जानिए, क्या है निगेटिव इंटरेस्ट रेट, देश की इकोनॉमी को कैसे मिलता है फायदा

Do You Know Team

Feb 01,2016 04:49:00 PM IST
नई दिल्‍ली। हाल ही में जापान ने अपनी इकोनॉमी को बूस्‍ट करने के लिए निगेटिव इंटरेस्‍ट रेट पॉलिसी (एनआईआरपी) को लागू किया है। दरअसल जापान के द्वारा एनआईआरपी पॉलिसी लागू करने की वजह महंगाई दर को कम करना और वैश्विक मंदी की आशंका के मद्देनजर अपनी इकोनॉमी को मजबूत करना है। किसी भी देश और सरकार का निगेटिव इंटरेस्‍ट रेट पॉलिसी को लागू करने का मकसद ही यह है कि लोगों को पैसा जमा करने की बजाय अधिक से अधिक खर्च करने के लिए प्रोत्‍साहित करे। ताकि, मंदी की स्थिति में उससे उत्‍पन्‍न परिस्थितियों से निपटने में सरकार पूरी तरह सक्षम हो सके। क्‍योंकि, मंदी से आमतौर पर आम आदमी ही अधिक प्रभावित होता है।
क्‍या है निगेटिव इंटरेस्‍ट रेट पॉलिसी
निगेटिव इंटरेस्‍ट रेट पॉलिसी (एनआईआरपी) का मतलब है प्राइवेट बैंक आपके जमा धन पर आपको इंटरेस्‍ट देने की बजाय आप से ही इंटरेस्‍ट वसूल करे। अर्थात् जिन लोगों ने बैंक में अपना पैसा जमा किया हुआ है उन जमाकर्ताओं को नियमित रूप से अपने जमा धन के एवज में बैंक को इंटरेस्‍ट का भुगतान करना जरूरी होता है।
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निगेटिव इंटरेस्ट रेट पॉलिसी लाने की वजह कोई भी देश निगेटिव इंटरेस्ट रेट पॉलिसी तभी लागू करता है, जब उसको लगता है कि उसकी इकोनॉमी की ग्रोथ में सुस्त कायम है। साथ ही इनफ्लेशन दर भी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। इसके अलावा ग्लोबल फाइनेंशिल मार्केट में उतार-चढ़ाव बना हो। वहीं, कमोडिटी पर निर्भर इकोनॉमी और विशेषकर विकासशील देशों में अनिश्चितता कायम हों। निगेटिव इंटरेस्ट रेट लाने का मकसद निगेटिव इंटरेस्ट रेट पॉलिसी लाने का उद्देश्य बैंकों को अधिक से अधिक लोने देने और लोगों को इंवेस्ट तथा खर्च करने के लिए प्रोत्साहित करना है। ताकि, लोग बैंकों में पैसा जमा करने की बजाय कर्ज लेने और ज्यादा से ज्यादा खर्च करने के लिए प्रोत्साहित हो। निगेटिव इंटरेस्ट रेट पॉलिसी लागू करने से देश में नकदी का फ्लो बढ़ेगा और इससे इकोनॉमी को बूस्ट मिलने लगेगा। वहीं, इसका पॉजिटिव असर स्टॉक मार्केट पर भी पड़ता है।इससे देश की इकोनॉमी कैसे होता है फायदा कोई भी देश आर्थिक संकट की आहट एवं उससे उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए निगेटिव इंटरेस्ट रेट पॉलिसी को लागू करता है। आमतौर पर इसको अंतिम उपाय के तौर पर ही कोई भी सरकार लागू करती है। ताकि, जनता पैसा जमा करने की बजाय ज्यादा से ज्यादा खर्च कर सकें। जब लोग अधिक मात्रा में खर्च करने लगेंगे तो मार्केट में डिमांड बढ़ेगी और इससे मैन्यूफैक्चिरिंग सेक्टर को भी बूस्ट मिलेगा। वहीं इससे मार्केट में नकदी का फ्लो भी तेजी के साथ बढ़ेगा, जिससे देश की इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी।
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