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आर्टिकल 370-एक महीना /कश्मीर में डंप पड़े हैं 100 करोड़ रुपए के कारपेट, 300 रुपए में बिक रही 900 रुपए वाली सेब की पेटी

  • अनुच्छेद 370 हटने के एक महीने में कश्मीर के कारोबारियों को हुआ करोड़ों रुपए का नुकसान
  • कश्मीर के सभी उद्योग इस समय ठप पड़े हैं, करोड़ों रुपए का माल नहीं आ पा रहा दिल्ली

Pratibha Singh

Sep 05,2019 05:37:15 PM IST

नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटे एक महीना हो चुका है। इस एक महीने में जम्मू-कश्मीर का कारोबार पूरी तरह ठप पड़ गया है। कश्मीर से माल देश के दूसरे हिस्सों तक न पहुंच पाने के कारण कारोबारियों को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। कश्मीर की बड़ी इंडस्ट्रीज में से एक कारपेट इंडस्ट्री का तकरीबन 100 करोड़ रुपए का माल कश्मीर में डंप पड़ा है। 800 से 900 रुपए पेटी की कीमत वाले सेब को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इसकी कीमत 200 से 300 रुपए पेटी पर आ गई है।

एक यूनिट से होता था 2-3 करोड़ रुपए का कारोबार

कश्मीर के पुलवामा में कारपेट का काम करने वाले मोहम्मद आजम ने मनी भास्कर को बताया कि अगस्त से पहले तक उनका कारोबार महीने में 2 से 3 करोड़ रुपए का हो जाता था, लेकिन एक महीने से एक रुपए का भी कारोबार नहीं हुआ है। पूरे पुलवामा में कारपेट मैन्युफैक्चरिंग की तकरीबन 300 यूनिट हैं। इन सभी यूनिट्स का मासिक कारोबार 2-4 करोड़ रुपए का था लेकिन फिलहाल सभी ठप पड़ी हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने यूनिट्स को चालू करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बंद करा दिया गया। कारोबार ठप पड़े होने की सूरत में कारपेट यूनिट का बिल, बैंक की किस्त दे पाना मुश्किल है। उन्हें महीने में 6.5 लाख रुपए इन दो चीजों में चुकाने पड़ते हैं। ऐसे में वे इलाहाबाद के पास भदोई में अपने घर लौट आए हैं। आजम के मुताबिक, कारपेट कारोबार में लगे सभी कारीगरों में से 90 फीसदी कश्मीर के बाहर के लोग हैं, जिनमें से अधिकतर लोग लौट गए हैं।

100 करोड़ के कारपेट घाटी में डंप पड़े हैं

देश के कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन सिद्ध नाथ सिंह ने मनी भास्कर को बताया कि कश्मीर में तकरीबन 25 से 40 हजार कारपेट कारीगर हैं। वहां से सालाना 300 से 400 करोड़ रुपए का कारोबार होता है, लेकिन जब से कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया गया है, तब से कारोबार ठप पड़ गया है। कश्मीर में कर्फ्यू लगा है, लोगों के पास कच्चा माल नहीं है, ऐसे में लोग कारपेट तैयार ही नहीं कर पा रहे हैं। लोगों ने पहले से ही जो कारपेट बना रखे थे, उन्हें भी बाजार में नहीं उतार पा रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि कश्मीर में 80 से 100 करोड़ रुपए के कालीन डंप पड़े हैं। ट्रासंपोर्ट के साधनों की कमी के चलते कश्मीरी कारीगर अपना माल दिल्ली लेकर नहीं आ पा रहे हैं, जहां से इस माल को आगे एक्सपोर्ट किया जाता है।

सेब का कारोबार भी ठप

कश्मीर में सबसे ज्यादा सेब उत्पादन करने वाले शोपियां में सेब का कारोबार करने वाले मुख्तयार ने बताया कि सेब की फसलें बेकार हो रही हैं। उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे। सेबों को कश्मीर से बाहर नहीं लेकर जा सकते हैं, इसलिए उनका अब तक एक करोड़ रुपए का नुकसान हो गया है। उनका ट्रांसपोर्ट का बिजनेस भी है, जिसमें 20 लाख का नुकसान हुआ है। पहले गाड़ी वाले 50 से 60 रुपए प्रति पेटी किराया लेते थे, अब ये किराया बढ़कर 150 रुपए प्रति पेटी तक पहुंच गया है। इसके बाद भी उन्हें गाड़ी वाले नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि कारोबार करने के लिए दिल्ली से मंडी वालों ने पैसा लगाया था, उनका भी नुकसान हो गया। सेबों का रेट भी बहुत डाउन चल रहा है। अब तक बाबोश सेब की एक पेटी 800 से 900 रुपए के बीच बिकती थी, अब वह 150 रुपए, 200 या ज्यादा से ज्यादा 300 रुपए के दाम में जा रही है। घाटी में बिगड़ते हालातों के बीच एक रात वे चुपके से दिल्ली निकल आए थे। फिलहाल वे ऊधमपुर में हैं, इसलिए उनसे फोन पर बात हो पा रही है।

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