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जानिए, क्‍या होता है पी-नोट्स, इसको लेकर बाजार में क्‍यों आया भूचाल

भारतीय बाजार में किया जाने वाला यह निवेश सेबी के पास रजिस्‍टर्ड विदेशी ब्रोक्रेज हाउस के जरिए किया जाता है।

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नई दिल्‍ली। पी-नोट्स को पार्टिसिपेट्री नोट्स कहा जाता है। इसके जरिए ही विदेशी निवेशक इनडायरेक्‍ट रूप में भारतीय शेयर बाजार में निवेश करते हैं। भारतीय बाजार में किया जाने वाला यह निवेश सेबी के पास रजिस्‍टर्ड विदेशी ब्रोक्रेज हाउस के जरिए किया जाता है। पी-नोट्स को विदेशी निवेशकों के लिए शेयर बाजार में निवेश करने का दस्‍तावेज भी कहा जाता है।
 
पी-नोट्स का इस्‍तेमाल हाई नेटवर्क इंडीविजुअल्‍स (एचएनआई), हेज फंडों और अन्‍य विदेशी संस्‍थानों के जरिए किया जाता है। यानी कि जो निवेशक सेबी के पास रजिस्ट्रेशन करवाए बिना शेयर बाजार में पैसा लगाना चाहते हैं वे पी-नोट्स का इस्‍तेमाल करते हैं। क्‍योंकि निवेशकों को भारतीय शेयर बाजार में पी-नोट्स के जरिए निवेश करने में सुविधा और फायदा भी है।
 
सेबी ने 1992 में दी पी-नोट्स जारी करने की इजाजत
 
दरअसल विदेशी निवेशक सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश नहीं कर सकते, बल्कि रजिस्‍टर्ड विदेशी ब्रोक्रेज हाउस के जरिए ही निवेश कर सकते हैं। इसके लिए निवेशकों को सेबी के पास अलग से रजिस्‍ट्रेशन नहीं कराना पड़ता है। निवेशकों को पी-नोट्स सेबी के पास रजिस्‍टर्ड विदेशी ब्रोक्रेज हाउस ही जारी करता है। ऐसे में निवेशकों को निवेश के समय अलग से पहचान बताना और पूरा ब्योरा सेबी को  को देना जरूरी नहीं होता है। 1992 में सेबी ने भारतीय शेयर बाजार में रजिस्‍टर्ड विदेशी ब्रोक्रेज हाउस को पी-नोट्स के जरिए निवेश करने की इजाजत दी थी। जिससे विदेशी निवेशक सिंगापुर और मॉरीशस के रास्‍ते भारतीय शेयर बाजार में पी-नोट्स के जरिए ज्‍यादातर निवेश करते हैं जिस पर उन्‍हें कोई टैक्‍स नहीं देना पड़ता है।
 
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निवेश में सख्‍ती को लेकर सुर्खियों में है पी-नोट्स
 
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने ब्‍लैक मनी पर रोकथाम लगाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। कोर्ट ने एसआईटी को य‍ह जिम्‍मेदारी दी थी कि वह पता लगाए कि ब्‍लैक मनी पर कैसे रोक लगाई जाए। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी दी है, जिसकी सिफारिशों में कहा गया है कि सेबी को पी-नोट्स के वास्‍तविक धारक की पहचान करने और उसके ट्रांसफर पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। क्‍योंकि एसआईटी को संदेह है कि टैक्‍स चोरी के लिए पी-नोट्स का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। जबकि कुछ विदेशी निवेशक ब्‍लैक मनी को व्‍हाइट में तबदील करने के लिए पी-नोट्स का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। दरअसल अभी तक पार्टिसिपेट्री नोट्स के जरिए भारत में किसी विदेशी निवेश के लिए कोई टैक्‍स नहीं देना पड़ता है।
 
पी-नोट्स नियम सख्‍त बनाने की खबर से सहमे निवेशक  
 
दरअसल पी-नोट्स जारी करने वालों से जानकारी हासिल करने का पावर सेबी के पास पहले से मौजूद है,  लेकिन जिन मामलों में कई स्‍तर पर लेन-देन होते हैं उनमें इंड बेनेफिशरी पी-नोट्स के पहले खरीदार से अलग हो सकता है। विदेशी निवेशकों को इस बात का डर सता रहा है कि भारत सरकार अब उनसे पी-नोट्स के जरिए निवेश करने वाले लोगों की विस्‍तृत जानकारी मांगेगी। उनकी जांच होगी जिस पर फिर बवाल हो सकता है। इस बात की सिफारिश एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में की है। क्‍योंकि एसआईटी ने कहा है कि पी-नोट्स के जरिए भारतीय शेयर बाजार में ब्‍लैक मनी आ रही है।
 
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पी-नोट्स पर सख्‍ती की आशंका से बाजार में हलचल
 
पार्टिसिपेट्री नोट्स के लिए कठोर नियमन की विशेष जांच दल (एसआईटी) की सिफारिश से शेयर बाजार पर बुरा प्रभाव पड़ा है। विदेशी निवेशक फिलहाल भारतीय बाजार में पैसा लगाने से कतरा रहे हैं। हालांकि  एसआईटी रिपोर्ट को लेकर पी-नोट्स पर पड़ने वाले असर से सरकार चिंतित है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि इन सिफारिशों पर कोई भी फैसला सेबी, आरबीआई और अन्य के साथ विचार-विमर्श करने के बाद लिया जाएगा। क्‍योंकि सरकार को डर है कि पी-नोट्स पर पाबंदियों की चर्चा मात्र से निवेशकों के बीच हाहाकार मच सकता है। क्‍योंकि सेबी ने 16 अक्टूबर 2007 को पी-नोट्स पर बैन लगाने के प्रस्‍ताव वाला पेपर जारी किया था उसके बाद शेयर बाजार में तेजी गिरावट आई थी सेंसेक्स लगभग 9 पर्सेंट टूट गया था। इसके चलते ट्रेडिंग एक घंटे के लिए रोकनी पड़ी थी। 
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