1 मई से सस्ता हो जाएगा 1 लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज, SBI के इस ऑफर से आप भी उठा सकते हैं लाभ

अगर आप भी अपना घर खरीदने के लिए होम लोन लेने का सोच रहे हैं तो आपके लिए यह खबर काफी फायदेंमंद है। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक, 1 मई से 1 लाख रुपये से ज्यादा के कर्ज सस्ते हो जाएंगे। वहीं बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने विभिन्न अवधि के कर्ड पर ब्याज दर में 0.05 प्रतिशत की कटौती की है।

Money Bhaskar

Apr 06,2019 12:24:00 PM IST

नई दिल्ली। अगर आप भी अपना घर खरीदने के लिए होम लोन लेने का सोच रहे हैं तो आपके लिए यह खबर काफी फायदेंमंद है। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक, 1 मई से 1 लाख रुपये से ज्यादा के कर्ज सस्ते हो जाएंगे। वहीं बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने विभिन्न अवधि के कर्ड पर ब्याज दर में 0.05 प्रतिशत की कटौती की है। SBI के एमडी अरिजीत बसु ने कहा कि मई से एसबीआई एक लाख से ज्यादा के कर्ज सस्ते करेगा और डिपॉजिट की दरें भी घट जाएंगी। एसबीआई ने ऐलान किया है कि 1 लाख से ऊपर के कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट पर 0.25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की जाएगी। नए दरें 8.25 फीसदी होंगी।

केवल इन लोगों को मिलेगा फायदा


एसबीआई के सभी ग्राहकों को इसका फायदा नहीं होगा। नया नियम सिर्फ उन्हीं खातों पर लागू होगा, जिनमें 1 लाख रुपये से अधिक राशि होगी। एक्सटर्नल बेंचमार्किंग नियम के तहत एसबीआई ने सबसे पहले यह पहल की है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से समय-समय पर रेपो रेट में बदलाव किया जाता है। रेपो रेट में कमी से बैंकों को फायदा और बढ़ोतरी से नुकसान होता है। लेकिन कई बार रेपो रेट में कमी का फायदा बैंक अपने ग्राहकों को नहीं देते हैं। इससे ग्राहकों को नुकसान होता है। इसको देखते हुए SBI ने अपने बचत खातों को छोटी अवधि के लोन को रेपो रेट से लिंक करने का फैसला किया है। इससे बैंक के ग्राहकों को बड़ा फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्या है एक्सटर्नल बेंचमार्किंग

एक्सटर्नल बेंचमार्किंग नियम के तहत लोन्स में फ्लोटिंग ब्याज दरें रेपो रेट या गवर्मेंट सिक्योरिटी में निवेश पर यील्ड जैसे बाहरी मानकों से संबद्ध की जाएंगी. इसका फायदा यह होगा कि RBI द्वारा पॉलिसी रेट घटाते या बढ़ाते ही कस्टमर्स के लिए लोन भी तुंरत सस्ते या महंगे हो जाएंगे। फिलहाल, बैंक अपने कर्ज पर दरों को प्रिंसिपल लेंडिंग रेट (PLR), बेंचमार्क प्रिन्सिपल लेंडिंग रेट (BPLR), बेस रेट और मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) जैसे आंतरिक मानकों के आधार पर तय करते हैं।

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