के साथ अपने रेगुलेटर अकाउंट भी नहीं रखे हुई थी, जिसके चलते यह यह रकम एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) हो गई। इसके बाद कंसोर्टियम बैंकों ने क्रेडिट फैसेलिटी वापस ले ली और यूबीएचएल (यूनाइटेड ब्रेवरीज होल्डिंग्‍स लिमिटेड) की कॉरपोरेट गारंटी और माल्‍या की पर्सनल गारंटी भी हटा ली। सीबीआई की एफआईआर में आरोप है कि यह बैंकों से धोखाधड़ी करने के लिए ग्रुप कंपनी के प्रमोटर्स और अज्ञात लोगों का षडयंत्र था। 
 
 
फंड की हेराफेरी में शेल कंपनियों का इस्‍तेमाल 
ईडी के अधिकारी के अनुसार, जांच में यह पाया गया कि फंड की हेराफेरी करने में शेल या डमी कंपनियों का इस्‍तेमाल किया गया। जांच एजेंसी की अगली चार्जशीट में इसकी जानकारी सामने आने की उम्‍मीद है। ईडी को केंद्र सरकार की ओर से नया भगोड़ा अध्‍यादेश लाए जाने से अधिक पावर मिली है। जिसके तहत वह माल्‍या को चार्जशीट के आधार पर एक भगोड़े के श्रेणी में करने की आधिकारिक घोषणा का रास्‍ता तलाशेगी। 

 
ब्रिटिश कोर्ट से लगा है झटका 
ब्रिटेन की एक अदालत ने हाल ही में विजय माल्या को इंडियन बैंकों के पैसे वापस लौटाने के आदेश दिए है। जो कि 2 लाख पाउंड यानी करीब 1.80 करोड़ रुपए है। ब्रिटेन कोर्ट के जज एंड्रयू हेनशॉ ने पिछले महीने माल्या की प्रॉपर्टी को कुर्क करने के एक विश्वव्यापी आदेश को पलटने से इनकार कर दिया था। उन्होंने भारतीय बैंकों के समूह का माल्या से करीब 1.145 अरब पौंड की वसूली को सही ठहराया था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि विजय माल्या उसके खिलाफ लड़ाई लड़ रहे बैंकों को पैसा लौटाएं। किसी एक रकम पर दोनों पक्ष सहमत हों। या फिर कोर्ट बैंकों की ओर से कानूनी प्रोसेस में खर्च की गए पैसों का आंकलन करे। अगर कोर्ट पैसों का आकलन करता है तो उसकी अपनी एक अलग प्रोसेस है, जो कि अदालती सुनवाई के साथ पूरी होगी। लेकिन इस बीच भी माल्या को कानूनी खर्च के तौर पर करीब 2 लाख पाउंड का भुगतान तो करना ही होगा।
 
 
माल्या के खिलाफ 13 बैंक लड़ रहे कानूनी लड़ाई
माल्या के खिलाफ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ोदा, IDBI बैंक, कॉर्पोरेशन बैंक, फेडरल बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और जेएम फिनांशल एसेट रिकंस्ट्रक्शन शामिल हैं।
 
 
माल्या पर है 9 हजार करोड़ का कर्ज
भारत से भागे माल्या पर भारतीय बैंकों का करीब 9 हजार करोड़ का कर्जा है। इसके अलावा माल्या भारत प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ भी केस लड़ रहा है। बीते साल प्रत्यर्पण के वारंट पर माल्या की गिरफ्तारी हुई थी। जिसके बाद से वो बेल पर है। विजय माल्या ने साल 2005 में किंगफिशर एयरलाइंस की शुरुआत की थी। जिसके बाद माल्या ने साल 2007 में देश की पहली लो कॉस्ट एविशन कंपनी एयर डेक्कन को टेकओवर कर लिया। और यही उनकी सबसे बड़ी गलती थी। इसके लिए माल्या ने 1200 करोड़ खर्च किए। लेकिन इस डील में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।
 
 
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