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जानिए, क्या है ग्लोबल वार्मिंग, क्या है इसकी वजह और बचाव के उपाय

वर्ल्‍ड बैंक की अगुआई में दुनिया के 6 बड़े लेंडर भी सामने आए और उन्‍होंने विकासशील देशों में क्‍लाइमेंट चेंज से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड भी बनाया है।

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नई दिल्‍ली। पेरिस में क्‍लाइमेंट चेंज यानी ग्‍लोबल वार्मिंग को लेकर दुनियाभर के तमाम विकसित और विकासशील देशों की बैठक हाल ही में संपन्‍न हुई है। ग्‍लोबल वार्मिंग से होने वाले नुकसान को लेकर के तकरीबन सभी देशों ने चिंता जताई है। दुनिया के सभी देशों ने साल 2020 तक कार्बन इमीशन में कमी लाने और इसके लिए निर्धारित मापदंड का पालन करने की बात कही है। वहीं, वर्ल्‍ड बैंक की अगुआई में दुनिया के 6 बड़े लेंडर भी सामने आए और उन्‍होंने विकासशील देशों में क्‍लाइमेंट चेंज से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड भी बनाया है।
 
दरअसल पृथ्‍वी के जलवायु संतुलन को ठीक करने के लिए प्रदूषण को कम करना होगा, जिसमें एक बड़ा हिस्सा धुएं का होता है। दुनियाभर में यह धुआं कारखानों के संयंत्रों और गाड़ियों से निकलता है, जिसमें ऊर्जा संयंत्र भी शामिल हैं। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि ऊर्जा के नए स्रोतों की तलाश के साथ सोलर पावर (अक्षय ऊर्जा) की उपलब्धता को आसान बनाया जाए, ताकि ग्‍लोबल वार्मिंग से होने वाले खतरों से बचा जा सके।
 
क्‍या है ग्‍लोबल वार्मिंग
 
ग्‍लोबल वार्मिंग का मतलब होता है पृथ्‍वी का तापमान बढ़ जाना। दरअसल पृथ्‍वी की सतह का औसत तापमान में यह बढ़ोतरी ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव में आने की वजह से होता है। इसे समान्‍य शब्‍दों में हम यदि कहें कि ग्लोबल वार्मिंग का मतलब है कि पृथ्वी लगातार गर्म होती जा रही है। क्‍लाइमेंट चेंज होने की वजह से आने वाले दिनों में सूखा, बाढ़ और मौसम का मिजाज बुरी तरह बिगड़ा हुआ दिखेगा।
 
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ग्लोबल वार्मिंग की वजह
 
पर्यावरण के जानकारों और वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्‍लोबल वार्मिंग की वजह तेजी से औद्यो‍गीकरण, शहरों का विकास, जंगलों का तेजी से कम होना है। इसके अलावा पेट्रोलियम पदार्थों के धुंए से होने वाला प्रदूषण और फ्रिज तथा एयरकंडीशनर आदि का बढ़ता प्रयोग भी इसके लिए जिममेदार है।
 
ग्‍लोबल वार्मिंग का असर
 
दुनियाभर में अब इसका असर भी दिखने लगा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं और रेगिस्तान बढ़ते जा रहे हैं। कहीं, समान्‍य से कम तो कहीं असामान्य बारिश हो रही है, तो कहीं असमय ओले पड़ रहे हैं। वहीं, कहीं सूखा पड़ रहा है, तो कहीं नमी में कमी नहीं आ रही है।
 
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ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय
 
पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग में कमी लाने के लिए हमें मुख्य रूप से क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) गैसों के उत्‍सर्जन को रोकना होगा। इसके लिए फ्रिज, एयर कंडीशनर और दूसरे कूलिंग मशीनों का इस्तेमाल कम करना होगा। इसकी जगह ऐसी मशीनों के उपयोग की संभावना को तलाशना होगा जिनसे सीएफसी गैसें कम निकलती है।
 
इसके अलावा आद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकले वाला धुंआ हानिकारक है और इनसे निकलने वाला कार्बन डाई ऑक्‍साइड तापमान को बढ़ाता है। इन इकाइयों में प्रदूषण को रोकने के उपाय भी करने होंगे। वहीं, दूसरी ओर वाहनों से निकले वाले धुंए के प्रभाव को कम करने के लिए भी पर्यावरण मानकों (इमीशन नॉर्म्‍स) का सख्‍ती से पालन करना होगा। उद्योगों और खासकर रासायनिक इकाइयों से निकलने वाले कचरे को फिर से उपयोग में लाने लायक बनाने की कोशिश करनी होगी।
 
साथ ही प्राथमिकता के आधार पर सभी देशों को पेड़ों की कटाई रोकनी होगी और जंगलों के संरक्षण पर बल देना होगा। वहीं, सोलर एनर्जी के उपायों पर ध्यान देना होगा यानी कि अगर कोयले से बनने वाली बिजली के बदले पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और पनबिजली पर ध्यान दिया जाए तो वातावरण को गर्म करने वाली गैसों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
 
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