जानिए क्या होता है आईपीओ, इसमें इन्वेस्ट करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

Do You Know Team

Oct 22,2015 04:05:00 PM IST
नई दिल्‍ली। स्टॉक मार्केट में इन्‍वेस्ट करने के इच्छुक लोगों के लिए कई अच्छे मौके मिलने जा रहे हैं। कई कंपनियां मार्केट में आईपीओ लाने की तैयारी कर रही हैं। सेबी के पास 28 कंपनियों ने आईपीओ लाने के लिए आवेदन किया है। कॉफी डे एंटरप्राइजेज पहले ही 1150 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने के लिए अपना आईपीओ स्टॉक मार्केट में उतार चुकी है, वहीं देश की सबसे बड़ी एविएशन कंपनी इंडिगो की भी आईपीओ से 2500 करोड़ रुपए जुटाने की योजना है। यदि आप इन्‍वेस्‍ट करने के इच्‍छुक हैं तो इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।
क्‍या होता है आईपीओ
आईपीओ का मतलब इनीशियल पब्लिक ऑफर्स होता है। इसके लिए कंपनियां बकायदा स्टॉक मार्केट में खुद को लिस्ट कराकर अपने स्टॉक्स इन्‍वेस्‍टर्स को बेचने का प्रस्ताव लाती हैं। स्टॉक मार्केट में लिस्टेड होने के लिए कंपनी को अपने बारे में तमाम जानकारियां सार्वजनिक करनी होती हैं। यदि हम इसे आसान शब्‍दों में कहें तो कंपनी आईपीओ के माध्यम से अपने स्टॉक्स जारी करती है। दरअसल आईपीओ के जरिए कंपनियों के प्रमोटर पूंजी जुटाने के लिए अपनी कंपनी की कुछ हिस्‍सेदारी को बेचते हैं।
क्‍या होता है एफपीओ
दरअसल कंपनियां अपने शेयर पहली बार मार्केट में आईपीओ के जरिए बेचती हैं, लेकिन जब कोई कंपनी पहले से ही मार्केट में लिस्टेड होती है तो वह एफपीओ जारी कर अपने स्टॉक बेचती है। आप इसके जरिए किसी कंपनी के स्टॉक खरीद सकते हैं। हालांकि इसमें किसी कंपनी के बहुत मामूली 100 या 200 शेयर ही खरीदे जा सकते हैं।
क्‍या होता है ओएफएस

ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस लिस्‍टेड कंपनियों के प्रमोटरों द्वारा अपनी हिस्सेदारी को कम करने का एक नया तरीका है। सेबी के नियमों के मुताबिक जो भी कंपनी ओएफएस जारी करना चाहती है, उसे इश्यू के दो दिन पहले इसकी सूचना सेबी के साथ-साथ एनएसई और बीएसई को देनी होती है। इसके बाद इन्वेस्टर्स एक्सचेंज को जानकारी देकर इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। इन्वेस्टर्स किस कीमत पर शेयर खरीदना चाहते हैं उसकी जानकारी उपलब्ध करानी होती है। इन्वेस्टर अपनी बोली दाखिल करता है। उसके बाद कुल बोलियों के प्रस्तावों की गणना की जाती है और इससे पता चलता है कि इश्यू कितना सब्सक्राइब हुआ है। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर स्टॉक्स का अलॉटमेंट होता है।
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आईपीओ और एफपीओ में क्‍या है अंतर
 
आईपीओ और एफपीओ दोनों में केवल यही अंतर है कि एफपीओ (फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर) में पहले से सूचीबद्ध कंपनियां अपने कुछ स्टॉक्स बेचती हैं। वहीं, आईपीओ में कंपनियां बकायदा स्टॉक मार्केट में खुद को लिस्टेड कराकर अपने स्टॉक्स इन्‍वेस्‍टर्स को बेचने के लिए प्रस्ताव लाती हैं।
 
कंपनियां क्‍यों लाती हैं आईपीओ
 
दरअसल कंपनियां अपनी विस्‍तार योजनाओं, इक्विटी बढ़ाने और अन्‍य जरूरतों के लिए अपना आईपीओ स्टॉक मार्केट में लाती हैं। इसके अलावा लोन लेने से बचने और पूंजी जुटाने के लिए कंपनियां आईपीओ को सहारा लेती हैं। साथ ही मार्केट की मजबूती को भुनाने के लिए भी कंपनियां आईपीओ को बेहतर विकल्‍प मानती हैं।
 
