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PSU बैंकों के 1463 अकाउंट में 100 करोड़ या ज्यादा NPA, फाइनेंस मिनिस्ट्री ने जारी किया डाटा

सरकारी बैंकों के 1463 ऐसे अकाउंट की पहचान की गई है, जिनमें 100 करोड़ या 100 करोड़ से ज्यादा बैड लोन हैं।

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नई दिल्ली। सरकारी बैंकों के 1463 ऐसे अकाउंट की पहचान की गई है, जिनमें 100 करोड़ या 100 करोड़ से ज्यादा बैड लोन हैं। ये अकाउंट 21 सरकारी बैंकों में हैं, जिसमें से सबसे ज्यादा अकाउंट स्टेंट बैंक ऑफ इंडिया है। फाइनेंस मिनिस्ट्री द्वारा जारी डाटा में ये बातें सामने आई हैं। डाटा सितंबर 2017 तक का है। 

 

 

SBI के 265 अकाउंट में 77538 करोड़ 
सितंबर के अंत तक सरकारी बैंकों का कुल एनपीए बढ़कर 7.34 लाख करोड़ हो चुका है। कुल 1463 में से 265 अकाउंट एसबीआई के हैं। एसबीआई के इन 265 अकाउंट में 77538 करोड़ रुपए बैड लोन की पहचान हुई है। 

 

PNB सहित इन बैंकों के भी ज्यादा अकाउंट
नेशनलाइज्ड बैंकों में एसबीआई के बाद पंजाब नेशनल बैंक का नंबर है। पंजाब नेशनल बैंक के ऐसे 143 अकाउंट हैं, जिनमें 100 करोड़ या 100 करोड़ से ज्यादा एनपीए है। पीएनबी के इन अकाउंट्स में कुल 45793 करोड़ रुपए बैड लोन के रूप में हैं। पीएनबी के बाद केनरा बैंक के सबसे ज्यादा ऐसे अकाउंट है। यूनियन बैंक के ऐसे 79 बैंक अकाउंट और यूको बैंक के 62 बैंक अकाउंट हैं। 

 

बैंकों के लिए रीकैप प्लान 
बता दें कि सरकारी बैंकों के बढ़ते एनपीए की वजह से उनकी परफॉर्मेंस पर निगेटिव असर हो रहा है। जिसकी वजह से सरकार ने हाल ही में सरकारी बैंकों के लिए रीकैपिटलाइजेशन प्लान को मंजूरी दी थी। इसके तहत बेंकों को 2 साल में 2.11 लाख करोड़ रुपए दिए जाएंगे। बैंक रीकैपिटलाइजेशन के लिए सरकार मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के अंत तक 80 हजार करोड़ के बॉन्ड जारी करेगी। इस एवज में संसद ने अपनी मंजूरी दे दी है। सरकार ने संसद में अतिरिक्त खर्च के लिए सप्लीमेंटरी डिमांड के जरिए मंजूरी मांगी थी। 

 

अच्छे प्रदर्शन वाले बैंकों को पहले सपोर्ट 
पीएसयू बैंक रीकैपिटलाइजेशन प्लान के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों को ही पहले कैपिटल सपोर्ट मिलेगा। पिछले दिनों एक सीनियर ऑफिशियल ने यह जानकारी दी थी कि इस फाइनेंशियल ईयर में सभी बैंकों को सरकार पैसे नहीं देगी। जो बैंक एक तय पैरामीटर पर बेहतर प्रदर्शन वाले होंगे, उन्हीं को पहले सपोर्ट किया जाएगा। बता दें कि हाल ही में सरकार ने सरकारी बैंकों के लिए 2.11 लाख करोड़ के रीकैपिटलाइजेशन प्लान को मंजूरी दी थी। 

 

रोडमैप, रिफार्म्स और प्रदर्शन के आधार पर
ऑफिशियल के अनुसार पहले फेज में सभी बैंकों के लिए रीकैपिटलाइजेशन बॉन्ड लाना जरूरी नहीं होगा। बैंकों को पहले फेज में पैसे दिए जाने के पहले कई पैरामीटर देखे जाएंगे। यह बैंकों के आगे के लिए रोडमैप, रिफार्म्स और प्रदर्शन के आधार पर होगा। 

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