उम्मीद /तेज होगी बीमारियों को हराने की जंग, इस साल बाजार में आएंगे डेंगू की दवा और वैक्सीन

  • देश में 9 साल में डेंगू के सवा लाख मरीज बढ़े हैं

Moneybhaskar.com

Jul 31,2019 11:44:00 AM IST

नई दिल्ली. मेडिकल के क्षेत्र में भी 2019 नई उम्मीदें लेकर आ रहा है। उम्मीद है कि डेंगू की वैक्सीन और कारगर दवा बाजार में आ जाएगी। कैंसर ट्रीटमेंट के लिए 500 करोड़ की थेरेपी मशीन भी इस साल आ सकती है। सुपर कंप्यूटर की मदद से इलाज में तेजी आएगी।

और तेज होगी बीमारियों को हराने की जंग

1. डेंगू का वैक्सीन और दवा बाजार में आ सकती है

सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंस (सीसीआरएएस) ने 7 औषधीय पौधों से डेंगू की दवा तैयार की है। फ्रांसीसी कंपनी सनोफी ने डेंगू वैक्सीन भी तैयार कर ली है। ये दोनों इस साल बाजार में होंगी। देश में 9 साल में डेंगू के सवा लाख मरीज बढ़े हैं।

2. एचआईवी की वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल होगा

एचआईवी से बचाने वाली वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल 2019 में शुरू हो जाएगा। अब तक जानवरों पर वैक्सीन का ट्रायल किया गया है, जो सफल रहा। अब अगर अमेरिका में जून-जुलाई में होने वाला ह्यूमन ट्रायल सफल होता है तो पहला एचआईवी वैक्सीन विकसित हो सकेगा।

3. लैब में तैयार होने वाला अहिंसा मीट आ सकता है

लैब में तैयार किया जाने वाला मीट इस साल भारतीय बाजार में आ सकता है। इसे लैब में कोशिका विकसित कर तैयार किया जाता है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा है कि 60% लोग अहिंसा मीट के लिए तैयार हैं। अभी इसकी अमेरिका, इजरायल में अच्छी बिक्री है।

4. देश में वैक्सीन प्रोग्राम में जुड़ेगी एचपीवी वैक्सीन

बच्चेदानी के मुंह के कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। 9-13 वर्ष की बच्चियों का टीकाकरण होगा। भारत में स्तन कैंसर के बाद सबसे ज्यादा महिलाएं बच्चेदानी के मुंह के कैंसर से ही पीड़ित हैं।

5. कैंसर इलाज के लिए 500 करोड़ की थेरेपी मशीन

कैंसर मरीजों के इलाज के लिए देश में करीब 500 करोड़ रु. की प्रोटोन थेरेपी मशीन आ जाएगी। चेन्नई के इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में लगने वाली इस मशीन से कैंसर सेल खत्म करने के लिए टारगेटेड थेरेपी दी जाएगी। इससे हेल्दी सेल्स को नुकसान नहीं होगा।

6. सुपर कंप्यूटर से बीमारियों का इलाज आसान हो सकेगा

मानव दिमाग की तरह काम करने वाला सुपर कंप्यूटर स्पिननेकर मेडिकल इस्तेमाल में आएगाा। इसकी मदद से डॉक्टरों के लिए पार्किंसन, अल्जाइमर जैसी बीमारियों को डिटेक्ट करना आसान होगा। अब तक ये बीमारियां 3 से 5 साल में डिटेक्ट हो पाती थीं।

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