जानकारी /नौकरीपेशा लोगों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाती है ग्रेच्युटी

  • कम से कम 5 साल तक लगातार नौकरी करने पर मिलता है ग्रेच्युटी का लाभ
  • मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक 20 लाख रुपए तक मिलती है धनराशि

Moneybhaskar.com

Jan 16,2020 04:25:00 PM IST

नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों के लिए भविष्य के लिए निश्चित धनराशि को एकत्र करना आसान नहीं होता है। एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में अर्जित किए गए पूरे धन को खर्च कर देता है। इसको ध्यान में रखते हुए ही केंद्र सरकार ने 1972 में उपदान संदाय अधिनियम (Payment of Gratuity Act, 1972) पारित किया था। पारित होने के समय यह अधिनियम जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू होता था। अब इसका लाभ जम्मू कश्मीर के नौकरीपेशा लोगों को भी मिलता है।

इनको मिलता है ग्रेच्युटी का लाभ

उपदान संदाय अधिनियम-1972 के अनुसार नौकरीपेशा व्यक्तियों को रिटायरमेंट या बीमारी के कारण नौकरी नहीं कर पाने के कारण एक निश्चित धनराशि दी जाती है। यह धनराशि उस नियोजक की ओर से दी जाती है जिसके पास व्यक्ति नौकरी कर रहा था। यानी कोई व्यक्ति किसी रजिस्टर्ड कंपनी में कम से कम पांच साल तक नौकरी करता है और किसी कारण वह नौकरी जारी नहीं रखता है तो वह अपने नियोक्ता से ग्रेच्युटी के रूप में एक निश्चित धनराशि पाने का हकदार होगा।

भविष्य को सुरक्षित बनाना है मकसद

इस अधिनियम का उद्देश्य नौकरी कर रहे व्यक्तियों को भविष्य में एक निश्चित धनराशि प्रदान करना है, जिससे उन व्यक्तियों का भविष्य सुरक्षित हो सके तथा व्यक्ति का वृद्धावस्था बेहतर तरीके से बीत सके। यानी जब नौकरीपेशा व्यक्ति का शरीर काम ना कर रहा हो तथा कोई कार्य करने की स्थिति में ना हो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अपना जीवन गुजारने के लिए एक निश्चित धनराशि नियोजक की ओर से प्रदान की जाए। अधिनियम में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति ने किसी नियोजक के लिए अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया तथा अपने जीवन के लंबे समय को एक नियोजक के लिए किया व्यय कर दिया तो ऐसे व्यक्ति के भविष्य की जिम्मेदारी भी उस नियोजक की बनती है।

इन संगठनों पर लागू होता है उपदान संदाय अधिनियम

उपदान संदाय अधिनियम को 10 से अधिक कर्मचारियों की किसी भी संस्था या संगठन पर आवश्यक रूप से लागू किया है। ग्रेच्युटी का संदाय नहीं करने पर नियोजकों पर दंड लगाने का भी प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम सरकारी और निजी दोनों प्रकार की संस्थाओं पर लागू होता है। अधिनियम की धारा 2 में कहा गया है कि ऐसे सभी कारखाने, खदान, बागान, दुकान और सभी सरकारी- गैर सरकारी संस्थाएं जिनमें 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां यह अधिनियम लागू होगा।

20 लाख रुपए तक होगी ग्रेच्युटी की राशि

उपदान संदाय अधिनियम के पुराने प्रावधानों के मुताबिक ग्रेच्युटी 10 लाख रुपए तक थी। लेकिन 2018 में संशोधन के बाद इस सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दिया गया है। अब मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक 20 लाख रुपए तक ग्रेच्युटी की रकम हो सकती है। अधिनियम की धारा 4 के तहत जिन कर्मचारियों ने 5 वर्ष से अधिक अवधि तक निरंतर सेवा दी है, उसके उपरांत पदत्याग, सेवानिवृत्ति या फिर निःशक्तता के कारण कार्य करने में असमर्थ हैं या फिर उनकी मृत्यु हो गई है तो ऐसी स्थिति में कर्मचारी को ग्रेज्युटी का संदाय किया जाएगा। जिन व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है उनके उपदान का संदाय उनके वारिसों को किया जाएगा।

ऐसे होती है ग्रेच्युटी की गणना

उपदान संदाय अधिनियम के अनुसार ग्रेच्युटी की गणना सेवा के अंतिम माह की मूल सैलरी के पंद्रह दिवस की सैलरी को औसत मान कर कार्य के वर्षों से गुणा कर की जाएगी। ग्रेच्युटी की गणना (15 X पिछली सैलरी X काम करने की अवधि) भाग 26 फॉर्मूला से होती है। पिछली सैलरी में बेसिक सैलरी, महंगा भत्ता और बिक्री पर मिलने वाला कमीशन भी शामिल है। मान लीजिए किसी व्यक्ति का पिछला वेतन 50,000 रुपए महीना है। उसने किसी कंपनी में 15 साल 8 महीने काम किया। ऐसे में उसकी ग्रेच्युटी (15 X 50,000 X 16)/26 = 4.61 लाख रुपए होगी। इस मामले में काम करने के दिन 15 साल 8 महीने होने के कारण इसे 16 लिया गया है। अगर काम करने के दिन 15 साल 5 महीने होते तो इसे 15 साल ही माना जाता।

30 दिन के भीतर करना होता है आवेदन

समयावधि अधिनियम के तहत ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए नियोजक को 30 दिन का समय दिया गया है। कर्मचारी जिस दिन से ग्रेज्युटी के भुगतान के लिए आवेदन जमा करता है उससे 30 दिन की अवधि के भीतर नियोजक को भुगतान कर देना चाहिए। यदि वह इस अवधि में ग्रेज्युटी का भुगतान नहीं कर पाता है तो उसे देरी के लिए कर्मचारी को एक निश्चित दर से ब्याद देना होगा। यदि कोई कर्मचारी ग्रेज्युटी का भुगतान नहीं करता है या भुगतान से बचता है तो उसे 6 माह के कारावास का दंड दिया जा सकता है।

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