कैसे तय होती है आईपीओ की कीमत
 
आईपीओ की कीमत दो तरीके से तय होती है। पहला, प्राइस बैंड तय करके इन्‍वेस्‍टर्स से आवेदन मांगे जाते हैं।  कंपनी को जिस रेट पर सबसे ज्यादा आवेदन मिलते हैं, उसी रेट पर कंपनी अपने आईपीओ का दाम तय कर देती हैं। दूसरा फिक्‍स्‍ड प्राइस इश्‍यू के जरिए। इसमें आईपीओ के दाम पहले से तय होते हैं। इन्‍वेस्‍टर्स को केवल शेयर में इन्‍वेस्‍ट करने या नहीं करने का निर्णय लेना होता है।
 
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आईपीओ में कैसे करते हैं इन्‍वेस्‍ट
 
किसी कंपनी के आईपीओ में इन्‍वेस्‍ट करने के इच्‍छुक इन्‍वेस्‍टर्स को इन्‍वेस्‍टमेंट करने के लिए नीचे दिए गए स्‍टेप्‍स के अनुसार आवेदन करना चाहिए। जो इस प्रकार है:-
 
कहां से हासिल करें फॉर्म
 
इन्‍वेस्‍टर्स सबसे पहले सिंडिकेट मेंबर (स्टॉक ब्रोकर), कलेक्शन सेंटर, इश्यू के रजिस्ट्रार (RTI: Registrar to the issue), सेल्फ सर्टिफाइड सिंडिकेट बैंक (SCSB),  इश्यू के बैंकर्स या फिर आप स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट्स से आवेदन फॉर्म प्राप्‍त कर सकते हैं।
 
इस तरह करें आवेदन
 
आईपीओ आवेदन फॉर्म के साथ आपको ऑफर डॉक्युमेंट्स मिलेगा, जिसको भर कर जमा करना होता है। आपको पूरा का पूरा ऑफर डॉक्युमेंट कंपनी, सेबी या कंपनी की वेबसाइट, स्टॉक एक्सचेंज से मिल सकता है। ऑफर डॉक्युमेंट को आप ध्यान से पढ़ें, तभी आईपीओ में निवेश का फैसला लें। हालांकि आईपीओ पर टिप्स और बाजार का सेंटीमेंट आपके फैसले को प्रभावित कर सकता है, लेकिन पहले खुद ऑफर डॉक्युमेंट पढ़कर आश्‍वस्‍त हो लें।
 
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इन्‍वेस्‍ट करते वक्‍त इन बातों का रखें ध्‍यान
 
आईपीओ में पूंजी लगाने से पहले इन्‍वेस्‍टर्स को मुख्य रूप से देखना चाहिए कि जिस रेट पर शेयर प्राइमरी मार्केट में उपलब्‍ध है, वह उचित है या नहीं। इसके बाद उस कंपनी के प्रमोटर को भी जानना जरूरी होता है। इन्‍वेस्‍टमेंट से पहले यह पता करना चाहिए कि उसकी पृष्‍ठभूमि और उसका ट्रैक रिकॉर्ड ठीक-ठाक है या नहीं। इसके अलावा उस कंपनी के साथ कोई जाना-माना फॉरेन पार्टनर जुड़ा हुआ है तो इन्‍वेस्‍टर्स के लिए यह बेहतर स्थिति है। साथ ही आईपीओ में इन्‍वेस्‍ट करते समय यह जानना भी जरूरी है कि कंपनी जिस क्षेत्र में है, उस क्षेत्र की नियामकीय स्थितियां कैसी हैं।
 
इसके अलावा आईपीओ में इन्‍वेस्‍ट करते वक्‍त यह जानना जरूरी है कि कंपनी कितने वक्‍त से कारोबार में है और उसका प्रदर्शन कैसा है। वहीं इन्‍वेस्‍टर्स की नजर इस बात पर भी होनी चाहिए कि कंपनी की देनदारियां कितनी हैं। इसके अलावा यह भी जानना जरूरी है कि आईपीओ से हासिल की गई पूंजी का वह कंपनी क्‍या करने वाली है। आईपीओ के लिए आवेदन करते वक्‍त इन्‍वेस्‍टर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फॉर्म में कोई करेक्‍शन ना हो, कोई ओवर राइटिंग ना हो। इसके लिए नगदी या पोस्‍टल ऑडर अथवा मनी ऑर्डर से भुगतान ना करें। यदि आपको फॉर्म भरने में कोई दिक्‍कत हो तो आप अपने ब्रोकर्स की मदद लें।
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