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बैंकिंग लोन सिस्टम में बड़े चेंज की तैयारी, माल्या-नीरव जैसों के लिए फ्रॉड होगा मुश्किल

नीरव मोदी द्वारा पीएनबी को 13000 करोड़ रुपए का चूना लगाए जाने के बाद अब बैंकों में कई लेवल पर सख्ती बरतने की तैयारी है।

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नई दिल्ली। नीरव मोदी द्वारा पीएनबी को 13000 करोड़ रुपए का चूना लगाए जाने के बाद अब बैंकों में कई लेवल पर सख्ती बरतने की तैयारी है। इसके लिए बैंकों के क्रेडिट सिस्टम में कई अहम बदलाव किए जाएंगे। जिसमें ज्यादा कर्ज लेने वाले कॉरपोरेट्स की निगरानी बढ़ाने से लेकर, आईटी लेवल पर कई सिक्योरिटी चेक लगाने का खाका तैयार किया गया है। बृहस्पतिवार को एसबीआई और दूसरे बैंकों के साथ हुई मीटिंग में पूरा फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।

 

 

स्विफ्ट सिस्टम सीबीएस से डायरेक्ट होगा लिंक

 

अभी तक फंड ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल हो रहे स्विफ्ट सिस्टम को कोर बैंकिंग सॉल्युशन से जोड़ा नहीं गया था। जिसका फायदा नीरव मोदी ने बैंक अधिकारियों से मिलकर LOU जारी करने में उठाया। अब सभी बैंकों को निर्देश दिए गए है कि वह अप्रैल 2018 यानी अगले महीने तक स्विफ्ट सिस्टम को कोर बैंकिंग सॉल्युशन से लिंक करा लें। जिससे कि फंड ट्रांसफर की रियल टाइम ट्रैकिंग हो सके। साथ ही स्विफ्ट ऑपरेशन केवल सुबह 8 बजे से लेकर रात 9 बजे तक हो सकेगा।

 

 

बिना सीबीएस में एंट्री के एनईएफटी और आरटीजीएस मैसेज नहीं

 

इसके अलावा मीटिंग में एक अहम फैसला यह लिया गया है कि कोई भी ट्रांजैक्शन एनईएफटी और आरटीजीएस के जरिए तभी होगा, जब उसकी एंट्री सीबीएस में होगी। यानी कोई एनईएफटी और आरटीजीएस ट्रांजैक्शन डायरेक्ट नहीं किया जा सकेगा। मैसेज सीबीएस में इंटर होने के बाद ही भेजा जा सकेगा। नीरव मोदी ने डायरेक्ट मैसेज भेजने की सुविधा का लाभ उठाया था, उसे देखते हुए अब इसे सीबीएस से पूरी तरह से लिंक कर दिया जाएगा।


कॉरपोरेट्स के लिए बैंक अधिकारियों को फंसाना नहीं होगा आसान

 

मीटिंग में एक अहम फैसला यह भी किया गया है कि ऐसे कॉरपोरेट्स जिन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज ले रखा है, उन्हें मल्टीपल बैंकिंग अरेंजमेंट की सुविधा आसानी से नहीं मिलेगी। नए सिस्टम के बाद कर्ज में डूबे कॉरपोरेट्स के लिए लोन न चुकाने की स्थिति में बैंक उन पर कई तरह की सख्ती कर सकेंगे। जिससे कि वह बैंक की दूसरी सुविधाओं को न ले सके। लोन देते समय कॉरपोरेट की कंपनी में क्या इक्विटी और किसी डिफॉल्ट के समय उसकी क्या वैल्यु होगी, उसका भी रिव्यू किया जाएगा। यानी विजय माल्या जैसी स्थिति नहीं सामने आए, इसके लिए भी सिस्टम तैयार होगा। विजय माल्या के मामले में डिफॉल्ट के बाद उनके द्वारा दी गई गारंटी की वैल्यु काफी कम हो गई। जिससे बैंक प्रॉपर्टी आदि को बेचकर भी पैसा नहीं वसूल पा रहे हैं।

 

 

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