RBI ने दिया तोहफा, सस्ता हो गया हाेम लोन, जानिए कितना होगा आपको फायदा

Repo Rate Changed: आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा (एमपीसी) बैठक में बैंकों के लिए प्रमुख ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की है, जिससे यह 6.25 फीसदी हो गई है। इससे आपके लिए घर खरीदना सस्ता हो जाएगा। ऐसे में अगर आप घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो यह सबसे अच्छा वक्त है। इससे आपको एक लाख से अधिक रुपए का फायदा होगा।

Money Bhaskar

Feb 07,2019 07:21:00 PM IST

नई दिल्ली.

आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा (एमपीसी) बैठक में बैंकों के लिए प्रमुख ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की है, जिससे यह 6.25 फीसदी हो गई है। इससे आपके लिए घर खरीदना सस्ता हो जाएगा। ऐसे में अगर आप घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो यह सबसे अच्छा वक्त है। इससे आपको एक लाख से अधिक रुपए का फायदा होगा।

ऐसे समझें गणित

अगर कोई व्यक्ति 50 लाख रुपए का कर्ज 20 साल की अवधि के लिए 8.45 फीसदी ब्याज दर से लेता है तो उसकी Emi करीब 43,233 रुपए प्रति माह होती है। लेकिन इस कटौती के बाद अब उसे 42,440 रुपए की मासिक ईएमई का भुगतान करना होगा, जिससे 793 रुपये प्रति माह की बचत होगी। इस हिसाब से आप साल भर में 9,516 रुपए बचा सकेंगे। 20 साल में यह राशि 1.90 लाख रुपए हो जाएगी। हालांकि यह पूरी तरह आपके बैंक पर निर्भर करता है कि वह होम लोन के ब्याज पर कितनी कटौती करता है।

क्या है रेपो रेट

बैंकों को अपने दैनिक कामकाज के लिए अक्सर ऐसी बड़ी रकम की जरूरत होती है जिनकी मियाद एक दिन से ज्यादा नहीं होती। इसके लिए बैंक जो विकल्प अपनाते हैं, उनमें सबसे सामान्य है रिजर्व बैंक से रात भर के लिए (ओवरनाइट) कर्ज लेना। इस कर्ज पर रिजर्व बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है, उसे ही रेपो रेट कहते हैं।

क्यों उठाया यह कदम

आरबीआई ने यह कदम तरलता के संकट से निपटने के लिए उठाया है, जिससे चुनावी साल में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। केंद्रीय बैंक ने रिवर्स रेपो दर को 6 फीसदी और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक दर को 6.5 फीसदी कर दिया है। आरबीआई के गर्वनर शक्तिकांत दास ने कहा, "निवेश गतिविधियां फिर से जोर पकड़ रही है। लेकिन जरूरत निजी निवेश गतिविधियां और निजी उपभोग को मजबूत करने की है।"

 

 

बैंक प्रमुखों से बैठक करेगा आरबीआई

दास ने कहा कि आरबीआई के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह विकास दर को बढ़ावा देने के लिए 'समयबद्ध तरीके से काम करे', खासतौर से यह देखते हुए कि मुद्रास्फीति के नरम रहने के बावजूद निवेश मांग में कमी बनी हुई है। हालांकि केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती करने के बाद भी उसका लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाता है। पहले भी कई बार देखा गया है कि बैंक अपने ग्राहकों के लिए ब्याज दरें कम नहीं करते हैं। इसे देखते हुए आरबीआई अगले दो-तीन हफ्तों में बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक कर सकती है।

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