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बैंक में FD करवाते वक्‍त इन बातों का रखें ध्‍यान, नहीं होगा नुकसान

बेहतर रहेगा कि FD खुलवाने से पहले सभी जानकारियों और टर्म्‍स एंड कंडीशंस के बारे में पता कर लिया जाए।

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नई दिल्‍ली. अगर आप इन्‍वेस्‍टमेंट विकल्‍प के तौर पर बैंक में फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट (FD) करवाना चाहते हैं तो कुछ बातों पर गौर करना जरूरी है। कुछ छोटी-छोटी चीजों की अनदेखी से नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। जैसे FD की मैच्‍योरिटी की अवधि में एक दिन का हेर-फेर आपको ज्‍यादा ब्‍याज का फायदा और नुकसान दोनों करा सकता है। इसलिए बेहतर रहेगा कि FD खुलवाने से पहले सभी जानकारियों और टर्म्‍स एंड कंडीशंस के बारे में पता कर लिया जाए। आज हम आपको कुछ ऐसी ही बातों के बारे में बता रहे हैं, जो आपको सरल, सुरक्षित और फायदेमंद एफडी करवाने में मददगार साबित हो सकती हैं- 

 

1 दिन का हेर-फेर ऐसे महत्‍वपूर्ण

कई लोग FD राउंड फिगर कहलाने वाली अवधि जैसे 6 माह, 1 साल, 2 साल आदि के हिसाब से कराते हैं। कुछ बैंकों में इस अवधि में 1 या उससे ज्‍यादा दिन या कम दिनों, के लिए एफडी पर ब्‍याज दर अलग-अलग होती है। इसलिए एफडी खुलवाने से पहले एफडी अवधि और उस पर ब्‍याज का पता जरूर कर लें। हो सकता है कि राउंड फिगर अवधि के बजाया थोड़े दिन कम या ज्‍यादा पर आपको कुछ एक्‍स्‍ट्रा ब्‍याज मिल जाए। 

 

जिस ब्‍याज पर खुलवाई अवधि पूरी होने तक मिलेगा वही ब्‍याज

भले ही आरबीआई ब्‍याज दरों में बदलाव करे लेकिन आपको एफडी की अवधि पूरी होने तक वही ब्‍याज मिलेगा, जो एफडी खुलवाते वक्‍त था। ब्‍याज दर में बदलाव नई खोले जाने वाली एफडी या फिर टेन्‍योर पूरा होने के बाद एफडी रिन्‍यूअल पर ही लागू होता है। इसलिए मौजूदा एफडी धारक को इससे किसी भी तरह का फायदा या नुकसान नहीं होता। 

 

मैच्‍योरिटी से पहले निकालने पर देना होता है चार्ज

कई बैंक मैच्‍योरिटी पीरियड से पहले निकाल ली जाने वाली एफडी की भी सुविधा देते हैं। यानी आप इन्‍हें जरूरत के वक्‍त तोड़ सकते हैं लेकिन ऐसा करने पर बैंक आपसे प्री-मैच्‍योरिटी चार्ज भी वसूलते हैं।  

 

जरूरत पर FD तोड़ने से अच्‍छा इस पर लोन ले लें

अगर आपको पैसों की जरूरत आन पड़ी है और आप एफडी तुड़वाने की सोच रहे हैं तो ठहर जाएं। कई बैंकों में एफडी के ऊपर लोन लेने की भी सुविधा है। उदाहरण के लिए एसबीआई आपको एफडी पर एफडी अमाउंट के 90 फीसदी तक का लोन उपलब्‍ध कराता है। यह 25000 रुपए से 5 करोड़ रुपए तक है। 


आगे पढ़ें- अन्‍य फैक्‍ट्स 

ले सकते हैं मंथली, क्‍वार्टरली या सालाना ब्‍याज

अब आपको ब्‍याज पाने के लिए साल खत्‍म होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। बैंक अब मंथली, क्‍वार्टरली और सालाना ब्‍याज पाने की सुविधा देते हैं। यानी यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसमें से कौन सा विकल्‍प चुनते हैं। 

 

आगे पढ़ें- नॉमिनेशन कितना जरूरी 

नॉमिनेशन

अगर आप एफडी खुलवा रहे हैं तो बेहतर होगा कि सेविंग्‍स अकाउंट या अन्‍य स्‍कीमों की तरह इसमें भी किसी अन्‍य इन्‍सान को नॉमिनी भी बनाएं, ताकि अगर आपको कुछ हो भी जाता है तो आपका इन्‍वेस्‍ट किया हुआ पैसा व्‍यर्थ नहीं जाएगा। 

 

आगे पढ़ें- ज्‍यादा ब्‍याज पर टैक्‍स

ब्‍याज पर TDS

अगर एफडी से एक साल में ब्याज की रकम 10 हजार रुपए से ज्यादा है तो बैंक 10 फीसदी टैक्‍स (टीडीएस) काटते हैं। इसे साल के अंत में काटा जाता है। अगर आपने किसी बैंक में 1 से ज्‍यादा एफडी खुलवा रखी हैं तो ब्‍याज की गणना दोनों एफडी के ब्‍याज को मिलाकर होगी। हालांकि आप इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करके काटे गए टैक्‍स क्‍लेम कर सकते हैं। बैंक आपका टीडीएस न काटें, इसके लिए आप फॉर्म 15G /15H भरकर जमा कर सकते हैं। यह सेल्‍फ डिक्‍लेरेशन फॉर्म होता है, जिसमें आपके टैक्‍सेबल लिमिट में न आने का डिक्‍लेरेशन होता है। इसके अलावा कुछ बैंक टैक्‍स सेविंग एफडी, स्‍पेशल एफडी की भी सुविधा देते हैं। 

आगे पढ़ें- बड़ी के बजाय छोटी-छोटी एफडी बेहतर

1 ही के बजाय छोटी-छोटी ज्‍यादा FD हैं बेहतर 

बैंक में डिपॉजिट पर भी आपको 1 लाख रुपए तक का प्रोटेक्‍शन कवर मिलता है। इसे आरबीआई की सब्सिडियरी डिपॉजिट इंश्योरेंस ऐंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (डीआईसीजीसी) बैंक के डूबने की सूरत में देती है और यह नियम बैंकों की हर ब्रांच के लिए लागू है। इसलिए अच्‍छा होगा अगर आप बड़ी रकम को एक एफडी में न रखकर अलग-अलग बैंकों में इन्वेस्ट करें। इसके फायदे ये हैं कि अगर इमरजेंसी में रकम की जरूरत है तो जरूरत के मुताबिक रकम की एफडी तोड़कर काम चला सकते हैं। दूसरा फायदा यह भी है कि अगर एक जगह कम ब्‍याज है तो दूसरी जगह ज्‍यादा ब्‍याज ले सकते हैं। 

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