Home » Economy » BankingAccount holders withdrew 50k crore cash from banks on Diwali

दिवाली पर निकला बैंको का दिवाला, 50 हजार करोड़ रुपए नकदी की निकासी

बाजार में करेंसी बढ़ जाती है तो बैंक बढ़ा देते हैं इंटरेस्ट रेट्स

1 of

नई दिल्ली। इस दिवाली लोगों ने देश के बैंको का दिवाला निकाल दिया। लोगों ने धन और रोशनी के इस त्यौहार पर गाड़ी, ज्वेलरी और अन्य कई चीजें खरीदने के लिए बैंकों से तकरीबन 50 हजार करोड़ नकदी निकाल ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक 9 नबंवर को बाजार में करेंसी सर्कुलेशन 20.2 लाख करोड़ रुपए था। इसमें दिवाली वाले हफ्ते की हिस्सेदारी 49,418 करोड़ रुपए थी। नोटबंदी के बाद बाजार में करेंसी सर्कुलेशन का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है।

 

इससे पहले 13 जनवरी, 2017 को खत्म होने वाले हफ्ते में बैंकों से अतिरिक्त 52,786 करोड़ रुपए निकले थे। तब करेंसी छापने वाली प्रेस नोटबंदी में हटाए गए नोटों की जगह पर नए नोट लाने के लिए तेजी से काम कर रही थी।

 

नोटबंदी के बाद धीमी हुई थी करेंसी सर्कुलेशन की रफ्तार

सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी में साल-दर-साल होने वाली वृद्धि नोटबंदी के बाद लगातार 53 हफ्तों तक नेगेटिव फेज में रही। इस साल मार्च में करेंसी सर्कुलेशन सुधरा और नोटबंदी से पहले के 18 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंचा। ऐसी उम्मीद थी कि बैंक नोटों की डिमांड कम हो जाएगी, लेकिन सालभर डिमांड काफी ज्यादा रही। खाताधारकों ने हर महीने तकरीबन 2.6 लाख करोड़ रुपए एटीएम से निकाले।

 

आगे भी पढ़ें- 

 

 

बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

 

जब बाजार में करेंसी ज्यादा हो जाती है और बैंको में कम होने लगती है तो बैंकों की उधार देने की क्षमता कम हाे जाती है। ऐसे में बैंक अपने इंटरेस्ट रेट्स बढ़ा देते हैं। हालांकि बैंकों का कहना है कि त्यौहारों के बाद यह पैसा वापस बैंक में आ जाता हैक्योंकि लोग इस पैसे को खर्च करते हैं और व्यापारी इस पैसे को बैंक खातों में जमा करा देते हैं।

 

आगे भी पढ़ें- 

 

 

 

चुनाव और करेंसी सर्कुलेशन में गहरा रिश्ता

 

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने 2013 में कहा था कि चुनावों के समय लोगों के पास कैश बढ़ जाता है। इसके कारण का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि न सिर्फ चुनाव होने जा रहे राज्य में बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी कैश सर्कुलेशन में वृद्धि हो जाती है। इस लिहाज से अब कुछ समय तक करेंसी सर्कुलेशन ज्यादा रह सकता है। 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट