बैंक अभी ज्यादा ब्याज दे रहे हैं तो लालच में न आएं, नए वित्त वर्ष में मिलेगा ज्यादा interest

यदि आपके बैंक अभी थोड़ी ऊंची ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं तो इसके लालच में नहीं आएं क्योंकि आने वाले महीनों में ब्याज दरें और बढ़ने के आसार हैं। इसकी ठोस वजह भी है। वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही में वित्त वर्ष 18 की इसी तिमाही के मुकाबले प्राइवेट बैंकों ने 22 प्रतिशत ज्यादा कर्ज बांटे। ऐसे में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च (Ind-Ra) का कहना है कि बैंकों में डिपॉजिट्स पाने की होड़ मचेगी और ब्याज दरें बढ़ेंगी। 

money bhaskar

Mar 21,2019 04:25:00 PM IST

नई दिल्ली. यदि आपके बैंक अभी थोड़ी ऊंची ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं तो इसके लालच में नहीं आएं क्योंकि आने वाले महीनों में ब्याज दरें और बढ़ने के आसार हैं। इसकी ठोस वजह भी है। वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही में वित्त वर्ष 18 की इसी तिमाही के मुकाबले प्राइवेट बैंकों ने 22 प्रतिशत ज्यादा कर्ज बांटे। ऐसे में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च (Ind-Ra) का कहना है कि बैंकों में डिपॉजिट्स पाने की होड़ मचेगी और ब्याज दरें बढ़ेंगी।

यह है वजह

बैंकों ने अक्टूबर-दिसंबर 2018 तिमाही में 2017 की इसी तिमाही के मुकाबले 12.9 प्रतिशत ज्यादा कर्ज बांटे जबकि इस दौरान उनके पास जमा होने वाली रकम में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसलिए क्रेडिट रेटिंग एजेंसी का मानना है कि अगर आगे भी कर्ज की वृद्धि दर बढ़ती रही तो बैंक लोगों से पैसे जमा करना के लिए लुभावने उपाय जरूर करेंगे। अपने यहां मोटी रकम जमा करवाने के लिए ऊंची ब्याज दरें देने के सिवा बैंकों के पास कोई चारा नहीं बच जाएगा।


ब्याज दरों पर नहीं होईए लट्टू, कई छुपी शर्तों से हो सकता है नुकसान
सीए हरिगोपाल पाटीदार निवेशकों को फिक्स्ड डिपॉजिट करते वक्त सिर्फ ऊंची ब्याज दरों पर ही लट्टू नहीं हो जाना चाहिए क्योंकि बैंक ऊंची ज्यादा ब्याज ज्यादा अवधि के जमा पर ही ऑफर करते हैं। साथ ही, ऊंची ब्याज दरों वाले डिपॉजिट्स के लिए कई दबी-छिपी शर्तें भी होती हैं। मसलन, जन स्मॉल फाइनैंस बैंक तीन वर्ष के एफडी पर 9.25 प्रतिशत ब्याज ऑफर कर रहा है, लेकिन उसका शर्त है कि अगर 15 लाख रुपये से कम एफडी किए तो 3 वर्ष की मियाद पूरी होने से पहले आप पैसे नहीं निकाल पाएंगे। यहां तक कि आपतकालीन परिस्थिति में भी आप अपने ही पैसे नहीं निकाल सकते। दूसरी बात यह भी है कि नए संस्थान में मोटी रकम लगाने से पहले सतर्कता बरतनी चाहिए।


टैक्स का रखें ध्यान
एफडी में बड़ी रकम डालने से बचने का एक और बड़ा कारण यह भी है कि इस पर मिला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल है। यानी, एफडी पर ब्याज से होने वाली पूरी आमदनी पर टैक्स लगता है। जिन करदाताओं की आमदनी टैक्स छूट की सीमा (5 लाख रुपये) के अधीन हो, उन्हें ऊंची ब्याज दरों के लालच में एफडी करने से बचना चाहिए। इसका कारण यह है कि बैंक डिपॉजिट्स और कॉर्पोरेट एफडीज से प्राप्त ब्याज की रकम जब आपके कुल टैक्सेबल इनकम को 5 लाख रुपये से ज्यादा बना देगी तो आपको टैक्स के दायरे में आ जाएंगे। इससे अतिरिक्त ब्याज दर से हुई कमाई टैक्स में ही चली जाएगी। कई बार यह घाटे का सौदा भी साबित हो सकता है।

एफडी पर ब्याज दरें
बैंक जमा अवधि ब्याज दरें
जन स्मॉल फाइनैंस 3 वर्ष 9.25%
फिनकेयर स्मॉल फाइनैंस बैंक 2 से 3 वर्ष 9%
एयू स्मॉल फाइनैंस 2 वर्ष 8.25%
इंडसइंड बैंक 1 वर्ष 8%
कर्नाटक बैंक 475 दिन 7.75%

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