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बैंकों को मिल जाता है चार्ज वसूलने का मौका, आपकी 6 गलतियां बनती हैं वजह

थोड़ी सी सावधानी बरतें तो इन एक्‍स्‍ट्रा चार्ज से बचा जा सकता है...

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नई दिल्‍ली. बैंक हमें दी जाने वाली सर्विसेज के एवज में कुछ चार्ज वसूलते हैं लेकिन कई बार बिना किसी सर्विस के भी बैंकों को चार्ज लेने का मौका मिल जाता है। यह मौका उन्‍हें हमारी लापरवाही के चलते हुई गलतियों से मिलता है। टेक्‍नोलॉजी के इस दौर में नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, ATM ट्रांजेक्‍शन आदि का विस्‍तार हो रहा है। ऐसे में कई बार हम बैंकिंग या ट्रांजेक्‍शन करते वक्‍त बैलेंस, ट्रांजेक्‍शंस लिमिट जैसी कई चीजों को लेकर अलर्ट न रहने की चूक कर बैठते हैं और यह हमारी जेब पर ही भारी पड़ता है। आइए आपको बताते हैं ऐसी 6 छोटी-छोटी गलतियों के बारे में, जो बैंकों को चार्ज वसूलने का मौका दे देती हैं और कैसे थोड़ी सी सावधानी बरतने से एक्‍स्‍ट्रा चार्ज से बचा जा सकता है- 

 

ATM से लिमिट से ज्‍यादा ट्रांजेक्‍शंस 

बैंकों ने ATM से किए जाने वाले कैश ट्रांजेक्‍शंस की संख्‍या तय की हुई है, जो आपके अकाउंट की मौजूदगी वाले बैंक के ATM और अन्‍य बैंक ATM के लिए अलग-अलग है। ट्रांजेक्‍शंस इस लिमिट के ऊपर जाने पर बैंक चार्ज लेते हैं। अगर आप अपने ATM ट्रांजेक्‍शंस की संख्‍या का ध्‍यान रखें तो आप इस एक्‍स्‍ट्रा चार्ज से बच सकते हैं। इसके लिए या तो आप केवल एक कार्ड के बजाय इससे ज्‍यादा कार्ड्स से ट्रांजेक्‍शन करें या फिर थोड़ा-थोड़ा अमाउंट निकालने के बजाय ज्‍यादा अमाउंट निकालें। 

 

चेक का बहुत ज्‍यादा इस्‍तेमाल

ज्‍यादातर बैंक कस्‍टमर द्वारा मिनिमम एवरेज बैलेंस मेंटेन रखे जाने पर क्‍वार्टरली या ईयरली 25-30 चेक वाली एक चेकबुक फ्री ऑफ कॉस्‍ट इश्‍यू करते हैं। लेकिन इसके बाद नई चेक बुक लेने के लिए पेमेंट करना होता है। इसलिए बेहतर रहेगा कि आप चेक का इस्‍तेमाल करने के साथ-साथ नेट बैंकिंग, कार्ड टू कार्ड ट्रांजेक्‍शन आदि का भी इस्‍तेमाल करें। 

 

अकाउंट में मिनिमम बैलेंस मेंटेन न करना

ज्‍यादातर बैंकों ने सेविंग्‍स अकाउंट के लिए मिनिमम बैलेंस अनिवार्य किया हुआ है। ऐसे में अगर आपको बैलेंस निर्धारित मिनिमम बैलेंस से नीचे गया तो बैंक चार्ज काट लेते हैं। हालांकि मिनिमम बैलेंस ग्रामीण व शहरी इलाकों के हिसाब से अलग-अलग होता है। अगर आप इस चार्ज से बचना चाहते हैं तो अकांउट से पैसे निकालते वक्‍त यह जरूर ध्‍यान रखें कि अकाउंट में मिनिमम बैलेंस बना रहे। अगर किसी मजबूरी के चलते बैलेंस नीचे चला गया है तो कोशिश करें कि इसे जल्‍द से जल्‍द निर्धारित लिमिट पर पहुंचाया जा सके। 

 

आगे पढ़ें- बाकी की चूक

 

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डोरमेंट या अनयूज्‍ड अकाउंट को क्‍लोज न करना

अक्‍सर लोग रहने की जगह या नौकरी बदलने के बाद पुराने अकाउंट को चालू रखते हैं। कई बार लोग उसमें मौजूद अमाउंट को विदड्रॉ तो करते हैं लेकिन उसमें डिपॉजिट नहीं करते हैं। ऐसे में कई बार बैलेंस मिनिमम बैलेंस से कम हो जाता है और चार्ज लग जाता है। अगर आपको अपने पुराने अकाउंट की जरूरत है और आप एक्‍स्‍ट्रा चार्ज से बचना चाहते हैं तो आपको उस अकाउंट में मिनिमम बैलेंस बनाए रखना होगा। लेकिन अगर आपको उस अकाउंट की जरूरत नहीं है तो बेहतर होगा कि आप उसे बंद कर दें।

 

आगे पढ़ें- डेबिट कार्ड पासवर्ड भूलना 

 

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डेबिट कार्ड पासवर्ड भूल जाना

अगर आप अपने डेबिट कार्ड का पिन भूल चुके हैं और नया पिन चाहते हैं तो आपको पेमेंट के लिए तैयार रहना होगा। कई बैंक ऐसे हैं जो नया पिन जनरेट करने के लिए चार्ज वसूलते हैं। उदाहरण के लिए SBI में होम ब्रांच से पिन के रिजनरेशन या डुप्‍लीकेट पिन लेने पर चार्ज 50 रुपए प्‍लस GST है। कई दूसरे बैंकों में भी इसी तरह का नियम है। इसलिए कोशिश करें कि आप अपना डेबिट कार्ड पिन या पासवर्ड न भूलें। 

 

 

ATM से विदड्रॉ करने के लिए गलती से बैलेंस से ज्‍यादा अमाउंट डालना 

कई बार ऐसा होता है कि ATM से पैसे निकालते वक्‍त हम जितना अमाउंट डालते हैं, उतना अमाउंट हमारे अकाउंट में मौजूद नहीं होता। ऐसे में ट्रांजेक्‍शन डिक्‍लाइन हो जाता है। कई बैंक ऐसे हैं, जिनमें इस डिक्‍लाइनिंग पर भी चार्ज लगता है। उदाहरण के तौर पर SBI में अपर्याप्‍त बैलेंस की वजह से ट्रांजेक्‍शन डिक्‍लाइन होने पर चार्ज 20 रुपए प्‍लस GST है। इसलिए अगर आप इस चार्ज से बचना चाहते हैं तो अपने अकाउंट बैलेंस को चेक करते रहें और ATM में सावधानी से अमाउंट भरें। 

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