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PNB फ्रॉड: LoU जारी करने के बदले मिलती थी रिश्‍वत- CBI का खुलासा, ED ने 15 शहरों में की छापेमारी

नई दिल्‍ली. पीएनबी फ्रॉड केस में गिरफ्तार आरोपियों से सीबीआई की पूछताछ में अहम खुलासा हुआ है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार बैंक अफसरों ने यह बताया है कि प्रत्‍येक लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) जारी करने के बदले इस मामले से जुड़े सभी बैंक अधिकारियों को कमीशन मिलता था। दूसरी ओर, ईडी ने पीएनबी फ्रॉड मामले में रविवार को 15 शहरों में करीब 45 जगहों पर छापेमारी की। बता दें, सीबीआई ने बैंक के पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी समेत 3 बैंक कर्मचारियों को शनिवार को हिरासत में लिया। 

 

- ईडी ने रविवार को 15 शहरों के 45 अलग-अलग ठिकानों में छापे मारे। इनमें गीतांजली और नक्षत्र के कोलकाता स्थित 6 शोरूम भी शामिल हैं। गीतांजली के रायपुर स्‍टोर में भी छापेमारी हुई। 

- सीबीआई के हवाले से न्यूज एजेंसी ने बताया कि जांच के दौरान गिरफ्तार अफसरों ने नीरव मोदी और उसके सहयोगियों को जारी किए गए हर एलओयू के बारे में बताया। इसमें हर लोन पर कमीशन निश्चित किया गया था। 
- सीबीआई के मुताबिक, फ्रॉड में पीएनबी के अन्य अफसर और बाहरी लोग भी हो सकते हैं। फिलहाल हम पूरे मामले की तफ्तीश कर रहे हैं।

 

3 मार्च तक सीबीआई कस्‍टडी में हैं आरोपी

- गोकुलनाथ  शेट्टी के अलावा बैंक इम्‍प्‍लॉई मनोज खरात और पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी ग्रुप के हेमंत भट्ट को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया। जहां इन तीनों को तीन मार्च तक के लिए सीबीआई कस्टडी में भेज दिया गया है।

- बैंकिंग इतिहास में इस सबसे बड़े घोटाले में नीरव मोदी के बाद सबसे ज्यादा सुर्खियों में गोकुलनाथ शेट्टी का ही नाम है। 
- शेट्टी पिछले साल मई में ही पंजाब नेशनल बैंक से डिप्टी मैनेजर के पद से रिटायर हुए थे। 

 

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ED ने जब्‍त की 5674 करोड़ रुपए की संपत्ति 

- पीएनबी के 11,400 करोड़ रुपए के फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार तक नीरव मोदी और अन्य के ठिकानों पर छापेमारी की। एजेंसी ने 25 करोड़ रुपए के और हीरे-जेवरात जब्त किए हैं। कुल मिलाकर अब तक 5,674 करोड़ रुपए की जब्ती हो चुकी है।

- एक बयान में ईडी ने कहा, ‘शनिवार को नीरव मोदी मामले में देश में विभिन्न इलाकों में 21 स्थानों पर छापेमारी कर 25 करोड़ रुपए कीमत के हीरे-जेवरात और जब्त किए गए हैं। इस तरह अब तक जब्ती का आंकड़ा 5,674 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।’

- ईडी अधिकारियों ने कहा कि छापेमारी 15 फरवरी को शुरू हुई थी और जारी रह सकती है। 

 

CVC ने वित्‍त मंत्रालय और PNB मैनेजमेंट को किया तलब 

- इस बीच, केंद्रीय सतर्कता आयोगी यानी सीवीसी ने वित्‍त मंत्रालय के अधिकारियों और पंजाब नेशनल बैंक के के मैनेजमेंट को तलब किया। सीवीसी ने पीएनबी घोटाले को लेकर इन विभागों के अधिकारियों को पेश होने को कहा है।

- सीवीसी ने अधिकारियों को 19 फरवरी तक का समय दिया है। 

 

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गोकुलनाथ और खरात पर क्‍या हैं आरोप? 

- जांच में पता चला कि मार्च 2010 से बैंक के फॉरेक्स डिपार्टमेंट में काम कर रहे डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी ने विंडो ऑपरेटर मनोज खरात नाम के साथ मिलकर नीरव की कंपनियों को फर्जी तरीके से एलओयू (लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग) दिया।
- यह हेराफेरी पकड़ में न आए, लिहाजा बैंक के रिकॉर्ड में इसकी एंट्री भी नहीं की गई थी। बाद में इन्हीं जाली एलओयू के आधार पर एक्सिस और इलाहाबाद जैसे बैंकों की विदेशी शाखाओं ने बैंक को डॉलर में लोन दिए थे।
- इन लोन का इस्तेमाल बैंक के नोस्ट्रो अकाउंट्स की फंडिंग के लिए किया गया था। इन अकाउंट्स से फंड को विदेश में कुछ फर्मों के पास भेजा गया, जो नीरव मोदी की कंपनी से ताल्लुक रखती थीं।

 

17 हजार करोड़ से ज्‍यादा का घोटाला 

- पीएनबी में हुए घोटाले की वजह से भारतीय बैंकों को कम से कम 2.7 अरब डॉलर (17962 करोड़ रुपए) का झटका लग सकता है। इनकम टैक्‍स डि‍पार्टमेंट ने शनि‍वार को यह अंदेशा जताया। 
- मार्च 2017 तक पीएनबी ने 176.32 अरब रुपए की लोन गारंटी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चोकसी के फेवर में दी थी। 
- न्‍यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबि‍क, आयकर वि‍भाग ने अपने नोट में यह अंदेशा जताया है कि इस घोटाले के चलते भारतीय बैंकों को अनुमान से कहीं ज्‍यादा बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। 
- बुधवार को पीएनबी में 11400 करोड़ रुपए के फ्रॉड का खुलासा हुआ था, जि‍समें हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप के एमडी व चेयरमैन मेहुल चौकसी के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं। 

 

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 ये मामला सामने कैसे आया?

- पंजाब नेशनल बैंक ने बुधवार को स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।
- यह फ्रॉड कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए थे। 
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। यह मामला 2011 से जुड़ा है।

 
कैसे हुआ फ्रॉड?

- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।
- पीएनबी के कुछ अफसरों ने नीरव मोदी को गलत तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) दी। इसी एलओयू के आधार पर मोदी और उनके सहयोगियों ने दूसरे बैंकों से विदेश में कर्ज ले लिया। पीएनबी ने भले ही दूसरे लेंडर्स के नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि पीएनबी द्वारा जारी एलओयू के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक ने भी क्रेडिट ऑफर कर दिया था। 


घोटाले में कौन-कौन हैं आरोपी ?

- हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप्स के मालिक मेहुल चौकसी इस घोटाले के मुख्‍य आरोपी हैं। इन दोनों ने गोकुलनाथ शेट्टी के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।
- 280 करोड़ के फ्रॉड केस में ED ने नीरव मोदी की पत्नी एमी, भाई निशाल, मेहुल चीनूभाई चौकसी, डायमंड कंपनी के सभी पार्टनर्स, सोलर एक्सपर्ट्स, स्टेलर डायमंड और बैंक के दो अफसरों गोकुलनाथ शेट्टी (अब रिटायर्ड) और मनोज खरात के खिलाफ केस दर्ज किया है।

 

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