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सरकारी बैंकों में सुधार की सिफारिशों पर सरकार मौन, वित्‍त मंत्रालय नहीं ले रहा सुध: BBB चीफ

सरकारी बैंकों के कामकाज में सुधार के लिए गठित बैंक्‍स बोर्ड ब्‍यूरो (बीबीबी) ने सरकार पर कई आरोप लगाए हैं।

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नई दिल्‍ली. सरकारी बैंकों के कामकाज में सुधार के लिए गठित बैंक्‍स बोर्ड ब्‍यूरो (बीबीबी) ने सरकार पर कई आरोप लगाए हैं। बीबीबी के अध्‍यक्ष और पूर्व कैग विनोद राय ने कहा है कि बैड लोन की समस्‍या से जूझ रहे सरकारी बैंकों में सुधार के लिए दी गई सिफारिशों पर सरकार मौन है। वित्‍त मंत्रालय और बीबीबी के बीच बातचीत की स्थिति बेहतर नहीं है। दोनों के बीच और अधिक स्‍वाभाविक तालमेल की जरूरत है। ब्‍यूरो की वेबसाइट पर एक स्‍टेटमेंट में कहा गया है कि बीबीबी ने 26 जुलाई 2017 को वित्‍त मंत्री अरुण जेटली को लिखे लेटर में सरकारी बैंकों के रिफॉर्म्‍स की सिफारिशों पर एक्‍शन की मांग की है। 

 

 

बीबीबी के अध्‍यक्ष विनोद राय ने एक स्‍वतंत्र बैंकिंग रेग्‍युलेशनंस पर जोर दिया है। कुछ दिन पहले करीब 13 हजार करोड़ रुपए का पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद एक पब्लिक इवेंट में रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने भी इसी तरह की बात की थी। बता दें, सरकारी बैंकों के कामकाज में सुधार के लिए पूर्व कैग विनोद राय की अध्यक्षता में फरवरी 2016 में बीबीबी का गठन किया गया था। राय सहित बीबीबी के सभी सदस्यों का कार्यकाल 31 मार्च को खत्म हो रहा है और उससे करीब 10 दिन पहले उन्होंने अपनी 60 पन्नों की रिपोर्ट सौंप दी। इसमें ब्यूरो की ओर से पिछले 2 साल के दौरान किए गए कार्यों के बारे में बताया गया है।

 

सिफारिशों में गवर्नेंस, रिवार्ड और जवाबदेही की भी बात 
बीबीबी ने अपनी सिफारिशों में कई मामलों पर अपने सुझाव दिए हैं। जैसेकि इसमें सरकारी बैंकों के गवर्नेंस, रिवार्ड और जिम्‍मेदारी तय करने का फ्रेमवर्क बताया गया है। सरकारी बैंकों में इन चीजों की बेहत जरूरत हैं क्‍योंकि अधिकांश चुनौतियां इन्‍हीं से जुड़ी हैं। रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय को मार्च 2017 में सरकारी बैंकों में कोड ऑफ कंडक्‍ट पर भेजी गई बीबीबी की सिफारिशों को दोबारा पेश किया गया। ब्यूरो ने कहा कि विभिन्न सुधारों पर की गई सिफारिशों पर उसे फाइनेंशियल सर्विसेस डिपार्टमेंट से अबतक कोई जवाब नहीं मिला है। ये सिफारिशें नियुक्ति में सुधार, कम्‍पंसेशन, परफार्मेंस रिव्‍यू और ऑपरेशन आदि शामिल थे। 

 

सरकार और बीबीबी में बातचीत की कमी 
बीबीबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि एनडीए सरकार और बीबीबी के बीच बातचीत की स्थिति नहीं थी। राय ने पिछले साल जुलाई में जेटली को लिखे लेटर में कहा कि अगर ब्यूरो और वित्त मंत्रालय के साथ बेहतर संवाद और बातचीत होगी तो एक्‍सपर्ट्स सरकारी बैंकों के कामकाज और प्रदर्शन से जुड़े मामलों में वित्त मंत्री को अपने उपयोगी सुझाव देंगे। अभी तो ब्यूरो महज नियुक्ति बोर्ड की तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि ब्यूरो को इस बात की जानकारी नहीं है कि उसने सरकार को जो सिफारिशें दी हैं उन पर क्या एक्‍शन हुए हैं क्योंकि उसका सरकार के साथ कोई संपर्क नहीं है। लेटर में ब्यूरो ने अपनी सिफारिशों के क्रियान्वयन के बारे में प्रत्येक छह महीने में वित्त मंत्री को इंडिपेंडेंट फीडबैक देने का भी सुझाव दिया था।

 

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