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संकट /कश्मीर में फलों और ड्राईफ्रूट का कारोबार पड़ा मंद, हो रहा करोड़ों का नुकसान

  • किसानों को नहीं मिल रहे अपने उत्पादों के लिए खरीदार
  • औने-पौने दाम में भी फल और ड्राई फ्रूट बेचने को तैयार हैं किसान

Moneybhaskar.com

Sep 02,2019 01:41:02 PM IST

नई दिल्ली. कश्मीर में सुरक्षा बहाली के लिए सरकार ने जो इंतजाम किए हैं उनका असर राज्य के फलों और ड्राईफ्रूट के व्यापार पर पड़ रहा है। हालत इस कदर खराब हो रहे हैं कि राज्य के प्रशासन को नेशनल एग्रीकल्चरल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) की मदद लेनी पड़ रही है। स्थानीय किसानों और व्यापारियों के मुताबिक, फलों और सूखे मेवे की खरीदारी में बड़ी गिरावट हुई है, जिससे उन्हें करोड़ों का नुकसान हो रहा है।

लाखों टन फ्रूट व ड्राई फ्रूट का होता है उत्पादन

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाले कुल अखरोट में से 91 फीसदी कश्मीर से आता है। बादाम उत्पादन में कश्मीर की हिस्सेदारी 90 फीसदी, सेब में 70 फीसदी, चेरी और केसर में 90 फीसदी हिस्सेदारी है। इनकी सालाना बिक्री तकरीबन 7000 करोड़ रुपए की होती है। हर साल कुल पैदावार तकरीबन 23.535 लाख टन होता है। इसमें से सेब, चेरी और नाशपाति की हिस्सेदारी 20.35 लाख टन होती है, जबकि ड्राई फ्रूट की हिस्सेदारी 2.80 लाख टन रुपए रहती है। घाटी की तकरीबन 3.3 लाख हेक्टेयर जमीन को फल व ड्राई फ्रूट बेचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

नहीं मिल रहे खरीदार

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, दक्षिण कश्मीर के सोपोर में एक सेब किसान बताया कि संवाद का माध्यम न होना उनकी सबसे बड़ी समस्या है। लैंडलाइन कनेक्शन नहीं होने से वे अन्य राज्यों के होलसेल डीलरों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह से कोई कश्मीर आने के लिए तैयार नहीं है। किसान अपने उत्पाद औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर हैं, सरकार उन्हें ट्रक भी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उनके उत्पादों का कोई खरीदारी नहीं है।

400 रुपए तक गिर गई सेब की कीमत

सेब का 17-18 किलो का एक बॉक्स 700-850 रुपए में बिकता है। शोपियां में एक अन्य सेब व्यापारी शाहनवाज ने बताया, 'पिछले साल मैंने 1200-1300 बॉक्स बेच लिए थे। हालांकि, इस साल मजदूर न होने और पैकेजिंग की समस्या से दाम गिरकर 450-500 रुपए प्रति बॉक्स पर आ गए हैं। हममें से कुछ लोगों ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों से संपर्क किया है और उनसे कहा है कि वे बाजार के बजाय हमारे खेतों से माल लोड करें।' एक आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, घाटी में बागबानी उद्योग करीब 7,000 करोड़ रुपए का है, जिसमें सेब की पैदावार सबसे ज्यादा होती है। 2016-17 में बागवानी क्षेत्र ने सेब के बगीचे और अन्य के तहत 7.71 करोड़ रुपए का रोजगार दिया।

नाफेड बना रहा किसानों की मदद की योजना

जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मालिक ने पिछले हफ्ते कहा था कि NAFED इस क्षेत्र में सेब उत्पादकों की मदद करने के प्लान पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘वह एक योजना की घोषणा करेगा, जहां सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बाजार मूल्य से 10 रुपए अधिक होगा।’ राज्यपाल ने कहा, ‘NAFED यहां से 5,500 करोड़ रुपए का सेब भी खरीदेगा, जो कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत से अधिक होगा। हम पूरी कोशिश करेंगे कि किसान की कमाई पर कोई बुरा असर न पड़े।’

इस साल हुए ज्यादा फल ट्रांसफर

जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने बताया, ‘फ्रूट और ड्राई-फ्रूट के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रक उपलब्ध हैं। इस साल 1.20 लाख मीट्रिक टन फल ट्रांसपोर्ट हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 89,000 मीट्रिक टन था।’ फलों के लिए ट्रांसपोर्ट अरेजमेंट पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक नोट के मुताबिक, ‘आवश्यक आपूर्ति करने वाले लगभग 2000 ट्रक कश्मीर पहुंच रहे हैं, जिनका फ्रूट क्रॉप्स के ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकारी आकलन के अनुसार, 15 सितंबर 2019 से शुरू होने वाले पीक सीजन के दौरान रोजाना लगभग 1100-1200 ट्रकों की जरूरत होगी।’

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