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PNB को पीला-गीला कर गई मामा-भांजे की जोड़ी, होली है..........

थोड़ा खि‍लाया, थोड़ा पि‍लाया और पलीता लगाकर उड़ गए।

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नई दि‍ल्‍ली। हमारे आपके कागजों में 200 खामि‍यां खोज देने वाले सरकारी बैंक के साबुओं को मामा-भांजे की एक जोड़ी ने ऐसा पोता कि अब कहीं मुंह दि‍खाने के लायक नहीं रह गए। थोड़ा खि‍लाया, थोड़ा पि‍लाया और पलीता लगाकर उड़ गए। ये जोड़ी होली से पहले ही पीएनबी उर्फ पगलेट नेशनल बैंक को गीला-पीला कर गई। कुछ ऐसी है चतुर धीरव और चोपसी की चालाक कहानी। 


कि‍सी सरकारी बैंक में पैर रखो तो ऐसा लगता है दसवीं की बोर्ड परीक्षा देने आए हैं। एक कागज आगे हुआ तो लाइन में आप पीछे चले जाएंगे, एक कागज पीछे हो गया तो लाइन ही चली जाएगी। बाबू अफसरों से बड़े होते हैं और अफसर पीएम से भी बड़े नजर आते हैं। 1000 रुपए नि‍कालने जाओ तो दस्‍तखत और शक्‍ल का ऐसा मि‍लान करते हैं, जैसे जेम्‍स बॉन्‍ड को ट्रेनिंग देकर अभी लौटे हैं मगर धीरव और चोपसी के कागजों को तो सूंघ कर ही आगे बढ़ा देते थे, क्‍योंकि‍ उसमें से परफ्यूम की महक आती थी। 


कागज आते रहे, पैसे जाते रहे और मामा-भांजा मुस्‍कुराते रहे। दोनों ने हीरों की ऐसी चकम फैलाई कि‍ पगलेट बैंक आंखे ही नहीं खोल पाया। जब चमक हटी तब तक मुन्‍नी बदनाम हो चुकी थी। धीरव और चोकसी बड़े प्‍यार से 11 हजार करोड़ी होली खेल गए, जिसे बैंक ने हीरा समझा था तो खीरा पकड़ा कर भाग गया। 


अब धीरव-चोकसी बाहर हैं, बाबू अंदर हैं और पीएनबी अपना फटा कुर्ता सि‍लने के लि‍ए धागा ढूंढ रहा है। होली से पहले ही बैंक को इतनी बड़ी गोली मि‍ल गई है कि‍ अब कई साल तक ओवर स्‍मार्टनेस का बुखार नहीं चढ़ेगा। रही बात मामा-भांजे कि‍ तो कानून के हाथ जि‍तने भी लंबे हों अभी तक माल्‍या तक भी नहीं पहुंच पाए तो चोकसी तक क्‍या पहुचेंगे।  पहुंच भी गए तो रंग नहीं लगा पाएंगे क्‍योंकि कानून की पिचकारि‍यों में इतने छेद है कि वह खुद कन्‍फ्यूज रहता है।

खैर आज तो होली है, तो भैया बुरा न मानो....... होली है

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