रिसर्च /मरीजों के मोजे को सूंघकर लेब्राडोर नस्ल के कुत्ते करेंगे मलेरिया की पहचान

  • कई देश मलेरिया को पूरी तरह खत्म करने में कामयाब हुए हैं

Moneybhaskar.com

Jul 30,2019 01:12:06 PM IST

नई दिल्ली. ब्रिटेन और गाम्बिया के वैज्ञानिकों का कहना है कि पहली बार उन्होंने एक ऐसा तरीका खोजा है जिससे कुत्ते मलेरिया जैसी बीमारी का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कुत्तों को संक्रमित व्यक्ति के कपड़े सूंघकर मलेरिया का पता लगाने के लिए ट्रेन किया जा रहा है। दरअसल, ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी ने लेब्राडोर नस्ल के कुत्तों को मलेरिया डिटेक्ट करने की ट्रेनिंग दी है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि जानवरों की मदद मलेरिया जैसी बीमारी को रोकने और उसके निवारण में ली जा सकती है। अध्ययन में ये बताया जा चुका है कि जब किसी व्यक्ति को मलेरिया होता है तो उसके शरीर की गंध थोड़ी अलग हो जाती है। ऐसे में कुत्तों की मदद से व्यक्ति के शरीर में मौजूद मलेरिया की पहचान की जा सकती है।

इससे पहले 2015 में इटली के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि जर्मन शेफर्ड नस्ल के कुत्ते यूरीन सैम्पल को सूंघकर मरीज में प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने में सक्षम हैं। इसमें 90% सफलता मिली थी। मौजूदा रिसर्च को अमेरिकन सोसायटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाइजीन की वार्षिक बैठक में पेश किया गया था। रिसर्च प्रोग्राम में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन भी शामिल था।

जांच में 70% नतीजे सही

शोध के दौरान गैम्बिया स्कूल के बच्चों में मलेरिया के लक्षण दिखने पर उन्हें रातभर नायलॉन के मोजे पहनने और ब्लड सैम्पल देने को कहा गया। कुल 175 सैम्पल लिए गए। 145 स्वस्थ बच्चों के मोजों के सैम्पल भी लिए गए। ये सैम्पल लंदन भेजे गए। यहां प्रशिक्षित किए गए दो कुत्तों (लेब्राडोर) ने मोजों को सूंघकर 30 बच्चों में मलेरिया होने की पुष्टि की। जांच में 70% नतीजों को सही पाया गया है।

मोजों के अलावा मरीजों की दूसरी चीजों को भी शोध में शामिल किया जाना है। यह प्रयोग दूसरे देशों में अलग-अलग तरह के मलेरिया से पीड़ित मरीजों पर भी किया जाएगा। कई देश मलेरिया को पूरी तरह खत्म करने में कामयाब हुए हैं। हाल ही में श्रीलंका मलेरिया मुक्त देश बना है।

डॉ. स्टीवन लिंडसे, रिसर्चर और वैज्ञानिक, डरहम यूनिवर्सिटी, लंदन

आसान तरीका तो तलाशना ही होगा

डॉ. स्टीवन कहते हैं कुछ लोग मलेरिया होने पर बहुत जल्द बीमार पड़ जाते हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी होते हैं जिनमें लक्षण साफतौर पर नहीं दिखते। अगर एक हजार लोगों में एक व्यक्ति मलेरिया परजीवी से संक्रमित है तो पहचानने के लिए सभी लोगों का ब्लड टेस्ट करना पड़ेगा। ऐसे में आसान तरीका ईजाद करना जरूरी है।

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