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ICICI-Videocon Case: दोषी ठहराने पर कोचर का जवाब, कर्ज देने का फैसला एकतरफा नहीं 

ICICI बैंक की जांच समिति ने ठहराया है आचार संहिता उल्लंघन का दोषी

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नई दिल्ली। संकट में फंसी आईसीआईसीआई की पूर्व मुख्य कार्यकारी चंदा कोचर ने बुधवार को कहा कि बैंक में कर्ज देने का कोई भी फैसला एकतरफा नहीं किया गया था। कोचर ने यह प्रतिक्रिया वीडियोकॉन समूह को दिए गए 3,250 करोड़ रुपये के विवादास्पद ऋण मामले में न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण समिति द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद दी। 

 

समिति ने ठहराया था आचार संहिता का दोषी
समिति ने कहा कि इस ऋण को देने में बैंक के आचार संहिता का उल्लंघन किया गया जिसमें हितों का टकराव का आचरण भी शामिल था, क्योंकि इस कर्ज का एक हिस्सा उनके पति दीपक द्वारा चलाई जा रही कंपनी को दिया गया, जिससे उन्हें विभिन्न वित्तीय लाभ प्राप्त हुए। कोचर ने बुधवार शाम को जारी एक बयान में कहा कि मैं फैसले से बुरी तरह निराश, आहत और परेशान हूं। मुझे रिपोर्ट की कॉपी तक नहीं दी गई। मैं फिर दोहराती हूं कि बैंक में कर्ज देने का कोई भी फैसला एकतरफा नहीं किया गया। उन्होंने आगे कहा कि आईसीआईसीआई स्थापित मजबूत प्रक्रियाओं और प्रणालियों वाला संस्थान है, जहां समिति आधारित सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया है तथा इसमें कई उच्च क्षमता वाले पेशेवर भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए संगठन का डिजायन और संरचना हितों के टकराव की संभावना को रोकता है।

बैंक ने कोचर के रिजाइन को टर्मिनेशन करार दिया


उधर स्वतंत्र जांच कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद ICICI Bank ने चंदा कोचर (Chanda Kochar) को बोर्ड से बर्खास्त कर दिया है। आईसीआईसीआई ने कहा है कि पूर्व सीईओ चंदा कोचर ने नियमों का उल्लंघन किया, इसलिए चंदा कोचर को बोनस सहित दूसरे बेनिफिट्स नहीं दिए जाएंगे। बैंक के मुताबिक, इस मामले की जांच कर रही स्वतंत्र जांच कमेटी ने कोचर को दोषी पाया है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट बैंक को सौंप दी है। चंदा कोचर के रिजाइन को उनका टर्मिनेशन माना जाएगा। यानी चंदा कोचर को बर्खास्त कर दिया गया है। 

ये है मामला


दरअसल, 2012 में आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से वीडियोकॉन समूह को मिले 3,250 करोड़ रुपए के लोन के बाद वीडियोकॉन के प्रोमोटर वेणुगोपाल धूत ने कथित रूप से न्यूपावर में करोड़ों रुपए का निवेश किया था। वीडियोकॉन ग्रुप के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत पर आरोप है कि उन्होंने 2010 में 64 करोड़ रुपए न्यूपावर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) को दिए थे। इस कंपनी को धूत ने दीपक कोचर और दो अन्य रिश्तेदारों के साथ मिलकर खड़ा किया था। 

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