काले धन से जुड़ी रिपोर्ट नहीं कर सकते साझा, संसदीय समिति कर रही है जांच: वित्त मंत्रालय

Black Money: वित्त मंत्रालय ने देश के भीतर और बाहर जमा काले धन से जुड़ी तीन रिपोर्ट्स को साझा करने से मना कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि संसदीय समिति इस रिपोर्ट की समीक्षा कर रही है और ऐसे में रिपोर्ट्स की जानकारियों को साझा करना संसदीय विशेषाधिकार का हनन होगा। इन रिपोर्ट्स में उस ब्लैक मनी का ब्योरा है जो भारतीयों ने देश के अंदर और विदेश में जमा कर रखा है। इस रिपोर्ट को करीब चार साल पहले सरकार को सौंपा गया था।

Money Bhaskar

Feb 04,2019 07:31:00 PM IST

नई दिल्ली.

वित्त मंत्रालय ने देश के भीतर और बाहर जमा काले धन से जुड़ी तीन रिपोर्ट्स को साझा करने से मना कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि संसदीय समिति इस रिपोर्ट की समीक्षा कर रही है और ऐसे में रिपोर्ट्स की जानकारियों को साझा करना संसदीय विशेषाधिकार का हनन होगा। इन रिपोर्ट्स में उस ब्लैक मनी का ब्योरा है जो भारतीयों ने देश के अंदर और विदेश में जमा कर रखा है। इस रिपोर्ट को करीब चार साल पहले सरकार को सौंपा गया था।

इन संस्थाओं ने तैयार की थी रिपोर्ट

यूपीए सरकार ने 2011 में दिल्ली राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP), राष्ट्रीय व्यावहारिक आर्थिक अनुसंधान परिषद (NCAER) और फरीदाबाद के राष्ट्रीय वित्त प्रबंधन संस्थान (NIFM) से ब्लैक मनी पर अध्ययन कराया था और जानकारी जुटाने को कहा था। इन संस्थानों ने रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपी थी।

सरकार ने किया रिपोर्ट देने से इनकार

न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की तरफ से दायर आरटीआई का जवाब देते हुए सरकार ने बताया कि NIPFP की रिपोर्ट 30 दिसंबर 2013, NCAER की रिपोर्ट 18 जुलाई 2014 और NIFM की रिपोर्ट 21 अगस्त 2014 को मिली थी। मंत्रालय ने कहा, 'रिपोर्ट और सरकार की प्रतिक्रिया को लोकसभा सचिवालय को भेज दिया गया ताकि उसे वित्तीय मामलों पर गठित स्थायी समिति के समक्ष पेश किया जा सके।' इस आरटीआई के जवाब में लोकसभा सचिवालय ने बताया है कि इस रिपोर्ट को समिति के समक्ष पेश किया गया है जो इसकी जांच करेगी। इसे फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया जाएगा क्योंकि यह संसद के विशेषाधिकारों का उल्लंघन होगा।

ब्लैक मनी पर नहीं कोई आधिकारिक जानकारी

भारत और विदेश में जमा ब्लैक मनी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। अमेरिकी थिंक टैंक ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी (GFI) के मुताबिक 2005 से 2014 के बीच भारत में 770 अरब डॉलर (तकरीबन 50 हजार करोड़ रुपए) काला धन आया।

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