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कम हो जाएगा होम लोन का बोझ, कर्ज चुकाने के 5 ऑप्‍शन करें ट्राई

ज्‍यादातर लोगों को लोन चुकाने के केवल एक ही ऑप्‍शन का पता होता है...

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नई दिल्‍ली. खुद का घर की चाह रखने वालों के लिए प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतों के चलते यह सपना पूरा करना असान नहीं है। इसलिए लोगों को होम लोन का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन लोन की उच्‍च ब्‍याज दर के चलते लोग होम लोन लेने से भी कतराते हैं। इसका ताजा उदाहरण है HDFC कंपनी। HDFC ने हाल ही में होम लोन ब्‍याज दरों में  0.05 फीसदी से लेकर 0.2 फीसदी तक की बढ़ोत्‍तरी की है।

 

लोगों के डर की एक वजह यह भी होती है कि अगर इस फिक्‍स्‍ड EMI का इंतजाम न हो सका तो लोन कैसे चुकाया जाएगा। लेकिन यह लोन चुकाने का केवल एक तरीका है। ज्‍यादातर लोगों को लोन चुकाने के केवल एक ही ऑप्‍शन का पता होता है,‍ जिसके तहत लोन के टेन्‍योर तक, फिक्‍स्‍ड EMI और तय इंट्रेस्‍ट चुकाना होता है और लोन लेने के साथ ही रीपेमेंट शुरू हो जाता है। लेकिन इस ट्रेडिशनल तरीके के अलावा भी होम लोन चुकाने के कुछ अन्‍य ऑप्‍शन हैं, जिनके जरिए आपके लिए होम लोन चुकाना आसान हो जाता है। आइए आपको बताते हैं कि क्‍या हैं वे तरीके और कैसे पहुंचाते हैं फायदा- 

 

धीरे-धीरे EMI कम करना

इस ऑप्‍शन में शुरुआती सालों में ज्‍यादा EMI देनी होती है और धीरे-धीरे लोन लेने वाले की इनकम घटने के साथ EMI घटती चली जाती है। यह ऑप्‍शन उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद है, जिनकी इनकम में लोन की अवधि के दौरान ही आगे चलकर कमी आने के आसार हैं, जैसे रिटायर होने वाले लोग। 

 

अकाउंट से लोन की लिंकिंग

कुछ बैंक होम लोन को करंट बैंक अकाउंट से लिंक करने की सुविधा देते हैं। जैसे- SBI मैक्‍सगेन, ICICI बैंक की ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी आदि। इस सुविधा में होम लोन की इंट्रेस्‍ट लाय‍बिलिटी अकाउंट में मौजूद सरप्‍लस फंड के आधार पर कम हो जाती है। यानी आपको कम इंट्रेस्‍ट देना होता है। इस ऑप्‍शन में आप जरूरत पड़ने पर करंट अकाउंट से विदड्रॉ और डिपॉजिट भी कर सकते हैं। 

 

EMI में धीरे-धीरे बढ़ाने का ऑप्‍शन

आप शुरुआती सालों में कम EMI और आगे ज्‍यादा EMI का ऑप्‍शन भी ले सकते हैं। कुछ बैंक इसकी भी सुविधा देते हैं। हालांकि ऐसा तभी करें जब आपको पूरा भरोसा हो कि आगे आने वाले सालों में आपकी इनकम में बढ़ोत्‍तरी ही होगी। 

 

आगे पढ़ें- बाकी के दो ऑप्‍शन 

 

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EMI कुछ सालों बाद चुकाना शुरू करने का ऑप्‍शन  

इसके तहत लोन लेने के बाद एक तय समय तक केवल इंट्रेस्‍ट अदा किया जा सकता है। उसके बाद बाद EMI का पेमेंट शुरू होता है। केवल इंट्रेस्‍ट अदा करने की अवधि 3 साल से लेकर 5 साल हो सकती है। हालांकि यह लोन केवल सैलरीड और वर्किंग प्रोफेशनल्‍स के लिए उपलब्‍ध है। इस तरह के लोन पर बैंक नॉर्मल लोन से 20 फीसदी ज्‍यादा अमाउंट लिया जा सकता है। 

आगे पढ़ें- आखिरी प्‍वॉइंट

 

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अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन प्रॉपर्टी पर पेमेंट

अगर आप अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए लोन लेते हैं तो अमाउंट किश्‍तों में अकाउंट में आता है। ऐसे में आखिरी किश्‍त आने यानी लोन का फुल पेमेंट आने तक केवल इंट्रेस्‍ट चुकाना होता है और फुल पेमेंट के बाद EMI शुरू होती है। लेकिन इससे कस्‍टमर पर बोझ पड़ता है। इसलिए अब कुछ फाइनेंशियल इंस्‍टीट्यूशन में लोन की पहली किश्‍त आने से ही EMI चुका सकने का ऑप्‍शन है। उदाहरण के लिए HDFC। इस ऑप्‍शन के तहत चुकाई गई EMI में से पहले इंट्रेस्‍ट एडजस्‍ट किया जाता है, उसके बाद बचे अमाउंट को प्रिन्सिपल रीपेमेंट में डाला जाता है। 

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