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बैंकों के ऑनरशिप पर नए सिरे से विचार की जरुरत : CEA अरविंद सुब्रमण्यन

बैंकों के ऑनरशिप पर नए सिरे से विचार की जरुरत : CEA अरविंद सुब्रमण्यन

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नई दिल्‍ली। भारत के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन ने बैंकिंग सेक्‍टर में बड़े सुधारों की वकालत करते हुए बैंकों के स्वामित्व पर नये सिरे से विचार करने की जरूरत पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्‍होंने हाल के दिनों में बैंकिंग सेक्‍टर में हुए घोटालों में बैंकों के रवैये पर निराशा जाहिर की। 


बैंकों के स्वामित्व पर विचार की जरुरत 


उन्‍होंने कहा कि यदि आप चाहते हैं कि भविष्य में सरकारी बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों की पुनरावृत्ति न हो, तो फिर हम अपना पैसा ‘ब्लेक होल' में नहीं डाल सकते। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमें पब्‍लिक सेक्‍टर के बैंकों के स्वामित्व पर नये सिरे से विचार करना चाहिए।  इसके लिए हमें सुधारों को लेकर व्यापक एजेंडा अपनाना होगा।  


घोटाले की खबरों से प्रयासों को झटका


सीईए ने बताया कि बैलेंशशीट की चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने दो महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। कंपनियों के बैलेंशशीट को साफ-सुथरा करने के लिए इंसॉल्‍विंग एंड बैंकरप्‍सी कोड यानी आईबीसी प्रोसेस और बैंकों का री-कैपिटलाइजेशन। उन्‍होंने हालांकि यह भी कहा कि बैंकिंग घोटाले की खबरों से इन प्रयासों को झटका लगा है। 

 

 

मैन्‍युफैक्‍चरिंग जॉब्‍स पर क्‍या बोले 
नोबेल से सम्मानित पॉल क्रुगमैन के भारत में मैन्‍युफैक्‍चरिंग जॉब्‍स में कमी के हालिया बयान के बारे में पूछे जाने पर सीईए ने स्वीकार किया कि देश ने इस सेक्‍टर में बड़ी पहल का समय 25-30 साल पहले गंवा दिया है। उन्होंने कहा कि यदि आप भविष्य की ओर देखें, तो मुझे नहीं पता कि मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर पूर्व की तरह जॉब्‍स दे पायेगा। उन्होंने कहा कि बदलते परिदृय में निर्माण, एग्री और सर्विस सेक्‍टर अधिक रोजगार देने वाले हो सकते हैं। 

 

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