अलर्ट /बारिश के मौसम में मच्छरों से रहे सावधान

  • इस मौसम में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां यानी मलेरिया, जीका और डेंगू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

Moneybhaskar.com

Aug 01,2019 02:49:00 PM IST

नई दिल्ली. बारिश के मौसम में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां यानी मलेरिया, जीका और डेंगू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन दोनों ही बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो जाता है। इस तरह की बीमारी का इलाज होने के बाद भी इससे हुई कमजोरी से उबरने में काफी समय लग जाता है। इसलिए सबसे बेहतर यही है कि आप मच्छरों से खुद का बचाव करें ताकि इन बीमारियों की चपेट में न आएं।

पानी जमा न होने दें-

सबसे अहम बात यह है कि अपने आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। बारिश में कई जगह पानी इकट्ठा हो जाता है जिससे मच्छरों को पनपने का मौका मिलता है। कूलर आदि चीजों को भी साफ करते रहें ताकि मच्छर न बढ़े।

करें मॉस्किटो रेपलेंट का इस्तेमाल-

अंदर हो या बाहर मच्छरों का आतंक हर जगह रहता है। इसलिए चाहे आप घर में रहें या बाहर मच्छरों से सावधान रहना ज्यादा जरूरी है। ख़ासकर घर में अगर बचचें हैं तो सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। इसके साथ ही मॉस्किटो रेपलेंट का इस्तेमाल करने से मच्छरों से बचा जा सकता है।

पूरे कपड़े पहने-

बरसात के समय नमी के कारण मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। खुले शरीर होने से मच्छर ज्यादा काटते हैं जिनसे बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए उनसे बचने के लिए पूरी बांह की शर्ट व नीचे भी फुल लेंथ पैंट्स पहनें ताकि मच्छरों से बचाव हो सके।

नोट: जीका वायरस से ग्रसित इलाके में ट्रैवल करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही जीका संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखनी जाइए। किसी भी लक्षण की शंका होने पर इलाज में देरी न करें क्‍योंकि मरीज की हालत बिगाड़ सकती है जो उसके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.