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बैंकों के चेयरमैन-MD का सिलेक्शन होगा सख्त, एडवाइजरी फर्म चेक करेगी लीडरशिप क्वालिटी

मोदी सरकार अब बैंकों के चेयरमैन, एमडी और सीईओ जैसे पदों का सेलेक्शन प्रोसेस और सख्त करने जा रही है।

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नई दिल्ली. पब्लिक सेक्टर के बैंकों के बढ़ते एनपीए और आए दिन आ रहे घोटाले ने सरकार का सिरदर्द बढ़ा दिया है। मोदी सरकार अब बैंकों के चेयरमैन, एमडी और सीईओ जैसे पदों का सिलेक्शन प्रॉसेस और सख्त करने जा रही है। इसके लिए अब एडवाइजरी फर्म अप्वाइंट करने की तैयारी है, जो  बैंकों में बड़े पदों पर नियुक्त होने वाले कर्मचारियों की लीडरशिप क्वॉलिटी पहचाने में बैंक्स बोर्ड ब्यूरो की मदद करेगी। इस संबंध में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने प्रॉसेस भी शुरू कर दिया है।

 

क्या है प्लान?

- सूत्रों के अनुसार इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने बैंक्स बोर्ड ब्यूरो की डिमांड पर एडवाइजरी फर्म के सिलेक्शन का प्रॉसेस शुरू कर दिया है।

- इसके तहत मार्च तक एडवाइजरी फर्म के सिलेक्शन का प्रॉसेस पूरा कर लिया जाएगा, जिससे नए फाइनेंशियल ईयर यानी 2018-19 में पब्लिक सेक्टर बैंकों में चेयरमैन, एमडी और सीईओ के सिलेक्शन प्रॉसेस को नए तरीके से शुरू किया जा सके। 

 

एडवाइजरी फर्म का क्या होगा काम?

- इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने बिडिंग के लिए जो क्राइटेरिया तय किया है, उसके तहत सिलेक्ट होने वाली एडवाइजरी फर्म की इंटरव्यू में आने वाले कैंडिडेट की पर्सनालिटी टेस्ट पर खास तरह से काम करना होगा।

- यानी वह बैंक्स बोर्ड ब्यूरो को यह बताएगा कि कैंडिडेट में लीडरशिप क्वालिटी किस तरह की है। उसमें किसी बात को प्रेजेंट करने की क्या क्षमता है। फर्म का काम पूरी तरह से एडवाइजरी का होगा। कैंडिडेट के सिलेक्शन की जिम्मेदारी बैंक्स बोर्ड ब्यूरो की होगी।


सरकारी बैंकों में 7 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुका है एनपीए

- पब्लिक सेक्टर बैंकों का सितंबर 2017 तक एनपीए 7.34 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया था, जिसके मार्च 2018 तक और बढ़ने की उम्मीद है।

- इसके अलावा हाल ही में पीएनबी में हुए 11 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले ने सरकार के लिए चैलेंज खड़ा कर दिया है।

- 2014 में आई मोदी सरकार ने बैंकों में सीनियर अफसरों के सिलेक्शन की प्रॉसेस को बैंक्स बोर्ड ब्यूरो बनाकर उसे सौंप दिया है।

- सरकार का दावा है कि इसके जरिए बैंकों में राजनीतिक दखल कम होगा।

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