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जो काम रघुराम राजन एवं उर्जित पटेल सालों में नहीं कर सके, उसे आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने तीन महीने में कर दिखाया

निर्यातक, छोटे उद्यमी एवं कारपोरेट की मांगों को किया फैसलों में तब्दील

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नई दिल्ली। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन एवं उनके बाद उर्जित पटेल जिस काम को सालों में नहीं कर सके, उसे आरबीआई के वर्तमान गवर्नर शक्तिकांत दास ने तीन महीने में कर दिखाया। उन्होंने सरकार की इच्छा के मुताबिक तीन माह में दरों में दो बार कटौती की। दरों में यह कटौती चुनावी वर्ष में की गई है।

 

दरों में कटौती नहीं करने से पद से हटे पूर्व गवर्नर 

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सरकार की इच्छा के अनुरूप ही दरों में कटौती की गई है ताकि लोन सस्ता हो सके। दास से पूर्व के गवर्नर भी दरों में कटौती का लगातार दबाव था, लेकिन उन्होंने महंगाई को काबू में एवं अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखने के उद्देश्य से दरों में कटौती नहीं की। माना जा रहा है कि इस कारण ही इन दोनों को आरबीआई के पद से हाथ धोना पड़ा।

 

यह चीजें हो जाएंगी सस्ती

पिछले तीन महीने में आरबीआई की दरों में दो बार की कटौती से लोन की दरें पिछले साल के मुकाबले 50 आधार अंक सस्ती हो जाएंगी। होम लोन, ऑटो लोन एवं अन्य सभी प्रकार के बैंक लोन सस्ते हो जाएंगे। चुनावी साल में इसे लोगों के लिए बड़ी राहत बताई जा रही है। बिल्डर्स से लेकर निर्यातक एवं छोटे उद्यमी सभी ब्याज दरों में कटौती की मांग कर रहे हैं। यह तभी  संभव हो सकता था जब आरबीआई की तरफ से दरों में कटौती की जाती।

 

बाजार में बढ़ेगी नकदी 

गुरुवार को आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट एवं रेपो रेट दोनों में 25 आधार अंक की कटौती की। रेपो रेट में कटौती से बैंकों को आरबीआई से पहले के मुकाबले 25 आधार अंक सस्ती दरों पर लोन मिलेगा। इससे उनके पास नकदी बढ़ेगी और सस्ती दरों पर लोन मिलने से बैंक भी ग्राहकों को कम दर पर लोन देंगे। वहीं रिवर्स रेपो रेट में कटौती से आरबीआई के पास बैंकों के जमा धन पर कम ब्याज मिलेंगे जिससे बैंक आरबीआई के पास जमा धन में कटौती के लिए प्रोत्साहित होंगे और बाजार में नकदी बढ़ेगी

अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट 

औद्योगिक संगठन फिक्की के अध्यक्ष संदीप सोमानी ने कहा कि आरबीआई के इस फैसले से खुदरा एवं कारपोरेट दोनों प्रकार के लोन सस्ते होंगे। अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा और उपभोग बढ़ेगा जिससे मांग में इजाफा होगा। नरेडको के प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि इससे बाजार का रुख सकारात्मक होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि बैंक होम लोन के मामले में बायर्स को इस कटौती को पास-ऑन करेंगे जिससे मकान की वास्तविक बिक्री में बढ़ोतरी होगी।

 

आरबीआई मौद्रिक नीति समीक्षा की खास बातें

 

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की गुरुवार को संपन्न तीन दिवसीय पहली द्विमासिक सीमक्षा बैठक में नीतिगत दरों में एक चौथाई प्रतिशत की कटौती की गयी। 

समिति द्वारा लिये गये निर्णयों की मुख्य बातें इस प्रकार हैं :-

-रेपाे दर 6.25 प्रतिशत से घटाकर 6.00 प्रतिशत

-रिवर्स रेपाे दर 6.00 प्रतिशत से घटाकर 5.75 प्रतिशत

-बैंक दर 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत

-मार्जिनल स्टैंडिंग फसिलिटी (एमएसएफ) 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत

-नकद आरक्षित अनुपात चार प्रतिशत पर यथावत

वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) 19.25 प्रतिशत

-चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को कम कर 7.2 प्रतिशत किया 

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में खुदरा महंगाई अनुमान को कम कर 2.9 से 3.0 प्रतिशत के बीच रहने तथा दूसरी छमाही में इसके 3.5 से 3.8 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद जताई 

-चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक बैठक 03 से 06 जून 2019 को  

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