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    जानिए क्या होता है आईपीओ, इसमें इन्वेस्ट करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

    नई दिल्‍ली। स्टॉक मार्केट में इन्‍वेस्ट करने के इच्छुक लोगों के लिए कई अच्छे मौके मिलने जा रहे हैं। कई कंपनियां मार्केट में आईपीओ लाने की तैयारी कर रही हैं। सेबी के पास 28 कंपनियों ने आईपीओ लाने के लिए आवेदन किया है। कॉफी डे एंटरप्राइजेज पहले ही 1150 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने के लिए अपना आईपीओ स्टॉक मार्केट में उतार चुकी है, वहीं देश की सबसे बड़ी एविएशन कंपनी इंडिगो की भी आईपीओ से 2500 करोड़ रुपए जुटाने की योजना है। यदि आप इन्‍वेस्‍ट करने के इच्‍छुक हैं तो इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।
     
    क्‍या होता है आईपीओ
     
    आईपीओ का मतलब इनीशियल पब्लिक ऑफर्स होता है। इसके लिए कंपनियां बकायदा स्टॉक मार्केट में खुद को लिस्ट कराकर अपने स्टॉक्स इन्‍वेस्‍टर्स को बेचने का प्रस्ताव लाती हैं। स्टॉक मार्केट में लिस्टेड होने के लिए कंपनी को अपने बारे में तमाम जानकारियां सार्वजनिक करनी होती हैं। यदि हम इसे आसान शब्‍दों में कहें तो कंपनी आईपीओ के माध्यम से अपने स्टॉक्स जारी करती है। दरअसल आईपीओ के जरिए कंपनियों के प्रमोटर पूंजी जुटाने के लिए अपनी कंपनी की कुछ हिस्‍सेदारी को बेचते हैं।
     
    क्‍या होता है एफपीओ
     
    दरअसल कंपनियां अपने शेयर पहली बार मार्केट में आईपीओ के जरिए बेचती हैं, लेकिन जब कोई कंपनी पहले से ही मार्केट में लिस्टेड होती है तो वह एफपीओ जारी कर अपने स्टॉक बेचती है। आप इसके जरिए किसी कंपनी के स्टॉक खरीद सकते हैं। हालांकि इसमें किसी कंपनी के बहुत मामूली 100 या 200 शेयर ही खरीदे जा सकते हैं।
     
    क्‍या होता है ओएफएस

    ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस लिस्‍टेड कंपनियों के प्रमोटरों द्वारा अपनी हिस्सेदारी को कम करने का एक नया तरीका है। सेबी के नियमों के मुताबिक जो भी कंपनी ओएफएस जारी करना चाहती है, उसे इश्यू के दो दिन पहले इसकी सूचना सेबी के साथ-साथ एनएसई और बीएसई को देनी होती है। इसके बाद इन्वेस्टर्स एक्सचेंज को जानकारी देकर इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। इन्वेस्टर्स किस कीमत पर शेयर खरीदना चाहते हैं उसकी जानकारी उपलब्ध करानी होती है। इन्वेस्टर अपनी बोली दाखिल करता है। उसके बाद कुल बोलियों के प्रस्तावों की गणना की जाती है और इससे पता चलता है कि इश्यू कितना सब्सक्राइब हुआ है। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर स्टॉक्स का अलॉटमेंट होता है। 
     
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