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मोदी सरकार में बैंकों का बंटाधार, 5 साल में 5.5 लाख करोड़ के बैड लोन को किया राइट ऑफ

आरटीआई में खुलासा, लोन को राइट ऑफ करने के लिए बैंकों में लगी रही होड़

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नई दिल्ली। सरकारी बैंकों को बार-बार संकट से उबारने के लिए करदाताओं के पैसे से पूंजी उपलब्ध कराने वाली मोदी सरकार के कार्यकाल में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक आरटीआई के जवाब में खुलासा हुआ है कि मोदी सरकार के पांच साल में सरकारी बैंकों ने करीब 5.5 लाख करोड़ रुपए के बैड लोन को राइट ऑफ कर दिया है। 

RBI ने दी जानकारी
इंडियन एक्सप्रेस की ओर से सूचना का अधिकार (RTI) के जवाब में भारतीय रिजर्व बैंक  (RBI) की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार बीते दस साल में बैंकों ने करीब 7 लाख करोड़ रुपए के बैड लोन को राइट ऑफ किया है। इसका करीब 80 फीसदी हिस्सा मोदी सरकार के पांच साल के कार्यकाल यानी अप्रैल 2014 से दिसंबर 2018 के बीच राइट ऑफ किया गया है। आरबीआई की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2014 के बाद से करीब 5,55,603 करोड़ रुपए के बेड लोन को राइट ऑफ किया गया है। आरबीआई के आंकड़ों से साबित होता है कि बैड लोन की रकम कम दिखाने के लिए बैंकों में होड़ लगी रही और 2016-17 में 1,08,374 करोड़ और 2017-18 में 161,328 करोड़ के बैड लोन को राइट ऑफ किया। 2018-19 के शुरुआती 6 महीनों में 82,799 करोड़ रुपए की रकम राइट ऑफ की गई। अक्टूबर से दिसंबर 2018 की तिमाही में 64,000 करोड़ की रकम राइट ऑफ की गई। वित्त वर्ष 2018-19 में दिसंबर 2018 में खत्म हुई तीसरी तिमाही तक बैंकों ने करीब 1,56,702 करोड़ रुपए के बैड लोन को राइट ऑफ किया है।

आरबीआई के पास नहीं लोगों को दिए लोन की जानकारी


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के पास व्यक्ति विशेष को कर्ज देने और उनके बैड लोन को राइट ऑफ करने के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। RBI के सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि बैड लोन में से 15 से 20 फीसदी से ज्यादा की रकम की रिकवरी नहीं हो पा रही है। इसके अलावा राइट ऑफ श्रेणी में लगातार इजाफा हो रहा है। यह इजाफा रिकवरी और पुनर्पूंजीकरण की रफ्तार से भी तेज है।

क्या होता है राइट ऑफ


राइट ऑफ का मतलब है कि ऐसा लोन जिसके चुकाए जाने की उम्मीद खत्म हो जाती है और उसे बैलेंस शीट से हटा दिया जाता है। बैंक अपने बैलेंस सीट को साफ सुथरा रखने के लिए ऐसे बैड लोन को राइट ऑफ कर देते हैं। 

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