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जानिए, शेयर मार्केट में क्‍यों मचा कोहराम और अब तक की 5 बड़ी गिरावट

शेयर मार्केट में 24 अगस्‍त, 2015 को आई यह गिरावट बीएसई के इतिहास में तीसरी सबसे बड़ी और तेज गिरावट के तौर पर दर्ज की गई।

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नई दिल्‍ली। चीन की मंदी का असर दुनिया भर के शेयर मार्केट में देखने को मिला। ग्‍लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों ने घरेलू शेयर मार्केट में कोहराम मचा दिया। जिससे घरेलू शेयर मार्केट तेज गिरावट के साथ खुले और भारी गिरावट के साथ बंद हुए। मार्केट में आई भारी गिरावट की वजह से निवेशकों के 7 लाख करोड़ रुपए डूब गए। वहीं, सेंसेक्‍स में 1625 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। शेयर मार्केट में 24 अगस्‍त, 2015 को आई यह गिरावट बीएसई के इतिहास में तीसरी सबसे बड़ी और तेज गिरावट के तौर पर दर्ज की गई। इससे पहले 21 जनवरी, 2008 को शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी और सेंसेक्‍स 2,062.20 अंक टूट गया उसके अगले दिन 22 जनवरी, 2008 को सेंसेक्‍स में 2272 अंकों की सबसे बड़ी गिरावट आई थी। इसी तरह 24 अक्‍टूबर, 2008 को सेंसेक्‍स 1,204.88 प्वाइंट टूटा और 10 अक्टूबर, 2008 को 1,088.60 अंकों की गिरावट आई थी।  
 
गिरावट की वजह
चीन के बाजार में सुस्ती की आशंका को देखते हुए विदेशी निवेशक उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से अपना पैसा निकाल रहे हैं। यह ट्रेंड भारत में भी देखने को मिल रहा है। दरअसल अंतरराष्‍ट्रीय मार्केट से मिले नेगेटिव सेंटिमेंट्स शेयर मार्केट में इतनी बड़ी गिरावट की मुख्‍य वजह है। चीन के शेयर बाजार में भी 8 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आई है। जबकि गिरावट के साथ ही शंघाई कंपोजिट ने 2015 की पूरी बढ़त गंवा दी। इससे पहले चीन की सरकार ने 547 अरब डॉलर के पेंशन फंड को स्टॉक मार्केट में लगाने की मंजूरी दी थी। इसके बावजूद चीन के शेयर मार्केट में गिरावट नहीं थमी। ऐसे में आशंका बन गई है कि चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट के संकेत दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर मंदी का दबाव बना सकते हैं।
 
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एक दिन में कब कितना टूटा सेंसेक्स
 
जनवरी 22, 2008: 2,272.93 अंक
जनवरी 21, 2008: 2,062.20 अंक
अगस्त 24, 2015: 1625 अंक
अक्टूबर 24, 2008: 1,204.88 अंक
अक्टूबर 10, 2008: 1,088.60 अंक
मार्च 17, 2008: 1,022.25 अंक
फरवरी 11, 2008:1,007.15 अंक
अक्टूबर 27, 2008: 1,003.68 अंक
अक्टूबर 8, 2008: 954.48 अंक
जुलाई 6, 2009: 953.61 अंक
अगस्त 24: 1625 अंक
 
बीएसई में पांच हजार कंपनियां हैं लिस्टेड
 
बीएसई में पांच हजार से अधिक कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। इस लिहाज से ये दुनिया का सबसे बड़ा एक्सचेंज है। जबकि जर्मनी स्थित ड्यूश बोर्स और सिंगापुर एक्सचेंज बीएसई के स्ट्रेटेजिक पार्टनर के रूप में जुड़े हुए हैं। पिछले 139 सालों से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारतीय बाजार की पूंजी व्यवस्था का निर्धारण कर रहा है।
 
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कब हुई बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज की शुरुआत
 
दरअसल एशिया के इस सबसे पुराने एक्सचेंज की स्थापना का श्रेय उन चार गुजराती और एक पारसी शेयर ब्रोकर्स को जाता है। जो कि साल 1850 के आसपास अपने कारोबार के सिलसिले में मुंबई (तब बॉम्बे) के टाउन हॉल के सामने बरगद के एक पेड़ के नीचे बैठक किया करते थे। इन ब्रोकर्स की संख्या साल-दर-साल लगातार बढ़ती चली गई। साल 1875 में इन्होंने अपना 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन’ बना लिया। साथ ही दलाल स्ट्रीट पर एक ऑफिस भी खरीद लिया। जिसे आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज कहा जाता है।
 
बीएसई से जुड़ी हुई कुछ अन्‍य जानकारी
 
25 जनवरी,  2001 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने डॉलेक्स-30 लॉन्च किया था। इसे बीएसई का डॉलर लिंक्ड वर्जन कहा जाता है। इसके अलावा बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज दुनिया का 11वां सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज मार्केट है। साथ ही 1.32 ट्रिलियन की कुल बाजार पूंजी को बीएसई संचालित करता है। जबकि नंबर ऑफ ट्रांजेक्शन्स के हिसाब से बीएसई दुनिया का पांचवां बड़ा एक्सचेंज है। यह खिताब बीएसई को बाजार पूंजी के आधार पर मिला है।
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