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जानिए, क्‍यों फीकी पड़ी सोने की चमक और क्‍या है कीमतों का गणित

दो साल पहले जहां इसकी कीमत 33 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वह 25 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम से नीचे पहुंच गई है।

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नई दिल्‍ली। सोने की चमक फीकी पड़ रही है और लंबे समय के बाद सोने के दाम जमीन पर आ गए हैं। दो साल पहले जहां इसकी कीमत 33 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वह 25 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम से नीचे पहुंच गई है। यानी बाजार में सोने की कीमत पांच साल के निचले स्‍तर पर है। दरअसल सोने की कीमतों में उछाल और गिरावट मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती है।
 
दरअसल सोना मुश्किल वक्‍त में लोगों के काम आता है। सोने में निवेश को लोग सुरक्षित मानते हैं और निवेश करना भी आसान है। जिसकी वजह से हमेशा सोने की मांग घरेलू और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर बनी रहती है। जबकि कई देश इसको रिजर्व के तौर पर रखते हैं। क्‍योंकि राजनीतिक और आर्थिक संकट की स्थिति में सोने को आप किसी भी समय बेचकर नकदी में बदल सकते हैं। इसके अलावा सोने को गिरवी रखकर लोन भी लिया जा सकता है। इन्‍हीं सब वजह से हमेशा सोने की डिमांड देश और दुनिया में बनी रहती है।
 
सोने की डिमांड बढ़ने और घटने से भी इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। जबकि डॉलर में तेजी की आहट से भी सोने की कीमतों में गिरावट आती है। क्‍योंकि सोने का सबसे अधिक प्रोडक्‍शन करने वाला देश भी अमेरिका है जिसकी अर्थव्‍यवस्‍था का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ता है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुस्त चाल एवं यूरोप और चीन संकट का भी असर सोने की कीमतों पर पड़ा है।
 
 
सोने की कीमतों में गिरावट की वजह
 
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्‍तर पर सोने की कीमतों में गिरावट की कई कारण हैं जिसमें अमेरिका में ब्‍याज दरें बढ़ने की आशंका भी प्रमुख है। यदि अमेरिका में ब्‍याज दरें बढ़ी तो सोने में निवेश कम होना तय है। जबकि चीन और ग्रीस संकट की वजह से भी बाजार में इसकी आपूर्ति बढ़ रही है। दरअसल दोनों ही देश बाजार में मनी फ्लो को बढ़ाने के लिए सोने को बेच रहे हैं। जबकि अतंरराष्‍ट्रीय बाजार में सोने में निवेश पर रिटर्न भी कम हुआ है। इसके अलावा बढ़ती महंगाई और कम बचत की वजह से चीन और भारत में लोगों ने सोने की खरीददारी कम कर दी है। इसके साथ ही भारत में कमजोर मानसून और शादियों का सीजन न होने की वजह से भी लोग सोना नहीं खरीद रहे हैं जिससे इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट आई है।
 
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सोने की जगह शेयर बाजार में बढ़ा निवेश
 
आमतौर पर कम ब्याज दर एवं अनिश्चितिता के महौल में जोखिम से बचने के लिए निवेशक सोने और अन्य कीमती धातुओं में निवेश करते हैं। ताकि उनका निवेश सुरक्षित रहे और उस पर उन्‍हें अच्छा रिटर्न भी मिलता रहे। पिछले दो साल में सोने ने निवेशकों को निगेटिव रिटर्न दिया है जबकि भारतीय शेयर बाजार से निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिला है। इस कारण से भी बीते दो साल में सोने की कीमतों में 9 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। इसलिए भी निवेशकों का रूझान सोने के निवेश में कम हुआ है और निवेशक सोने की जगह शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं। पिछले 2 साल में शेयर बाजार ने 43 फीसदी रिटर्न दिया। इसकी वजह से भी सोने की कीमतों में गिरावट आई है।
 
अमेरिकी डॉलर में तेजी से कम हुआ निवेश
 
अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था के पटरी पर लौटने के संकेत से डॉलर की कीमतों में तेजी के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से डॉलर इंडेक्स 2 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया है और प्रमुख करंसी के मुकाबले डॉलर 98 के पार पहुंच गया है। जिसका असर सोने की कीमतों पर भी हुआ है और इतनी बड़ी गिरावट आई है।
 
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चीन में बड़े पैमाने पर बेचा गया सोना
 
दरअसल चीन में मंदी की आहट से शंघाई गोल्ड एक्सचेंज ने करीब पांच टन सोना बेचा है। इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने की कीमतें गिरी हैं। सोने की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट की प्रमुख कारण सोने के सबसे बड़े खरीदार चीन का सोना बेचना है। क्‍योंकि चीन सोने की कीमतें कम होने के बावजूद बड़े पैमाने पर इसे बेच रहा है। जिसकी वजह से इसकी कीमतों पर दबाव बना और इसमें बड़ी गिरावट आई है।
 
भारत में सोने की मांग में आई कमी
 
दरअसल सोने की मांग विश्‍व के तमाम देशों में रहती है खासतौर पर भारत में इसकी मांग ज्‍यादा रहती है। भारत में सोने की जितनी मांग है उसकी आपूर्ति विदेश से आयात कर पूरी की जाती है। ऐसे में यदि  वैश्विक स्‍तर पर सोने के दाम में गिरावट आती है तो भारत में भी इसकी कीमतों पर गिरावट का प्रभाव पड़ता है। भारत में सोने की खरीददारी पैसा सुरक्षित करने के मकसद से भी होती है। इसके अलावा सोने की मांग ज्‍यादातर आभूषण निर्माण के लिए होता है और कुल मांग में शादियों की हिस्सेदारी 80 फीसदी के करीब है। ऐसे में शादी सीजन का नहीं होना भी सोने की कीमतों में गिरावट का एक बड़ा कारण है।
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