अलर्ट /कौन से मच्छर से होता है जीका वायरस, बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है असर

  • ये वायरस जिस मच्छर के काटने से फैलता है वो दिन में ही काटते है

Moneybhaskar.com

Jul 31,2019 12:08:14 PM IST

नई दिल्ली. जीका वायरस से जयपुर में करीब 22 लोग संक्रमित हो चुके हैं। वायरस की पुष्टि होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय से इसकी व्यापक रिपोर्ट मांगी है। भारत में पिछले साल जनवरी और फरवरी में पहली बार वायरस के अहमदाबाद में होने की बात सामने आई थी। 86 देशों में इसके होने की पुष्टि हो चुकी है। WHO के मुताबिक जीका वायरस एडीज मच्छर से फैलता है जो दिन के समय काटता है। संक्रमण फैलता का सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं और बच्चों को है। जानते हैं इस वायरस से जुड़ी 5 बड़ी बातें…

क्या है जीका वायरस

यह एडीज इजप्टी मच्छर से फैलता है। यह ज्यादातर दिन के समय (अलसुबह और दोपहर) काटता है। यह मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया और यलो फीवर का कारण भी बनता है। वायरस प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती से उसके बच्चे में भी फैलता है। या शारीरिक सम्बंध बनाने के दौरान एक से दूसरे इंसान में ट्रांसमिट होता है। संक्रमित इंसान का ब्लड ट्रांसफ्यूजन या ऑर्गेन ट्रांसप्लांटेशन होने पर भी इंफेक्शन फैल सकता है।

जीका में कई बार लक्षण नहीं दिखते है। बीमारी बढ़ने पर न्यूरोलॉजिकल और ऑर्गन फेलियर हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान नवजात में न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और ब्रेन डेमेज तक हो सकता है।

डॉ.रमेश मिश्रा, प्रोफेसर, माइक्रोबायलोजी विभाग, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर

युगांडा से हुई शुरुआत

जीका वायरस का पहला मामला युगांडा में 1947 में बंदरों में देखा गया था। 1952 में युगांडा और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया में पहली बार इंसान में इसे डिटेक्ट किया गया था। इसके बाद जीका वायरस से संक्रमण के मामले अफ्रीका, अमेरिका और एशिया में पाए गए। हालांकि 1960-1980 में इसके मामले इन देशों में कम ही देखे गए थे। 2007 में आइसलैंड ऑफ येप में यह पहली बार महामारी के रूप में फैला। 2013 में फ्रेंच पॉलीनेशिया और 2015 में ब्राजील में फैला था। ब्राजील में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए थे। 2015 में तैयार हुई एक रिपोर्ट के अनुसार यह अब तक करीब 86 देशों में फैल चुका है।

कब हो जाएं अलर्ट

जीका वायरस से संक्रमण के बाद लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते हैं। 3-14 दिन का समय लगता है। लक्षण बेहद माइल्ड दिखाई देते हैं। इसमें हल्का बुखार, स्किन पर चकत्ते, कंजक्टिवाइटिस, मांसपेशियाें और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द। ऐसा करीब 2-7 दिन तक हो सकता है।

जांच और इलाज

WHO के अनुसार लक्षण दिखने पर ब्लड, यूरिन या सीमेन टैस्ट से पुष्टि की जाती है। जीका वायरस के संक्रमण का फिलहाल कोई इलाज नहीं है। इलाज के तौर पर बुखार और दर्द को कम करने वाली दवाएं देने के साथ मरीज में लगातार पानी की पूर्ति की जाती है। गर्भवती महिलाओं को खास देखभाल की जरूरत होती है। क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चा अासानी से संक्रमित हो जाता है।

सावधानी ही बचाव

WHO के अनुसार जीका वायरस का सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं और बच्चों को है। बचाव के तौर पर हल्के रंग के कपड़े पहनें, खिड़कियों और दरवाजों को बंद रखें। मॉस्क्यूटो रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को आराम करने के दौरान मच्छरदानी का प्रयोग करना जरूरी है। जीका वायरस का वाहक मच्छर पानी में पनपता है इसलिए घर या आसपास पानी इकट‌्ठा है तो इसे हटाएं। गंदगी न जमा होने दें।

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