सरकार ने दी सफाई, RBI के 3.6 लाख करोड़ रु के रिजर्व पर नहीं है नजर

सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बीच चल रहे विवाद पर सरकार ने अपनी तरफ से सफाई दी है। सरकार ने फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्य पर भरोसा जताते हुए कहा है कि वह RBI के 3.6 लाख करोड़ रुपए के रिजर्व को ट्रांसफर करने के बारे में नहीं सोच रही है। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा है कि केंद्रीय बैंक के लिए सही आर्थिक ढांचा तय करने को लेकर दोनों में चर्चा चल रही है। आरबीआई बोर्ड आर्थिक ढांचे और अन्य मसलों पर 19 नवंबर को होने वाली बैठक में चर्चा करेगा।

Money Bhaskar

Nov 09,2018 08:11:00 PM IST

नई दिल्ली। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बीच चल रहे विवाद पर सरकार ने अपनी तरफ से सफाई दी है। सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य हासिल होने का भरोसा जताते हुए कहा है कि वह RBI से 3.6 लाख करोड़ रुपए का रिजर्व लेने के बारे में नहीं सोच रही है। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा है कि केंद्रीय बैंक के लिए सही आर्थिक ढांचा तय करने को लेकर दोनों में चर्चा चल रही है। आरबीआई बोर्ड 19 नवंबर को होने वाली बैठक में आर्थिक ढांचे और अन्य मसलों पर चर्चा करेगा।

ट्वीट करके दी सफाई

एक ट्वीट के जरिए सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा, ‘मीडिया में कई तरह की अफवाहें चल रही हैं। सरकार का राजकोषीय गणित बिलकुल ठीक चल रहा है। सरकार ने आरबीआई के सामने 3.6 या 1 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा है, जैसा अनुमान लगाया जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि फिस्कल रोडमैप पर सरकार मौजूदा वित्त वर्ष के 3.3 फीसदी फिस्कल डेफिसिट टारगेट पर कायम है।

कम हुआ है राजकोषीय घाटा

गर्ग के मुताबिक, वित्त वर्ष 2013-14 में सरकार का राजकोषीय घाटा 5.1 फीसदी था। 2014-15 के बाद से सरकार ने इसे नीचे लाने में सफलता पाई है। उन्होंने कहा कि सरकार वित्त वर्ष 2018-19 में 3.3 फीसदी फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य हासिल कर लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस साल मार्केट बॉरोइंग के लक्ष्य को पहले ही 70,000 करोड़ रुपए कम कर चुकी है।

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लाभांश और पूंजी भंडार पर बन सकती है नई नीति

ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि सरकार चाहती है कि आरबीआई अपने मुनाफे को लाभांश के रूप में सरकार के हवाले कर दे, जबकि केंद्रीय बैंक को लगता है कि अपनी बैलेंस शीट मजबूत रखने के लिए उसे मुनाफे का एक हिस्सा अपने पास रखना चाहिए।

एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, सरकार चाहती है कि आरबीआई लाभांश और पूंजी भंडार को लेकर नई नीति बनाए। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा नीति में आरबीआई के पास 27 फीसदी पूंजी रखने का प्रावधान है। अन्य केंद्रीय बैंक सिर्फ 14 फीसदी पूंजी अपने पास रखते हैं। एेसे में अगर आरबीआई भी 14 फीसदी पूंजी रखने का प्रावधान करे तो 3.6 लाख करोड़ रुपए बाजार को मिल सकते हैं। 

 

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बड़ी रकम लगी है दांव पर

इस वर्ष की शुरुआत में आरबीआई ने बजट के प्रावधानों के तहत सरकार को 50,000 करोड़ का लाभांश देना तय किया थाजिससे केंद्र सरकार को अपने राजकोषीय रोडमैप पर कायम रहने में मदद मिल सके। रिजर्व बैंक ने पिछले वर्ष की तुलना में इस वित्त वर्ष में सरकार को 63 फीसदी अधिक लाभांश दिया है। रिजर्व बैंक ने जून, 2017 में समाप्त अपने वित्त वर्ष में सरकार को 30,659 करोड़ रुपए लाभांश दिया था। हालांकि यह वित्त वर्ष 2015-16 में चुकाए गए लाभांश (65,876 करोड़ रुपएका आधा भी नहीं था। इस वर्ष सरकार ने रिजर्व बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से 54,817.25 करोड़ लाभांश लेने का अनुमान लगाया था।

 

 

 

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