तकनीक /असल जिंदगी में न हो 'गुड न्यूज' जैसा झोल, इंदिरा आईवीएफ क्लीनिक ने शुरू की आरआई विटनेस तकनीक

  • यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि उपचार के दौरान पेशेंट्स के सैंपल पूरी तरह सुरक्षित रहें

Moneybhaskar.com

Jan 20,2020 05:24:00 PM IST

नई दिल्‍ली. हाल ही में अक्षय कुमार और करीना कपूर की एक फिल्म रिलीज हुई है 'गुड न्यूज’। इसमें इन विट्रो फर्टीलाइजेशन के दौरान सैंपल में हेरफेर हो जाने की समस्या को दिखाया गया है। हालांकि हालांकि एम्‍ब्रयोलॉजिस्‍ट्स (भ्रूण विज्ञानी) इसी बात के लिए विख्‍यात होते हैं कि उनसे कोई गलती नहीं हो सकती, लेकिन फिर भी मानवीय चूक होने की थोड़ी संभावना तो रहती ही है। इसी बात को ध्‍यान में रखते हुए मानवीय गलती की इस आंशिक संभावना को भी दूर करने के लिए देश की प्रमुख फर्टिलिटी चेन में शामिल इंदिरा आईवीएफ (INDIRA IVF) ने इलेक्‍ट्रॉनिक विटनेसिंग सिस्‍टम को अपनाया है। यह तकनीक पेशेंट्स में इस बात को लेकर आत्‍मविश्‍वास सुनिश्चित करती है कि उपचार के दौरान उनके सैंपल पूरी तरह सुरक्षित हैं।

अमेरिका में हुआ सैंपल बदलने का मामला

हाल ही में अमेरिका में एक ऐसा मामला सामने आया कि आईवीएफ तकनीक की मदद से बच्‍चा चाहने वाले एक एशियाई दंपति के सैंपल कैलिफोर्निया के एक फर्टिलिटी क्‍लीनिक में बदल गए और महिला किसी दूसरे के सैंपल से गर्भवती हो गई। महिला ने दो ऐसे बच्‍चों को जन्‍म दिया जो एशियाई नहीं हैं। इसके बाद इस दंपति ने उस क्‍लीनिक के खिलाफ केस भी दायर किया।

बिना गलती के पूरी हो सकेगी प्रक्रिया

इलेक्‍ट्रॉनिक विटनेसिंग टेक्निक में रेडियोफ्रिक्‍वेंसी आईडी टेक्‍नोलॉजी का उपयोग होता है जो इस बात को सुनिश्चित करती है कि आईवीएफ प्रोसेस के दौरान उपयोग किए गए सैंपल पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसकी मदद से कंपनियां बिना किसी गलती के उपचार पर फोकस कर सकती हैं। यह तकनीक इस बात पर नजर रखती है कि उपचार की यह प्रक्रिया कितनी लंबी चलती है, सैंपल्‍स को इन्‍क्‍यूबेटर्स से बाहर कितने समय रखा जा रहा है और सैंपल्‍स को कौन एम्‍ब्रयोलॉजिस्‍ट हैंडल कर रहा है।

ऐसे काम करती है तकनीक

इलेक्‍ट्रॉनिक विटनेसिंग इस बात को सुनिश्चित करती है कि आईवीएफ की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है। यदि हर कपल का आरएफआईडी टैग मैच नहीं करता है तो मशीन अपने आप बंद हो जाती है। यह तकनीक आईवीएफ उपचार के आरंभ से ही काम करना शुरू करती है जब पेशेंट को एक आरआई विटनेस आईडी कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें उनकी पहचान छिपी होती है। स्‍पर्म के जमने, अंडों और एम्‍ब्रयोज और आखिर में एम्‍ब्रयो के ट्रांसफर के दौरान भी यह तकनीक उस कपल की पहचान बताती रहती है।

दंपतियों को क्वालिटी केयर और ट्रीटमेंट देने का दावा

इंदिरा आईवीएफ के लैब डायरेक्‍टर नितिज मुरदिया ने कहा, हम इलेक्‍ट्रॉनिक विटनेसिंग को अपना रहे हैं और यह प्रक्रिया के दौरान मानवीय हस्‍तक्षेप को कम करने, समय बचाने और एम्‍ब्रयोलॉजी लैब की गुणवत्‍ता को सुधारने में मदद करती है। क्लीनिक के मेडिकल डायरेक्‍टर डॉ. क्षितिज मुरदिया ने कहा, क्लीनिक का मकसद जितना संभव हो डिजिटाइजेशन के जरिए सर्वश्रेष्‍ठ तकनीक के माध्‍यम से दंपतियों को क्‍वालिटी केयर और क्‍वालिटी ट्रीटमेंट प्रदान करता है।

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