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कई राज्‍यों में अभी भी कैश की किल्‍लत, सरकार का दावा- 80% ATM में है करंसी

नई दिल्‍ली. देश के कई राज्‍यों में भी गुरुवार को कई एटीएम खाली रहे। लोगों को कैश के लिए दिक्‍कत झेलनी पड़ रही है। वहीं, सरकार का दावा है कि हालात तेजी से सुधर रहे हैं। 80 फीसदी एटीएम से ट्रांजैक्‍शन सामान्‍य हो गया है। कुछ राज्‍यों में होने वाले विधान सभा चुनाव से पहले अचानक बढ़ी कैश की डिमांड ने सरकार को परेशान कर दिया। हालांकि, खुद वित्‍त मंत्री ने कहा कि सर्कुलेशन में करंसी पर्याप्‍त है और अगले कुछ दिन में हालात सामान्‍य हो जाएंगे। आरबीआई ने भी कहा है कि कैश की दिक्‍कत नहीं है। लॉजिस्टिक इश्‍यू के चलते कुछ इलाकों के एटीएम में करंसी की कमी है।

 

 

कहां है कैश की दिक्‍कत? 
न्‍यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, उत्‍तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्‍ट्र और चुनावी राज्‍य कर्नाटक के शहरों में एटीएम काम नहीं कर रहे हैं और कई एटीएम में अभी भी पैसे नहीं है। वहां 'नो कैश' का बोर्ड लगा है। कैश की किल्‍लत ने नोटबंदी की याद ताजा कर दी है। राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली के कुछ एटीएम में भी कैश नहीं होने की सूचना है। 

 

क्‍या है सरकार का दावा? 
कैश की किल्‍लत पर जनता परेशान है, लेकिन सरकार ने दावा किया है कि स्थिति तेजी से सुधर रही है। गुरुवार को देश में लगे कुल 2.2 लाख एटीएम में से 80 फीसदी में सामान्‍य ट्रांजैक्‍शन हो रहा है। बुधवार को यह संख्‍या 60 फीसदी थी। वित्‍त राज्‍य मंत्री शिव प्रताप शुक्‍ला ने कहा, देश के 80 फीसदी से ज्‍यादा एटीएम में कैश है। कुछ लोग अपनी छवि बनाने के लिए देश को गुमराह करते हैं। यह उनकी आदत होती है। मेरा उनसे अनुरोध है कि ऐसा न करें। एटीएम के आउट ऑफ कैश के पीछे अधिकारी फसल खरीद और चुनाव के लिए होने वाले पेमेंट कचलते अचानक बढ़ी डिमांड को वजह बता रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि बैंक एटीएम में कैश डाल रहे हैं। इसके अलावा, नोट छापने वाले चारों प्रिंटिंग प्रेस छोटी वैल्‍यू की करंसी छापने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। 

 

वित्‍त मंत्रालय ने क्‍या उठाया कदम? 
वित्‍त मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने गुरुवार को सरकारी बैंकों के साथ वीडियो कॉन्‍फ्रेंस की। इसमें उनसे कहा गया कि वह एटीएम में 500 रुपए के नोट डाले। सरकारी बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि एक दिन के भीतर 80 फीसदी एटीएम से कैश निकलने लगे। साथ ही बैंक सभी ब्रांचों में कैश की सप्‍लाई बढ़ा दें। 

 

क्‍या है बैंकों का पक्ष? 
स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का कहना है कि बीते 24 घंटे के दौरान एटीएम में कैश की उपलब्‍धता बढ़ा दी गई है। गुरुवार से उसके करीब 92 फीसदी एटीएम काम कर रहे हैं। बुधवार को यह आंकड़ा करीब 85 फीसदी था। हफ्ते के आखिर तक स्थिति सामान्‍य हो जाएगी। दूसरी ओर, केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक का दावा है कि एटीएम में कैश की कमी कुछ जगहों पर ही है। 
पंजाब नेशनल बैंक का कहना है कि उसके एटीएम में कैश की कोई कमी नहीं है। उसके एटीएम सामान्‍य तौर पर काम कर रहे हैं। पीएनबी के 9679 एटीएम में से 90 फीसदी कैश की उपलब्‍धता सामान्‍य है। 

 

कैश की कमी के पीछे क्‍या-क्‍या चल रही है थ्‍योरी?  
1. एटीएम से कैश की कमी को लेकर कई तरह आरोप लगाया जा रहे हैं। इनमें एक है 2000 रुपए के नोटों की कमी और 200 रुपए के लिए एटीएम का कैलीब्रेट न होना। 
2. कर्नाटक चुनाव है इसे देखते हुए कैश में ज्‍यादा पेमेंट हो रहे हैं, जिसके चलते कैश की कमी है। 
3. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सरकारी प्रोग्राम जिनका पेमेंट कैश में किया जा रहा है। इसके चलते कैश की किल्‍लत हुई। 
4. फेस्टिव सीजन और फाइनेंशियल रिजॉल्‍यूशन एंड डिपॉजिट इन्‍श्‍योरेंस बिल के बेल-इन क्‍लॉज की गलत समझ। इस क्‍लॉज में है कि बैंक डूबने पर एक छोटा हिस्‍सा ही कस्‍टमर को मिलेगा। 

 

moneybhaskar को एक सीनियर बैंक अधिकारी ने क्‍या बताई वजह? 

