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जानिए, क्या होता है क्रूड ऑयल, कीमतें घटने का कहां पड़ता है असर

दुनिया भर में रोजाना तकरीबन 924 लाख बैरल क्रूड ऑयल की खपत है जिसमें अमेरिका, चीन और भारत की हिस्‍सेदारी ज्‍यादा है।

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नई दिल्ली। दुनिया भर में क्रूड ऑयल एक ऐसी कमोडिटी है जिससे कई देशों की अर्थव्‍यवस्‍था चलती है। इसके सस्‍ता और महंगा होने का सीधा असर आम आदमी के जीवन पर पड़ता है। इसकी वजह से देश की इकोनॉमी भी प्रभावित होती है। यह न सिर्फ जीडीपी की ग्रोथ में मदद करता है, बल्कि कुछ देशों के कमाई का य‍ह जरिया भी है। दुनिया भर में रोजाना तकरीबन 924 लाख बैरल क्रूड ऑयल की खपत है। इसका खपत करने वाले देशों में चीन, अमेरिका, जापान और भारत की हिस्‍सेदारी ज्‍यादा है।
 
क्‍या होता है क्रूड ऑयल
 
ग्‍लोबल इकोनॉमी के पहिए को चलाने में क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल की अहम भूमिका है। नेचुरल रूप से पाए जाने वाले अपरिष्कृत तेल को क्रूड ऑयल कहते हैं। दरअसल क्रूड ऑयल काले रंग का गाढ़ा द्रव होता है। यह एक तरह का डार्क हाइड्रोकार्बन पदार्थ है जो कि विश्व में समुद्र और जमीन के अंदर पाया जाता है। इसका इतिहास 30 करोड़ साल का है। एक बैरल ऑयल को बनाने के लिए कम से कम 20 गैलन गैसोलीन का इस्तेमाल किया जाता है। क्रूड ऑयल को बैरल में मापा जाता है और एक बैरल 159 लीटर का होता है।
 
क्रूड ऑयल के फ्रैक्शन डिस्टिलेशन से केरोसिन, पेट्रोल, डीजल, नेचुरल गैस, वेसलीन और ल्यूब्रिकेंट आदि प्राप्त होता है। क्रूड ऑयल को तेल शोधक कारखाना (ऑयल रिफाइनरी) में रिफाइन करने के बाद ही इन सभी को प्राप्‍त किया जाता है। जो कि एक समान्‍य प्रक्रिया है।
 
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कितने तरह का होता है क्रूड ऑयल
 
क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) दो तरह का होता है। जिसमें एक होता है ब्रेंट क्रूड  जो कि लंदन में ट्रेड होता है। दूसरा होता है WTI, जो कि  अमेरिका में ट्रेड होता है। भारत जिस कच्‍चे तेल का आयात किया जाता है, वह ब्रेंट क्रूड है।
 
ब्रेंट कैसे पड़ा नाम
 
ब्रेंट क्रूड ऑयल की पहचान विश्‍व स्‍तर पर बेहतर है। इसका नाम एक अमेरिकन पक्षी ब्रेंट ग्रूस पर रखा गया है। ब्रेंट क्रूड उत्तर समुद्री क्षेत्र से निकाला जाता है। यह एक हल्का मीठा कच्चा तेल है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (एपीआई) के अनुसार इसका घनत्व 38-39 होता है। इसमें सल्फर की मात्रा काफी अधिक होती है जो कि डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल से भी अधिक है। ब्रेंट क्रूड का सबसे पहले उत्‍पादन ब्रेंट ऑयल फील्ड से किया गया था। दुनिया भर के लगभग दो तिहाई क्रूड ऑयल के ट्रेड में प्राइसिंग के लिए ब्रेंट बेंचमार्क का ही इस्तेमाल किया जाता है।
 
डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल
 
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ऑयल का सबसे अधिक इस्‍तेमाल अमेरिका में होता है। इसकी एपीआई ग्रेविटी कम होने के कारण यह हल्का होता है और सल्फर कम होने की वजह से मीठा होता है। इसका प्रयोग कम सल्फर वाली गैसोलीन और कम सल्फर वाला डीजल बनाने में किया जाता है। डब्ल्यूटीआई भी ब्रेंट क्रूड के जैसे एक तरह का बेंचमार्क है।
 
क्रूड ऑयल के प्रमुख उत्पादक देश
 
क्रूड ऑयल के ग्लोबल प्रोडक्शन में ओपेक देशों की हिस्‍सेदारी सबसे अधिक 40 फीसदी है। वहीं, उत्तरी अमेरिका की 17 फीसदी, रूस की 13 फीसदी, चीन की 5 फीसदी, दक्षिण अमेरिका की 5 फीसदी और अन्य देशों की हिस्‍सेदारी 20 फीसदी है। जबकि ओपेक देशों के कुल क्रूड ऑयल प्रोडक्शन में सऊदी अरब की हिस्‍सेदारी 32 फीसदी, ईरान और इराक की 19 फीसदी, कुवैत की 8 फीसदी, यूएई और वेनेजुएला की 16 फीसदी और अन्य की 25 फीसदी है।
 
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भारत में क्रूड की खपत और आयात
 
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल की खपत करने वाला देश है। भारत में अब भी क्रूड की खपत लगातार बढ़ रही है। देश में रोजाना करीब 35 लाख बैरल क्रूड ऑयल की खपत होती है। पिछले 10 वर्षों में क्रूड ऑयल की खपत करीब 40 फीसदी बढ़ी है। भारत अपनी पेट्रोलियम की जरूरत को पूरा करने के लिए 80 फीसदी कूड ऑयल का आयात करता है। जिसमें ज्यादातर क्रूड ऑयल मध्य-पूर्व देशों मसलन ईरान, ईराक और सउदी अरब से आयात होता है। इसमें सऊदी अरब से 20.2 फीसदी, इराक से 13 फीसदी, कुवैत से 10.8 फीसदी, नाइजीरिया से 8.6 फीसदी यूएई से 7.4 फीसदी, ईरान से 5.8 फीसदी और अन्य देशों से 34.2 फीसदी का आयात होता है।
 
क्रूड ऑयल के दाम घटने का फायदा
 
अंतरराष्‍ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आने पर तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम कम करती है। जिससे महंगाई के स्‍तर पर आम आदमी को राहत मिलेगी। डीजल के दाम घटने से जहां मालभाड़ा कम होगा। वहीं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कॉस्‍ट में भी कटौती होगी। क्‍योंकि, बस और हवाई जहाज का किराया कम हो सकता है जिससे कहीं आने जाने में सुविधा होगी। इसके अलावा फल, सब्‍जी और राशन आदि की कीमतों में कमी आएगी। वहीं, देश में मंहगाई दर कम होगी व करेंट अकाउंट घाटा भी कम होगा। साथ ही आयात बिल में कमी आएगी और सरकार का सब्सिडी बोझ भी घटेगा। इसके अलावा क्रूड ऑयल के सस्‍ता होने से पेंट, प्लास्टिक, फर्टिलाइजर और शिपिंग कंपनियों को फायदा होगा।
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