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फैसला /मरीज को 10 लाख रुपए मुआवजा दे अपोलो अस्पताल, दिल्ली कंज्यूमर कमीशन ने दिया आदेश

  • कमीशन ने कहा कि 'मानवीय स्पर्श’ होना अस्पतालों की ड्यूटी है
  • अस्पतालों को अपनी रोजमर्रा के कामकाज में इस मानवीय स्पर्श को शामिल करना चाहिए
  • अस्पताल की लापरवाही से 2007 में हो गई थी मरीज की मृत्यु

Moneybhaskar.com

Jul 26,2019 03:35:00 PM IST

नई दिल्ली. दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने अपोलो अस्पताल को आदेश दिया है कि वह अपने एक मरीज के पिता को 10 लाख रुपए का मुआवजा दे। 2007 में अस्पताल की लापरवाही के चलते 24 वर्षीय इस मरीज की मृत्यु हो गई थी। कमीशन ने कहा कि 'मानवीय स्पर्श’ होना अस्पतालों की ड्यूटी है। अस्पतालों को अपनी रोजमर्रा के कामकाज में इस मानवीय स्पर्श को शामिल करना चाहिए।

मानसिक कष्ट देने के लिए देना होगा मुआवजा

एजेंसी की खबर के मुताबिक 2007 में राज करण सिंह की 24 वर्षीय बेटी की मृत्यु अस्पताल की लापरवाही के कारण हो गई थी। कमीशन ने अस्पताल की लापरवाही के कारण राज करण सिंह को हुए कष्ट, मानसिक पीड़ा और यातना के लिए यह मुआवजा देने का आदेश दिया है। कमीशन ने कहा कि, यह मुआवजा अस्पतालों के रवैए में 'बेहतर बदलाव’ ला सकता है, जिससे वे 'इंसानों को इंसानों की तरह’ सेवा प्रदान कर सकें। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल को आदेश देते हुए कमीशन के सदस्य अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि, मानवीय स्पर्श जरूरी है और यह अस्पतालों का कोड ऑफ कंडक्ट भी है। यह उनकी जिम्मेदारी है और इसका पालन होना चाहिए।

डायलिसिस के लिए अस्पताल में भर्ती थी मरीज

राज करण सिंह द्वारा फाइल की गई शिकायत के मुताबिक, अपोलो अस्पताल में 2005 में उनकी बेटी का डायलिसिस चल रहा था। इस दौरान एक अनहाइजीनिक डायलेटर के इस्तेमाल के चलते उनकी बेटी की तबीयत बिगड़ गई और वह कोमा में चली गई। कोमा में जाने के बाद वह 47 दिनों तक आईसीयू में रही। यहां भी अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टरों की लगातार लापरवाही की वजह से 2007 में उसकी मृत्यु हो गई।

जिला फाेरम के आदेश को दी चुनौती

2012 में जिला फाेरम ने उन्हें 1 लाख रुपए का मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया था, लेकिन सिंह इससे संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने स्टेट कमीशन में इस निर्णय को चुनौती दी। राज्य कमीशन ने डिस्ट्रिक्ट फोरम द्वारा तय किए गए मुआवजे को बेहद कम बताते हुए इसमें बदलाव किया। कमीशन ने यह फैसला मरीज की उम्र और परिवार को हुए कष्ट को ध्यान में रखते हुए दिया।

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