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बैंकों में हैं दो से ज्यादा सेविंग अकाउंट, तो उठाने पड़ सकते हैं 5 नुकसान

नौकरी बदलना, एक शहर से दूसरे शहर जाकर बसना, कारोबारी जरूरतें आदि के चलते हो जाते हैं मल्‍टीपल अकाउंट...

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नई दिल्‍ली. ऐसे कई लोग हैं, जिनके 2 या इससे ज्‍यादा सेविंग अकाउंट रहते हैं। बार-बार नौकरी बदलना, रोजगार के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाकर बसना, कारोबारी जरूरतें आदि चीजें इसकी प्रमुख वजह होती हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो बिना किसी जरूरत के 2 से ज्‍यादा सेविंग अकाउंट रखते हैं। वे ज्‍यादा सेविंग अकांउट रखना फायदेमंद मानते हैं। इन फायदों में ATMसे ज्‍यादा ट्रांजेक्‍शन करना, एक बैंक में कम तो दूसरे में ज्‍यादा ब्‍याज रहने का फायदा, मल्‍टीपल चेकबुक, क्रेडिट कार्ड आदि को मुख्‍य माना जाता है। लेकिन मल्‍टीपल सेविंग्‍स अकाउंट होने के फायदों के साथ नुकसान भी होते हैं। आइए आपको बताते हैं क्‍या हैं मल्‍टीपल सेविंग अकाउंट के नुकसान-  

 

इनकम टैक्‍स फाइलिंग में परेशानी

मल्‍टीपल बैंक अकाउंट इनकम टैक्‍स फाइलिंग में भी परेशानी का सबब बन जाते हैं। इसकी वजह है कि आपको फाइलिंग में हर अकाउंट का ब्‍यौरा देना होता है। ऐसे में मल्‍टीपल सेविंग अकाउंट से कागजी कार्रवाई में ज्‍यादा माथापच्‍ची होती है और सभी बैंक अकांउट से जुड़ी जानकारी जैसे बैंक स्‍टेटमेंट जुटाना भी टेंशन पैदा कर देता है। इसके अलावा अगर गलती से किसी अकाउंट की डिटेल देना छूट गया और इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने इसे टैक्‍स चोरी समझ लिया तो पेनल्‍टी या टैक्‍स नोटिस का सामना भी करना पड़ सकता है।  

 

हर अकाउंट में मिनिमम बैलेंस मेंटेन करना

अधिकतर सेविंग्‍स अकाउंट में बैंकों की ओर से न्यूनतम बैलेंस रखने का प्रावधान है। ऐसे में अगर आपके 2 या इससे ज्‍यादा सेविंग्‍स अकाउंट हैं तो आपको जगह यानी शहर, गांव और कस्‍बा देखते हुए सभी सेविंग्‍स अकाउंट में तय मिनिमम बैलेंस मेंटेन करना होगा। ऐसे में जो अकाउंट आप इस्‍तेमाल नहीं कर रहे हैं, उनमें भी एक निश्चित धनराशि को जमा रखना होगा और यह धनराशि उस अकाउंट में फंसी रहेगी और ब्‍याज भी 4 से 6 फीसदी के बीच ही मिलेगा। अगर कम अकांउट होंगे तो जो पैसे आप मिनिमम बैलेंस मेंटेन करने में लगा रहे हैं, उन्‍हें कहीं और इन्‍वेस्‍ट करके ज्‍यादा रिटर्न हासिल किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर एफडी, शेयर मार्केट, म्‍युचुअल फंड आदि। 

 

नहीं रख पाए मिनिमम बैलेंस तो पेनल्‍टी

अगर आप सभी सेविंग्‍स अकाउंट में मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं कर पाते हैं तो आपको बैंक के नियमों के मुताबिक तय पेनल्‍टी भरनी होगी। ज्‍यादा वक्‍त तक अमाउंट डिपॉजिट नहीं किया तो पेनल्‍टी बढ़ती जाएगी और एक मोटा अमांउट बन जाएगा।

 

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मेंटिनेंस फीस और सर्विस चार्ज

बैंक अकाउंट पर एक सालाना मेंटीनेंस फीस और सर्विस चार्ज भी लगता है। ऐसे में अगर आपके मल्‍टीपल बैंक अकाउंट हैं तो हर अकाउंट पर चार्ज और फीस देनी होगी। इसके अलावा क्रेडिट-डेबिट चार्ज के लिए भी फीस देनी होगी, जो खर्च बढ़ा देगी। इसके अलावा अगर सभी अकाउंट्स के लिए डेबिट कार्ड है तो आपको उनका सालाना चार्ज देने के साथ एक और टेंशन रहती है। वह है हर कार्ड का पासवर्ड याद रखना। 

 

आगे पढ़ें- आखिरी प्‍वॉइंट 

 

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ट्रांजेक्‍शन न होने पर अकाउंट डारेमेंट हो जाना

भले ही आपने अपने बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस मेंटेन किया हुआ हो लेकिन अगर उससे एक लंबे वक्‍त से ट्रांजेक्‍शन नहीं हुआ है तो अकाउंट डोरमेंट हो जाता है। फिर जब आप डोरमेंट अकांउट को दोबारा एक्टिव कराते हैं तो उसकी एक पूरी प्रोसेस को फॉलो करना होता है। 

 

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