 कैश की किल्‍लत की वजह जानने के लिए moneybhaskar.com ने सरकारी बैंक के एक सीनियर अधिकारी से बातचीत की । उन्‍होंने एटीएम में कैश की किल्‍लत के लिए 4 कारण बताए हैं। जिनकी वजह से एटीएम में कैश नहीं मिल पा रहा है। 

 

#1. फसल का सीजन 

उन्‍होंने बताया कि इस समय फसल का सीजन है। किसान ने फसलों की कटाई और इससे जुड़े काम के लिए कैश निकाल रहे हैं। इसकी वजह से कैश की मांग बढ़ गई है। अभी किसान बैंक से पैसा निकाल रहे हैं जमा नहीं कर रहे हैं। 

#2. नहीं आ रहे हैं 2000 के नए नोट 
पिछले एक साल से 2,000 के नए नोट नहीं आ रहे हैं। पहले 2,000 रुपए के नोट एटीएम में रहते थे। इससे लोगों की कैश की जरूरतें काफी हद तक पूरी हो जाती थीं। अब ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा लोग 2,000 रुपए के पुराने नोट होल्‍ड कर रहे हैं। बता दें, कि अगर 2000 के नोटों से एटीएम को भरा जाए तो 60 लाख रुपए तक आ जाते हैं। वहीं,  500 और 100 के नोट एटीएम में डाले जाने पर यह क्षमता महज 15 से 20 लाख रुपए रह गई है। 

#3. 200 के नए नोट के लिए ATM नहीं हुए कैलीब्रेट 
अधिकारी के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने 200 रुपए के नए नोट की सप्‍लाई बड़े पैमाने की है। लेकिन बैंकों ने 200 रुपए के नोट के लिए एटीएम को अभी कैलीब्रेट नहीं किया है। इसलिए बड़ी संख्‍या में ऐसे एटीएम हैं जिनमें 200 रुपए का नोट नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, अभी तक महज 30 फीसदी एटीएम ही 200 रुपए को लेकर कैलीब्रेट हो सके हैं। 

#4. इलेक्‍शन की वजह से भी डायवर्ट हो रहा है कैश 
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव है। इसके लिए भी कैश डायवर्ट होकर कनार्टक में जा रहा है। 

 

सिस्‍टम में 70 हजार करोड़ कैश की कमी: SBI रिसर्च 
भारतीय स्‍टेट बैंक (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार सिस्‍टम में करीब 70 हजार करोड़ रुपए की नकदी की कमी है। यह कमी नगदी की उपलब्‍धता और डिजिटल ट्रांजैक्‍शन के मिसमैच का नतीजा है। रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक प्रगति के अनुरूप नगदी की कमी और डिजिटल ट्रांजैक्‍शन बढ़ने की वजह से नगदी को लेकर गलत अनुमान इस कमी के कारण हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2018 में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 9.8 फीसदी रही है, जिसके अनुसार मार्च में सिस्‍टम में 19.4 लाख करोड़ रुपए होना चाहिए। जबकि वास्‍तव में सिस्‍टम में नगदी का स्‍तर 17.5 लाख करोड़ रुपए का था। इस प्रकार सिस्‍टम में 1.9 लाख करोड़ रुपए की नगदी का मिसमैच था। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान डिजिटल ट्रांजैक्‍शन की संख्‍या में कमी दर्ज की गई है। इस दौरान 1.2 लाख करोड़ रुपए के ही डिजिटल ट्रांजैक्‍शन ही हुए। यह संख्‍या नोटबैन के बाद के महीनों से भी कम थी। नगदी और डिजिटल ट्रांजैक्‍शन की बीच का यह फासला करीब 70 हजार करोड़ रुपए का रहा, जिसके चलते नगदी का संकट पैदा हुआ।
 

नोटबंदी के बाद 99% करंसी चलन में लौटी

नोटबंदी के बाद एक बार फिर से कैश की आपूर्ति पहले जैसी हो गई थी और फिर डिजिटाइजेशन के चलते इसकी जरूरत भी कम हो गई थी। लेकिन, अब करंसी की कमी होना चिंता बढ़ाने वाला है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 6 अप्रैल को 18.2 लाख करोड़ रुपए की करंसी सर्कुलेशन में थी, यह आंकड़ा नोटबंदी से पहले सर्कुलेशन में रही करंसी के लगभग बराबर था। नोटबंदी के बाद करीब 5 लाख करोड़ रुपए के 2000 के नोट जारी किए गए थे।

 

साल सर्कुलेशन में करंसी
7 नवंबर 2016 17.97 लाख करोड़ रुपए
6 जनवरी 2017 8.98 लाख करोड़ रुपए
16 फरवरी 2018 17.78 लाख करोड़ रुपए
6 अप्रैल 2018 18.2 लाख करोड़ रुपए
 

 

 

आगे पढ़ें... कैश की किल्‍लत पर क्‍या बोले राहुल गांधी

 

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