अलर्ट /भारत में हर साल हजारों लोगों को होता है चिकनगुनिया, पिछले कुछ सालों में चिकनगुनिया के मरीजों में हुई है बढ़ोतरी 

  • साल 2015 में 27553, 2016 में 64057, 2017 में 67769 मरीज चिकनगुनिया से प्रभावित पाए गए

Moneybhaskar.com

Aug 01,2019 01:57:35 PM IST

नई दिल्ली. बारिश का मौसम आने के साथ ही चिकनगुनिया का खतरा भी बढ़ गया है। चिकनगुनिया बुखार में होने वाला दर्द मरीज को बुखार ठीक होने के कई दिनों बाद तक परेशान करता है। चिकनगुनिया से 100-200 नहीं बल्कि हजारों लोग चिकनगुनिया बुखार का शिकार होते हैं। पिछले सालों में चिकनगुनिया से कई लोग प्रभावित हुए हैं। जानते हैं पिछले सालों के चिकनगुनिया के आंकड़े क्या कहते हैं...

अगर चिकनगुनिया के आंकड़ों की बात करें तो पिछले कुछ सालों में चिकनगुनिया के मरीजों में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि साल 2018 में चिकनगुनिया के मरीजों में कमी आई है। साल 2015 में 27553, 2016 में 64057, 2017 में 67769 मरीज चिकनगुनिया से प्रभावित पाए गए। वहीं साल 2018 में यह संख्या घटकर 47208 हो गई है। माना जा रहा है कि इस साल भी चिकनगुनिया के मरीजों में कमी हो सकती है।

जानिए डेंगू और चिकनगुनिया में अंतर

डेंगू में बुखार के साथ हाथ-पैर में दर्द रहता है। भूख कम लगने लगती है। जी मिचलाना और उल्टी करने की टेंडेंसी भी हो सकती है। डेंगू का बुखार बहुत तेज होता है और ठंड के साथ बुखार आता है। डेंगू के बुखार का एक खास लक्षण होता है सिर में और आंखों में तेज दर्द। डेंगू की सबसे अहम पहचान होती है कि मरीज को बुखार के साथ कमजोरी लगने लगती है क्योंकि उसके प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं। वहीं, चिकनगुनिया के लक्षण भी डेंगू से मिलते जुलते हैं, लेकिन इसमें प्लेटलेट्स काउंट कम नहीं होते हैं इसलिए मरीज को डेंगू की तुलना में कमजोरी कम लगती है। तेज बुखार के साथ जोड़ों में दर्द चिकनगुनिया का सामान्य लक्षण होता है। हालांकि इस बुखार में जोड़ो में दर्द होना सबसे बड़ी परेशानी होती है।

चिकनगुनिया के लक्षण :

  • एडिस मच्छर के काटने के दो-तीन दिन बाद ही चिकनगुनिया के लक्षण नजर आने लगते हैं।
  • इसमें तेज बुखार और जोड़ों में दर्द होता है। मुख्य रूप से हाथ व पैरों की अंगुलियों में ज्यादा दर्द होता है। हालांकि, एक हफ्ते बाद मरीज को आराम आना शुरू हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में जोड़ों का दर्द कई महीनों तक रहता है।
  • सिर में दर्द और मांसपेशियों में जकड़न महसूस होती है।
  • आंखों व दिल में परेशानी महसूस हो सकती है।
  • मरीज को न्यूरोलॉजिकल समस्या भी हो सकती है।
  • जी-मचलना जैसा महसूस होगा और भूख लगनी कम हो जाएगी।
  • इस बीमारी में शरीर पर जगह-जगह लाल रंग के दाने उभर आते हैं।
  • यह रोग एक हफ्ते में ही मरीज को इतना कमजोर कर देता है कि रोगी स्वयं से कुछ करने लायक नहीं रह जाता।
  • कुछ मरीज तेज रोशनी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं।

चिकनगुनिया के घरेलू इलाज

1. तुलसी : चिकनगुनिया बुखार में तुलसी के पत्ते बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। तुलसी की गुणकारी पत्तियां बुखार को कम कर, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करती हैं। आयुर्वेद में तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल कई प्रकार की दवाइयां बनाने में होता है। इन पत्तियों में एंटीमाइक्रोबियल गुण होता है, जो बीमारी से जल्द उबरने में मदद करता है।

2. लहसुन : जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में लहसुन का कोई मुकाबला नहीं है। इसे प्रभावित जगह पर जितना ज्यादा लगाया जाए, उतना अच्छा है। यह न सिर्फ दर्द से राहत दिलाता है, बल्कि सूजन को कम करके रक्त संचार को बेहतर करता है (4)।

3. गिलोय : गिलोय एक आयुर्वेदिक औषधी है। इसका पौधा विभिन्न बुखारों व बीमारियों में कारगर तरीके से काम करता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-आर्थराइटिस और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण पाए जाते हैं, जो चिकनगुनिया बुखार से राहत दिलाते हैं।

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