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बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Bankingप्राइवेट कंपनी पर 65 करोड़ के बैंक डिफॉल्‍ट का आरोप, CBI ने दर्ज किया केस

प्राइवेट कंपनी पर 65 करोड़ के बैंक डिफॉल्‍ट का आरोप, CBI ने दर्ज किया केस

प्राइवेट कंपनी पर 65 करोड़ के बैंक डिफॉल्‍ट का आरोप, CBI ने दर्ज किया केस


नई दिल्‍ली.. सीबीआई ने बैंक लोन डिफॉल्‍ट मामले में जय अंबे गौरी केमिकल नामक कंपनी पर एफआईआर दर्ज किया है। इस कंपनी पर 65 करोड़ रुपए का बैंक लोन डिफॉल्‍ट का आरोप है। सीबीआई ने बताया कि यह लोन स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से 2014 में नॉन परफॉर्मिंग एसेट और फ्रॉड घोषित कर दिया गया था।  

 

सीबीआई की ओर से बताया गया कि कंपनी ने मैटेरियल के स्‍टॉक्‍स बैंक की जानकारी के बिना डायवर्ट कर दिया। जबकि ये विवादित प्रॉपर्टी थे।  इस लोन डिफॉल्‍ट की वजह से कथित तौर पर 65 करोड़ का नुकसान हुआ। 

 

आलोचना झेल रही बैंकिंग सेक्‍टर 

 

बता दें कि  पंजाब नेशनल बैंक में फ्रॉड की वजह से बैंकिंग सेक्‍टर लगातार आलोचना झेल रही है। पीएनबी में 13 हजार करोड़ रुपए का फ्रॉड पकड़ा गया था।  इस घोटाले की शुरुआत 2011 से हुई। 7 साल में हजारों करोड़ की रकम फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoUs) के जरिए विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई।
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। 
- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।

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