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PNB फ्रॉड: PSU बैंकों में सरकार 50% से कम करे हिस्‍सेदारी अपनी- एसोचैम

पीएनबी फ्रॉड सामने आने के बाद एक बार फिर सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन करने की डिमांड जोर पकड़ने लगी है।

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नई दिल्‍ली. पीएनबी फ्रॉड सामने आने के बाद एक बार फिर सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन करने की डिमांड जोर पकड़ने लगी है। इंडस्‍ट्री बॉडी एसोचैम ने कहा है कि पीएनबी घोटाला सरकार के लिए एक खतरे की घंटी है। सरकार को पीएसयू बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 50 फीसदी से कम कर देनी चाहिए और उन्‍हें प्राइवेट बैंकों की तरह काम करने की अनु‍मति दी जानी चाहिए। इस स्थिति में अपने स्‍टेकहोल्‍डर्स और कस्‍टमर्स की के हितों की रक्षा की पूरी जिम्मेदारी बैंकों की होगी।

 

बता दें, पीएनबी ने बीते बुधवार को खुलासा किया था कि बैंक की मुंबई की एक शाखा में 1,77.169 करोड़ डॉलर (करीब 11,400 करोड़ रुपए) की धोखाधड़ी हुई है। यह राशि बैंक की शुद्ध आय करीब 1,320 करोड़ रुपए के आठ गुना के बराबर है।

 

टैक्‍सपेयर्स के पैसे से राहत देने की भी है सीमा 

एसोचैम की ओर से जारी बयान के अनुसार, सरकारी बैंक एक के बाद एक संकट से गुजर रहे हैं और सरकार की ओर से टैक्‍सपेयर्स के पैसे से इनको राहत पैकेज देने की भी एक सीमा है। सरकारी बैंकों का सीनियर मैनेजमेंट अपना अधिकतर समय नौकरशाहों के निर्देशों का पालन करने में लगा देता है। बयान के अनुसार, इससे वे लोग जोखिमों को कम करने और मैनेजमेंट सहित सभी मुख्य बैंकिंग कामकाज की प्राथमिकता से हट गए हैं। यह समस्या और गंभीर हो गई है क्योंकि बैंक नई टेक्‍नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो वरदान या अभिशाप कुछ भी सिद्ध हो सकते हैं।

 

जवाबदेही तय करना जरूरी 

एसोचैम का कहना है कि सरकारी बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 50 फीसदी से कम होने पर सीनियर मैनेजमेंट को जवाबदेही और जिम्मेदारी के साथ अधिक स्वायतत्ता भी मिल जाएगी। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने जारी बयान में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से पूरे फाइनेंशियल सेक्‍टर में कारोबार में ट्रांसपरेंसी बहाल करने के तरीकों में शामिल होने का आग्रह किया है। चाहे वह निजी बैंक हो या सरकारी बैंक या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) ही क्‍यों न हों। इस संदर्भ में चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यम ने सरकारी क्षेत्र के बैंकों में निजी भागीदारी को और बढ़ाने की वकालत की।

 

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