जानिए, क्‍या है स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग, मोबाइल कंपनी को क्‍या होगा फायदा

Do You Know Team

Sep 10,2015 06:57:00 PM IST
नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने टेलिकॉम सेक्‍टर में एक बड़ा बदलाव लाते हुए स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग और शेयरिंग पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इस ऐलान के बाद मोबाइल कंपनियां अपने अनयूज्‍ड स्‍पेक्‍ट्रम को दूसरी कंपनियों को किराए पर दे सकती है। टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने इसके लिए आवश्‍यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिया है। टेलिकॉम रेग्‍यूलेटरी ऑथरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के अनुमोदन के बाद मोबाइल कंपनियां अब अपने अनयूज्‍ड स्‍पेक्‍ट्रम की ट्रेडिंग कर सकती है।
दरअसल सरकार ने यह फैसला टेलिकॉम सेक्‍टर में स्‍पेक्‍ट्रम के इस्‍तेमाल में बदलाव लाने के लिए किया है। स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग के लिए मोबाइल कंपनियों को 45 दिन पहले ट्राई को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा, लेकिन ट्रेडिंग के लिए मोबाइल कंपनी को सरकार से अनुमति लेना जरूरी नहीं होगा। सरकार का यह फैसला मोबाइल कंपनी एवं कस्‍टमर दोनों के लिए बेहतर और फायदेमंद साबित होगा।
अगली स्‍लाइड में पढ़िए, क्‍या है स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग, इससे किसको मिलेगा फायदा………….
क्‍या है स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग
 
स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग और शेयरिंग यानी स्‍पेक्‍ट्रम का कारोबार करना। इसके तहत मोबाइल ऑपरेटर अब अपने अनयूज्‍ड स्‍पेक्‍ट्रम दूसरी कंपनी को किराए पर दे सकती है। टेलिकॉम डिपोर्टमेंट द्वारा मोबाइल कंपनियों को यह सुविधा दिए जाने से उनको अपनी मांग पूरी करने में सहूलियत होगी। ट्रेडिंग की इजाजत मिलने से अब कोई भी मोबाइल प्रोवाइडर कंपनी उस क्षेत्र में भी अपनी सर्विस प्रोवाइड करा सकती है जिस क्षेत्र में उसके अपने स्‍पेक्‍ट्रम नहीं हैं। ऐसा वह उस सर्किल में सर्विस प्रोवाइड कराने वाली मोबाइल कंपनी के  अनयूज्‍ड स्‍पेक्‍ट्रम स्‍पेस को किराए पर लेकर पूरा कर सकती है। क्‍योंकि, अभी तक मोबाइल कंपनियां उसी क्षेत्र में अपनी सर्विस उपलब्‍ध करा पाती थी जिस क्षेत्र में उसको स्‍पेक्‍ट्रम लाइसेंस मिला हुआ है। स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग और शेयरिंग की इजाजत मिलने से अब मोबाइल कंपनियों के साथ-साथ कस्‍टमर को भी इसका लाभ मिलेगा।
 
कौन कर सकता है ट्रेडिंग
 
ट्राई के मुताबिक स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग नियम के तहत केवल दो एक्‍सेस सर्विस प्रोवाइडर के बीच ही स्‍पेक्‍ट्रम शेयरिंग की इजाजत दी गई है। स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग नियम के अनुसार मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी अब अपने अनयूज्‍ड स्‍पेक्‍ट्रम स्‍पेस को किराए पर दे सकता है। ट्राई ने बेचने और खरीदने वाले को स्‍पेक्‍ट्रम का सिर्फ प्रत्‍यक्ष हस्‍तांतरण का अधिकार मोबाइल कंपनियों को दिया है। लेकिन ट्रेडिंग के वक्‍त स्‍पेक्‍ट्रम की मूल वैधता नियम में बदलाव नहीं होगा जो कि आवंटन के समय था।
 
अगली स्‍लाइड में पढ़िए, क्‍या है स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग, इससे किसको मिलेगा फायदा………….
ट्रेडिंग और शेयरिंग की शर्तें
 
टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने मोबाइल ऑपरेटर को स्‍पेक्‍ट्रम की ट्रेडिंग और शेयरिंग करने की इजाजत कुछ शर्तों के साथ दी है। जिसमें मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को किसी अन्‍य मोबाइल कंपनी के साथ स्‍पेक्‍ट्रम स्‍पेस की ट्रेडिंग करने से 45 दिन पहले ट्राई को सूचित करना होगा। स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग करने के लिए किसी समझौते पर पहुंचने से पहले इसे बेचने वाले को पूरी बकाया राशि का भुगतान करना अनिवार्य है। इसके अलाव स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। वहीं, मोबाइल कंपनियों को स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग की सुविधा उन्‍हें केवल लाइसेंस्‍ड सर्विस एरिया में ही मिलेगी। जबकि, विशेष बैंड में केवल उसी स्‍पेक्‍ट्रम के ट्रेडिंग की इजाजत होगी। इसके अलावा स्‍पेक्‍ट्रम किराए पर लेने वाले को समय-समय पर स्‍पेक्‍ट्रम के लिए निर्धारित सीमाओं का पालन करना होगा।
 
स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग से होगा फायदा
 
दरअसल टेलिकॉम डिपोर्टमेंट ने मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को स्‍पेक्‍ट्रम की ट्रेडिंग और शेयरिंग करने की इजाजत देकर कई तरह से फायदा पहुंचाया है। जिसमें मोबाइल ऑपरेटर उस सर्किल में भी अपने कस्‍टमर को सर्विस प्रोवाइड करा सकता है जिस सर्किल में उनका अपना स्‍पेक्‍ट्रम नहीं है। इसके अलावा मोबाइल कंपनियों को स्‍पेक्‍ट्रम स्‍पेस को किराया पर देने से अतिरिक्‍त आमदनी भी होगी।
X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.